भिंड से चोरी हुए डंपर को तलाशने में पुलिस को 19 दिन तक अलग-अलग राज्यों में दौड़ना पड़ा। करीब 600 किलोमीटर के सफर में चोर लगातार रास्ते बदलते रहे। कभी मुख्य सड़क छोड़कर कच्चे रास्ते से ट्रक निकाला तो कभी पुलिस को उलझाने के लिए आगे जाने के बाद उसी रूट पर वापस लौट आए। चोरी के बाद डंपर का GPS बंद था, इसलिए उसकी सीधी लोकेशन पुलिस के पास नहीं थी। ऐसे में अलग-अलग जगहों के CCTV कैमरे ही जांच की सबसे अहम कड़ी बने। एक कैमरे में दिखा वाहन अगले कैमरे तक कैसे पहुंचेगा, पुलिस इसी कड़ी को जोड़ते हुए आगे बढ़ती रही। राजस्थान से लेकर मेवात तक टीम ने संदिग्धों की तलाश की और करीब 150 लोगों से संपर्क किया। लेकिन चोरों तक पहुंचना और फिर डंपर को वापस लाना आसान नहीं था। आखिर पुलिस ने चोरों की पहचान कैसे की, मेवात में टीम ने क्या रणनीति अपनाई और गुजरात भेजे जा चुके डंपर को कैसे वापस लाया, पढ़िए पूरी रिपोर्ट… 25 अगस्त को ये हुई थी वारदात शहर के शास्त्री कॉलोनी के पास सीता नगर बायपास से डंपर क्रमांक RJ 11 JC 9454 चोरी हुआ था। 25 अगस्त की सुबह ट्रक मालिक ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगालना शुरू की तो चोरी से पहले एक काले रंग की कार क्षेत्र में घूमती दिखाई दी। पुलिस के मुताबिक आरोपी राजस्थान के नूंह-मेवात क्षेत्र से आए थे। उन्होंने पहले भिंड-ग्वालियर क्षेत्र में हाईवे किनारे खड़े ट्रकों की रेकी की। मौका मिलते ही डंपर चोरी कर लिया। टोल से बचने के लिए बदले रास्ते डंपर चोरी करने के बाद आरोपी सीधे मुख्य मार्ग से नहीं गए। उन्होंने टोल प्लाजा और प्रमुख CCTV कैमरों से बचने के लिए अलग-अलग रास्तों का इस्तेमाल किया। भिंड से आगे बढ़ते हुए कई बार रूट बदला गया। पुलिस की जांच में एक ऐसा रूट भी सामने आया, जहां कम दूरी होने के बावजूद डंपर को करीब 100 किलोमीटर तक कच्चे रास्ते से ले जाया गया। कई जगह आरोपियों के मुख्य सड़क छोड़ने के संकेत मिले। चोर जिस रास्ते से आगे बढ़ते थे, कई बार उसी रास्ते पर वापस भी लौटते थे। इससे पुलिस के लिए उनकी वास्तविक दिशा तय करना मुश्किल हो रहा था। धौलपुर में 16 घंटे ट्रक छिपाया जांच में सामने आया कि चोरी के बाद डंपर को धौलपुर में करीब 16 घंटे तक छिपाकर रखा गया। इसके बाद आगे बढ़ने से पहले उसके हुलिए में बदलाव किया गया। पुलिस को अलग-अलग स्थानों से मिली CCTV फुटेज में वाहन की पहचान के लिए हर छोटी चीज पर ध्यान देना पड़ा। एक स्थान की फुटेज से मिले सुराग को दूसरे स्थान की फुटेज से मिलाया गया। इस तरह पुलिस ने करीब 600 किलोमीटर के रूट की कड़ियां जोड़ते हुए चोरों का पीछा किया। GPS बंद था, 25 जवान CCTV में तलाशते रहे चोरी के बाद डंपर का GPS बंद मिला। इससे पुलिस को वाहन की सीधी लोकेशन नहीं मिल पा रही थी। इसके बाद CCTV फुटेज ही जांच का मुख्य आधार बनी। करीब 25 जवानों की अलग-अलग टीमों ने संभावित रूट के कैमरों की फुटेज खंगाली। एक टीम किसी इलाके की फुटेज जुटाती तो दूसरी टीम आगे के रूट पर उसकी कड़ियां जोड़ती। आरोपी जब रास्ता बदलते तो पुलिस को भी अपनी दिशा बदलनी पड़ती। देहात थाना प्रभारी शिवप्रताप सिंह राजावत के नेतृत्व में टीम लगातार इस ऑपरेशन