झाबुआ में प्रांतीय महिला स्व-सहायता समूह महासंघ और रसोइया संघ की जिला अध्यक्ष अनिता चौहान के नेतृत्व में महिलाओं ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। यह कदम प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना (मध्यान्ह भोजन) के तहत कार्यरत हजारों स्व-सहायता समूहों और रसोइया बहनों की समस्याओं के निराकरण के लिए उठाया गया है। संघ ने बताया कि बढ़ती महंगाई के बावजूद महिलाएं पूरी निष्ठा से बच्चों को भोजन करा रही हैं, लेकिन मानदेय कम होने और समय पर खाद्यान्न-राशि न मिलने से उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। ज्ञापन में प्रमुख मांगें रखी गईं रसोइया बहनों के बीते तीन सालों के जून महीने का 15-15 दिन का बकाया तुरंत दिया जाए। रसोइयों का मानदेय 4,000 रुपए से बढ़ाकर 15,000 रुपए प्रति महीने किया जाए और आंगनवाड़ी रसोइयों को अलग से मानदेय मिले। प्राथमिक शाला में भोजन दर 15 से बढ़ाकर 20 रुपए (खाद्यान्न 300 ग्राम) और माध्यमिक शाला में 20 से बढ़ाकर 30 रुपए (खाद्यान्न 350 ग्राम) की जाए। सेवा सुरक्षा, बीमा और ठेका प्रथा पर रोक की चेतावनी महिलाओं ने बीते दो सालों में घटती रसोइयों की संख्या पर चिंता जताते हुए सेवा सुरक्षा की मांग की। इसके अलावा स्व-सहायता समूहों के अध्यक्ष, सचिव और रसोइयों का 20 लाख रुपए का सुरक्षा बीमा कराने की मांग उठाई गई। संघ ने बिना वजह अनुबंध रद्द करने और ठेका प्रथा पर रोक लगाने की मांग करते हुए हर महीने की तय तारीख पर राशि और खाद्यान्न जारी करने की पुरानी व्यवस्था लागू करने का आग्रह किया है।
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