श्राद्ध में इन बातों का रखें ध्यान
श्राद्ध कर्म के लिए कुतप काल को श्रेष्ठ माना गया है।
पितरों के निमित्त तर्पण, पिंडदान और दान करें।
ब्राह्मण को घर आमंत्रित कर श्रद्धापूर्वक भोजन कराने की परंपरा है।
भोजन के बाद वस्त्र, पुस्तक और दक्षिणा देने का विधान बताया गया है।
पूजन सामग्री, पुष्प, वस्त्र और भोजन में श्वेत रंग का विशेष महत्व है।
श्राद्ध कर्म पूर्ण होने के बाद ही परिवार के सदस्य सामूहिक भोजन करें।
वाघेला गो सेवा समिति की पहल
शनिवार से श्राद्ध पक्ष शुरू हो गया। इसके साथ ही घर-घर पितरों के तर्पण, श्राद्ध और स्मरण का सिलसिला शुरू होगा। पितृपक्ष में श्रद्धालु अपने पूर्वजों की तिथि के अनुसार श्राद्ध कर्म करेंगे। मंदिरों और तीर्थस्थलों पर भी तर्पण के लिए श्रद्धालुओं की आवाजाही रहेगी। 10 अक्टूबर तक मनाए जाने वाले श्राद्ध पक्ष के अन्तर्गत सनातनी परंपरा के निर्वहन हुए वाघेला गो सेवा जीव दया समिति की ओर से नगर में कौओं को भोजन कराने की विशेष व्यवस्था की गई है।
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