में जुटी रही। राजस्थान और हरियाणा के अलग-अलग इलाकों में स्थानीय पुलिस से भी संपर्क किया गया। काली कार और लंबे बाल वाला व्यक्ति बना पहला सुराग चोरी से पहले मिले CCTV फुटेज में काले रंग की कार और लंबे बाल वाला एक व्यक्ति नजर आया था। पुलिस के लिए यही शुरुआती अहम सुराग बना। पुलिस के मुताबिक संदिग्ध मेवात क्षेत्र में अलग-अलग नामों से पहचान बनाकर रह रहा था। उसकी पहचान तक पहुंचने के लिए पुलिस ने वहां करीब 150 लोगों से संपर्क किया। स्थानीय मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया और संदिग्धों के बारे में जानकारी जुटाई गई। धीरे-धीरे पुलिस मुख्य आरोपी तक पहुंच गई। मास्टरमाइंड पर 40 से ज्यादा वाहन चोरी के केस पुलिस के मुताबिक मुख्य आरोपी केहरीराम उर्फ सेरा उर्फ चुटिया मीणा, निवासी बसंतपुरा, सरमथुरा, जिला धौलपुर है। पुलिस का कहना है कि उसके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में 40 से अधिक ट्रक चोरी के मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। उसके साथ एक अन्य आरोपी के शामिल होने की भी जानकारी सामने आई। पुलिस के मुताबिक वह आरोपी हत्या के मामले में जेल से पैरोल पर बाहर आने के बाद फरार चल रहा था। 8 लाख में सौदा, गुजरात के कच्छ भेजा ट्रक पुलिस की जांच में सामने आया कि चोरी किए गए डंपर का करीब 8 लाख रुपए में सौदा हो चुका था। ट्रक का मॉडल और हुलिया बदलने के बाद उसे गुजरात के कच्छ क्षेत्र में भेज दिया गया था। पुलिस के करीब पहुंचने की भनक लगने के बाद आरोपियों ने अपना हुलिया भी बदल लिया। पुलिस के मुताबिक लंबे बाल वाला आरोपी बाल कटवाकर सामने आया, जबकि दूसरे आरोपी ने दाढ़ी बढ़ा ली। भाई पर दबाव बनाया, संदेश दिया- ट्रक लेकर ही जाएंगे पुलिस जब मुख्य आरोपी के करीब पहुंचने लगी तो आरोपियों पर दबाव बढ़ गया। पुलिस ने मुख्य आरोपी के भाई को पकड़कर पूछताछ की। इसके बाद उसके जरिए आरोपियों तक संदेश पहुंचाया गया कि चोरी का ट्रक वापस चाहिए। लगातार कार्रवाई और पुलिस के दबाव के बाद आरोपी ट्रक लौटाने के लिए तैयार हो गए। पुलिस टीम इसके बाद आरोपियों के संभावित ठिकानों के आसपास पहुंची और करीब दो दिन तक निगरानी करती रही। इसी दौरान राजस्थान में भिवाड़ी के पास जयपुर-भिवाड़ी-सोहना मार्ग के एक होटल में ट्रक खड़ा होने की सूचना मिली। टीम ने मौके पर पहुंचकर डंपर बरामद कर लिया। इसी कार्रवाई के दौरान मुख्य आरोपी केहरीराम को भी गिरफ्तार किया गया। मेवात में रात नहीं रुकती थी पुलिस इस ऑपरेशन में आरोपियों तक पहुंचने के अलावा पुलिस के सामने एक और चुनौती थी। टीम तीन-चार कारों से मेवात क्षेत्र में गई थी। अधिकारियों के मुताबिक वहां पुलिस की गाड़ियों के चोरी होने का भी खतरा था। इसी कारण टीम रात में मेवात में नहीं रुकती थी। दिनभर तलाश और निगरानी के बाद पुलिसकर्मी हरियाणा या दिल्ली चले जाते और होटल में रात बिताते। सुबह फिर मेवात लौटकर तलाश शुरू कर देते। इस तरह करीब 19 दिन तक टीम अलग-अलग स्थानों पर चोरों की तलाश करती रही। चोरों के रूट और हुलिए बदलने से बढ़ी मुश्किल पुलिस की पड़ताल में सामने आया कि आरोपी चोरी के वाहन को एक जगह ज्यादा देर तक नहीं रखते थे। धौलपुर में करीब 16 घंटे वाहन छिपाने के बाद उसका हुलिया बदला गया और आगे भेज दिया गया। पुलिस को आशंका थी कि अगर समय रहते डंपर बरामद नहीं हुआ तो उसका नंबर, मॉडल और बाहरी पहचान बदलकर उसे दूसरे राज्य में खपा दिया जाएगा। इसी वजह से CCTV फुटेज की कड़ियां जोड़ने के साथ-साथ संभावित खरीदार और वाहन के नए ठिकाने की जानकारी भी जुटाई गई। 