इस बार सुनीता को तस्वीर के बजाय पति का साथ मिला और वह अपनी बेटी के साथ खुशहाल जीवन की उम्मीद लेकर आगरा रवाना हो गईं।
HighLights
- तस्वीर देखकर व्रत रखती थी पत्नी
- कुटुंब न्यायालय में काउंसलिंग से बनी बात
- बेटी को लेकर पति के संग आगरा रवाना
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। करवा चौथ पर पति की लंबी उम्र के लिए व्रत रखने वाली सुनीता (परिवर्तित नाम) के लिए इस बार का पर्व खास बन गया। सात साल तक पति से अलग रहने के बावजूद वह हर साल उसकी तस्वीर देखकर व्रत खोलती थीं। आखिरकार कुटुंब न्यायालय की पहल और काउंसलिंग से पति-पत्नी के बीच दूरियां खत्म हुईं। इस बार सुनीता को तस्वीर के बजाय पति का साथ मिला और वह अपनी बेटी के साथ खुशहाल जीवन की उम्मीद लेकर गुरुवार को आगरा रवाना हो गईं।
सुनीता का शादी आगरा के मदन से हुई थी 2017 में
गुना निवासी सुनीता का विवाह वर्ष 2017 में में आगरा निवासी मदन कुशवाह (परिवर्तित नाम) से हुआ था। शुरुआत में सब कुछ ठीक रहा, लेकिन बाद में पारिवारिक विवाद और ससुराल पक्ष पर दहेज प्रताड़ना के आरोपों के चलते रिश्ते में तनाव बढ़ गया। सुनीता के मुताबिक, पति भी अपने स्वजन का पक्ष लेने लगा। इसके बाद वर्ष 2021 में वह अपनी एक वर्षीय गोद ली हुई बेटी को लेकर मायके लौट आईं, जबकि उनका तीन वर्षीय बेटा पति के पास ही रह गया।
तस्वीर देखकर रखती थीं व्रत
पति से अलग रहने के बावजूद सुनीता ने रिश्ता बचाने की उम्मीद नहीं छोड़ी। हर करवा चौथ पर वह निर्जला व्रत रखतीं और रात में पति की तस्वीर देखकर उपवास खोलती थीं। मायके पक्ष ने भी समाज के लोगों की मदद से कई बार सुलह कराने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार सुनीता ने परिवार को टूटने से बचाने के लिए कुटुंब न्यायालय का दरवाजा खटखटाया।
काउंसलिंग से बदला मन
कुटुंब न्यायालय की काउंसलर बबीता दीवान और मीडिएटर हरीश दीवान ने न्यायालय के आदेश पर मामले में काउंसलिंग शुरू की। पहले आनलाइन बातचीत के जरिए पति-पत्नी के बीच संवाद कराया गया। पति को बच्चों के भविष्य और परिवार बचाने की अहमियत समझाई गई। सुनीता की भावनाओं और तस्वीर देखकर व्रत रखने की बात ने भी पति को भावुक कर दिया। इसके बाद उसने पत्नी से बातचीत कर उसे आगरा लौटने का प्रस्ताव दिया, जिसे सुनीता ने स्वीकार कर लिया।
इस बार अधूरी नहीं रही पूजा
सात साल तक पति की तस्वीर देखकर व्रत खोलने वाली सुनीता के लिए इस बार करवा चौथ नई उम्मीद लेकर आया है। कुटुंब न्यायालय की पहल से पति-पत्नी फिर साथ रहने को तैयार हुए हैं। सुनीता का आगरा लौटना उनके परिवार के लिए नई शुरुआत है।
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