नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर : अगले माह से यूपीआई पर लागू हो रहे शुल्क (एमडीआर) के विरोध में सबसे पहले इंदौर के व्यापारी आगे आए हैं। नो यूपीआई डे मनाकर इंदौर के व्यापारी बुधवार को प्रस्तावित शुल्क का विरोध करेंगे।
विरोध के केंद्र में राजवाड़ा, सियागंज, मारोठिया और सराफा बाजार जैसे पुराने बाजार रहेंगे। इसी के साथ इंदौर देश का पहला शहर होगा जहां के व्यापारी सबसे पहले यूपीआई के नए शुल्क के विरोध में सड़क पर आ गए हैं। मंगलवार शाम को टाइल्स व सेनेटरी व्यापारी एसोसिएशन ने विरोध में मशाल रैली निकाली।
इंदौर प्रदेश में पहले और देश में 21 वें नंबर पर खड़ा है
यूपीआई ट्रांजेक्शन के आंकड़ों को देखें तो इस मामले में इंदौर प्रदेश में पहले नंबर और देश में 21 वें नंबर पर खड़ा है। अगस्त के ट्रांजेक्शन के लिहाज से भोपाल 37वें, ग्वालियर 111वें नंबर और उज्जैन देश में 129वें नंबर पर हैं। जबकि प्रदेश में इंदौर के बाद इनका नंबर दूसरा-तीसरा और चौथा है।
वा सौ व्यापारी संगठन विरोध आंदोलन में शामिल हो रहे हैं
एमडीआर के विरोध का ऐलान अहिल्या चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ने किया है। शहर के कुल सवा सौ व्यापारी संगठन इस चेंबर के सदस्य है। यानी एक साथ सवा सौ व्यापारी संगठन विरोध आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। तमाम पुराने बाजारों के साथ पेट्रोल-डीजल पंप, प्लायवुड, लोहा बाजार, सेनेटरी-टाइल्स व्यापारी जैसे बाजारों में भी नो यूपीआई डे का असर नजर आएगा।
रिटेल रेडीमेड गारमेंट व्यापारी एसोसिएशन बुधवार को राजवाड़ा पर दुकानों के यूपीआइ बार कोड को एकत्र कर काले कपड़े से ढंक कर विरोध प्रदर्शन करेगा।इस आधिकारिक आंदोलन से पहले ही इंदौर सेनेटरी एंड टाइल्स व्यापारी एसोसिएशन ने मशाल रेली निकालकर गांधी प्रतिमा पर विरोध प्रदर्शन भी किया।
हर व्यापारी उपभोक्ता भी है
यूपीआइ शुल्क का असर व्यापारी पर पड़ेगा और उपभोक्ता प्रभावित नहीं होगा यह दावा सरकार कर रही है। व्यापारी और विशेषज्ञ दोनों इसे गलत बयान बता रहे हैं। अहिल्या चेंबर के अध्यक्ष रमेश खंडेलवाल के अनुसार व्यापारी पर शुल्क लगेगा तो वह खुद बोझ क्यों उठाएगा। लागत में उसका खर्च जोड़ा जाएगा जिसका बोझ अंतत: खरीदार पर आएगा। एक रिटेल व्यापारी आगे थोक वाले के लिए खरीदार है। वह अपने यूपीआइ में आए पैसे को खर्च करेगा तो उसके व्यापारी पर शुल्क लगेगा जो वह उससे वसूला जाएगा।
निवेशकों में चिंता
कर सलाहकार आरएस गोयल के अनुसार सिर्फ उपभोक्ता और आम बाजार नहीं बल्कि एमडीआर शुल्क से निवेशक भी प्रभावित होगा। गोयल के अनुसार एमडीआर से स्टाक ब्रोकर्स पर भी अतिरिक्त लागत का बोझ आएगा। उदाहरण के लिए निवेशक 5 लाख किसी ब्रोकर को ट्रांसफर करता है। उसमें से 1 लाख बाजार में निवेश होते हैं। सेबी के नियम के अनुसार 30 दिन में शेष पैसा फिर ब्रोकर निवेशक को वापस करता है। ब्रोकर भले ही बिना आय के वापस कर रहा है लेकिन उस पर पूरे पांच लाख के एमडीआर का बोझ तो आ ही जाएगा।ऐसे में यह निवेश में भी लागत बढाएगा।
सबसे ज्यादा किराने में उपयोग
नेशनल पेमेंट कार्पोरेशन आफ इंडिया द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार देश में इस्तेमाल हो रहे यूपीआइ ट्रांजेक्शन में से करीब 25.8 प्रतिशत किराना (ग्रासरी) और सुपर मार्केट में होते हैं। धन के हिसाब से देखें तो वैल्यू 9.7 प्रतिशत होती है। हालांकि पेमेंट कार्पोरेशन दावा कर रहा है कि इनमें से ज्यादातर 2 हजार से कम के होते हैं ऐसे में ज्यादातर पर बोझ नहीं आएहा।
दूसरे नंबर पर रेस्टोरेंट के बिल चुकाने में यूपीआई का इस्तेमाल होता है जो 18.2 प्रतिशत है। वैल्यू के लिहाज से लोन और ईएमआइ चुकाने में यूपीआई की हिस्सेदारी करीब 8.3 प्रतिशत की है। यानी लोन चुकाने और ईएमआई भरने वालों पर इसका सबसे ज्यादा बोझ आता दिख रहा हैं। क्योंकि किस्तों का आंकड़ा ज्यादातर मामलों में 2 हजार रुपये से ज्यादा होता है।
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