19 दिन बाद वापस आया चोरी हुआ डंपर एक काले रंग की कार से शुरू हुई जांच CCTV कैमरों की कड़ियों से आगे बढ़ी और राजस्थान-हरियाणा होते हुए मेवात तक पहुंची। GPS बंद होने के बावजूद पुलिस ने करीब 600 किलोमीटर के संभावित रूट को खंगाला। करीब 150 लोगों से संपर्क, स्थानीय मुखबिर तंत्र की मदद और कई दिनों की निगरानी के बाद पुलिस मुख्य आरोपी तक पहुंची। डंपर का सौदा हो चुका था और उसे गुजरात के कच्छ भेज दिया गया था, लेकिन पुलिस ने दबाव बनाकर उसका ठिकाना तलाश लिया। अंततः राजस्थान के भिवाड़ी के पास होटल से डंपर बरामद कर लिया गया और मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस के मुताबिक इस पूरी कार्रवाई में करीब 3 लाख रुपए से अधिक खर्च हुए। तीन-चार वाहनों से लगातार आवाजाही, अलग-अलग राज्यों में तलाश, CCTV फुटेज जुटाने और कई दिनों तक निगरानी के बाद पुलिस चोरी हुआ डंपर वापस भिंड लाने में सफल रही। एक ट्रक की तलाश में खुला बड़ा नेटवर्क पुलिस के मुताबिक इस मामले की जांच में ऐसे आरोपी तक पहुंच बनी, जिसके खिलाफ अलग-अलग राज्यों में 40 से ज्यादा वाहन चोरी के मामले दर्ज होने की जानकारी सामने आई है। जांच में चोरी के बाद वाहन को छिपाने, रूट बदलने, हुलिया बदलने और दूसरे राज्य में भेजने का तरीका भी सामने आया। इस पूरे ऑपरेशन में GPS बंद होने के बावजूद पुलिस ने CCTV फुटेज, स्थानीय संपर्क और मुखबिर तंत्र के जरिए चोरों के रास्ते की कड़ियां जोड़ीं। 19 दिन की तलाश के बाद गुजरात भेजे जा चुके डंपर को राजस्थान के भिवाड़ी से बरामद कर भिंड लाया गया। ट्रक का 8 लाख रुपए में सौदा हो चुका है टीआई शिवप्रताप सिंह राजावत के अनुसार, बदमाश भिंड से चोरी किए ट्रक को ग्रामीण रास्तों से धौलपुर, राजस्थान ले गए। पुलिस ने इसके बाद अलग-अलग स्थानों की करीब 800 से 1000 CCTV कैमरों की फुटेज खंगालकर ट्रक की आवाजाही का रूट ट्रेस किया। पुलिस को गुमराह करने के लिए आरोपियों ने धौलपुर में ट्रक की बॉडी और रंग बदल दिया था। आरोपियों की पहचान के लिए सोशल मीडिया का सहारा लिया गया। इंस्टाग्राम अकाउंट पर मौजूद तस्वीरों में पहने कपड़ों का मिलान CCTV फुटेज में दिख रहे संदिग्धों से किया गया। इसी आधार पर एक आरोपी की पहचान हुई। पुलिस ने आरोपी के भाई से पूछताछ की तो पता चला कि ट्रक का 8 लाख रुपए में सौदा हो चुका है और उसे गुजरात भेज दिया गया है। पुलिस ने गुजरात से ट्रक वापस बुलवा लिया। मामले में एक आरोपी गिरफ्तार है, जबकि दो अन्य की तलाश जारी है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी के खिलाफ भिंड जिले के अलग-अलग थाना क्षेत्रों सहित अन्य स्थानों पर 40 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं।
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