×
‘बाजार तय नहीं करता साहित्य की गुणवत्ता’:  अच्छी किताबें पाठकों तक पहुंचाना भी चुनौती: वाणी साहित्य उत्सव में लेखकों ने रखे विचार – Indore News

‘बाजार तय नहीं करता साहित्य की गुणवत्ता’: अच्छी किताबें पाठकों तक पहुंचाना भी चुनौती: वाणी साहित्य उत्सव में लेखकों ने रखे विचार – Indore News


किताबों की दुनिया में बाजार की मांग, पाठकों की पसंद और लेखन की मौलिकता के बीच संतुलन बनाना बड़ी चुनौती है। कई बार लोकप्रिय और ज्यादा बिकने वाली किताबों को बाजार में आसानी से जगह मिल जाती है, जबकि अच्छी रचनाएं पाठकों तक पहुंचने से पहले ही पीछे छूट जाती हैं। साहित्य और किताबों के इसी बदलते बाजार पर वाणी साहित्य उत्सव के दूसरे दिन लेखकों और पाठकों ने अपने विचार साझा किए। रवींद्र नाट्यगृह में आयोजित तीन दिवसीय उत्सव में साहित्यकारों ने लेखन की प्रक्रिया, कहानी की मौलिकता और किताबों के फिल्मी रूपांतरण जैसे विषयों पर चर्चा की। लेखक सत्य व्यास ने कहा कि हर व्यक्ति के पास अपनी कहानी होती है, लेकिन दूसरों के अनुभवों को महसूस कर उन्हें शब्दों में उतारने वाला ही सही मायने में कहानीकार है। उन्होंने युवाओं को अपने जीवन के छोटे-बड़े अनुभव लिखते रहने की सलाह भी दी। मनुस्मृति में महिलाओं के दर्जे पर उठाए सवाल संस्कृत विद्वान राधावल्लभ त्रिपाठी ने मनुस्मृति पर अपनी असहमति जाहिर करते हुए कहा कि इसमें महिलाओं को दोयम दर्जे का माना गया है। उन्होंने कहा कि आज भी समाज में मनुस्मृति का समर्थन करने वाले लोग मौजूद हैं, लेकिन वे इसके विचारों का पुरजोर विरोध करते हैं। महिलाओं के प्रति इस तरह का दृष्टिकोण स्वीकार नहीं किया जा सकता। किताब और फिल्म की अपनी अलग भाषा साहित्य के फिल्मी रूपांतरण पर चर्चा में वक्ताओं ने बताया कि किताब और सिनेमा कहानी कहने के दो अलग माध्यम हैं। उपन्यास में किसी पात्र की मनःस्थिति और भावनाओं को कई पन्नों में विस्तार से लिखा जा सकता है, जबकि फिल्म में कलाकार के चेहरे के भाव और अभिनय से वही बात कुछ क्षणों में व्यक्त हो जाती है। वक्ताओं के मुताबिक, फिल्म में किताब की हर बारीकी शामिल करना संभव नहीं होता। हालांकि, कई बार फिल्म देखने के बाद दर्शक मूल किताब तक पहुंचते हैं और कहानी के उन पहलुओं को समझते हैं, जो पर्दे पर नहीं दिखाए जा सके। किताब हाथ में लेकर चुनने का अनुभव अलग उत्सव में शामिल पाठकों ने कहा कि ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर किताबों के हजारों विकल्प मौजूद हैं, लेकिन पुस्तक मेले में किताबों के बीच खड़े होकर अपनी पसंद चुनने का अनुभव अलग होता है। किसी किताब को हाथ में लेकर उसके पन्ने पलटना और कुछ अंश पढ़ना पाठक का उससे जुड़ाव बनाता है। पाठकों का मानना था कि ऐसी साहित्यिक गतिविधियां उन लेखकों और किताबों को भी मंच देती हैं, जिन्हें बाजार में पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती। कार्यक्रम में सतलज राहत इंदौरी, सत्य व्यास, शंभुनाथ, गरिमा श्रीवास्तव, राधावल्लभ त्रिपाठी, वाणी त्रिपाठी, मनीषा आडवाणी, उदय प्रकाश, सुनील अटोलिया और माधव कौशिक सहित कई लेखक और साहित्यकार शामिल हुए।

#बजर #तय #नह #करत #सहतय #क #गणवतत #अचछ #कतब #पठक #तक #पहचन #भ #चनत #वण #सहतय #उतसव #म #लखक #न #रख #वचर #Indore #News

Post Comment