कांग्रेसी पार्षद कुणाल सोलंकी बोतलें में नर्मदा का गंदा पानी लेकर इंदौर नगर निगम पहुंचे और अधिकारियों को ये उपहार में दे दीं।
HighLights
- वार्ड में पिछले छह महीने से नर्मदा का गंदा पानी आ रहा है
- इसकी शिकायत भी की, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है
- रहवासी इस पानी को पीकर लगातार बीमार हो रहे हैं
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर निगम मुख्यालय में होने वाली जनसुनवाई में मंगलवार को उस वक्त हंगामा मच गया, जब कांग्रेसी पार्षद कुणाल सोलंकी बोतल में नर्मदा का गंदा पानी लेकर पहुंचे। उन्होंने इस गंदे पानी को निगम अधिकारियों को उपहार में दिया। सोलंकी ने कहा कि उनके वार्ड में पिछले छह महीने से नर्मदा का गंदा पानी आ रहा है। उन्होंने इसकी शिकायत भी की, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। गंदा पानी पीने से रहवासी परेशान हैं।
दो बच्चे बीमार भी हो गए। पार्षद ने चेतावनी दी कि अब भी स्थिति नहीं सुधरी तो वे यही पानी निगम अधिकारियों को पिलाएंगे। सोलंकी ने बताया कि छह माह से कुम्हार भट्टी क्षेत्र में गंदा पानी आ रहा है। निगम अधिकारियों का कहना है कि काम शुरू करवा दिया है, लेकिन वास्तविकता यह है कि कुछ नहीं हो रहा।
अधिकारियों को दूषित पानी गिफ्ट किया
वे अपने वार्ड को दूसरा भागीरथपुरा नहीं बनने देंगे। रहवासी इस पानी को पीकर बीमार हो रहे हैं। यही वजह है कि हमने अधिकारियों को दूषित पानी गिफ्ट किया है। अपर आयुक्त आशीष कुमार पाठक ने बताया कि एक दिन पहले ही लीकेज का सुधार कार्य हुआ था। इसी वजह से पानी दूषित आ रहा था। हमने सुधार कार्य करवा दिया है। लीकेज के सुधार कार्य के बाद सैंपल लिया जाएगा।
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कलेक्ट्रेट जनसुनवाई : प्लाट के नाम रुपये लिए, रजिस्ट्री से पहले सौदा दूसरे को देने का आरोप
कलेक्ट्रेट जनसुनवाई में प्लाट खरीदने के लिए 1.70 लाख रुपये लेने के बाद प्लाट किसी अन्य व्यक्ति को देने और रकम वापस नहीं लौटाने का मामला सामने आया। पलासिया क्षेत्र निवासी रिया पिता संजय ने शिकायत में बताया कि 25 मई को इंदौर-उज्जैन हाईवे स्थित जेतपुरा रोड, पैरामाउंट सिटी, सांवेर में ईडब्ल्यूएस प्लाट का सौदा किया था।
प्रापर्टी ब्रोकर देवेन्द्र नागर के माध्यम से 1.70 लाख रुपये दिए गए। इसमें 11 हजार रुपये बैंक खाते में ट्रांसफर किए, जबकि शेष नकद दिए, जिसकी रसीद उनके पास है। रजिस्ट्री से दो दिन पहले उन्हें बताया गया कि संबंधित पार्टी ने प्लाट किसी अन्य व्यक्ति को दे दिया है। लोन प्रक्रिया में समय लगने को कारण बताया गया। रकम मांगने पर भी इनकार कर दिया गया।
डीएवीवी के आइएमएस की एमबीए छात्राओं अर्पिता और हिमांशी ने एमपी टास्क पोर्टल की गड़बड़ी की शिकायत की। उनका कहना है कि स्कालरशीप पेंडिंग दिखने से आगे की पढ़ाई प्रभावित हो रही है। पोर्टल पर दो वर्ष की करीब दो लाख रुपये की स्कालरशीप बाकी दिख रही है।
इलाज की चिंता लेकर पहुंचे परिवार
राजेश सिंह की पत्नी शालिनी सिंह बैस के पैरालिसिस अटैक के उपचार के लिए 30 हजार और अंकित शर्मा की पत्नी के गर्भावस्था उपचार के लिए 10 हजार रुपये की सहायता के निर्देश दिए गए।
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