श्योपुर पुलिस की जांच में बिहार से पकड़े गए साल्वर रंजन कुमार ने कबूल किया है कि पुलिस भर्ती परीक्षा में वह अकेला नहीं, बल्कि बिहार, दिल्ली, राजस्थान, छत्तीसगढ़ समेत कई राज्यों के साल्वर गैंग शामिल थे। पुलिस ने अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया है और जल्द ही एक दर्जन से अधिक साल्वरों की गिरफ्तारी की संभावना है।
By Himadri Hada
Edited By: Himadri Hada
Publish Date: Sun, 08 Jun 2025 03:02:45 PM (IST)
Updated Date: Sun, 08 Jun 2025 03:15:26 PM (IST)
HighLights
- मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा-2023 में फर्जीवाड़ा।
- अब तक इंटरस्टेट साल्वर गैंग के 11 लोगों को किया गिरफ्तार।
- फर्ज़ीवाड़े के तार दिल्ली, बिहार, छत्तीसगढ़, राजस्थान से जुड़े।
नीरज शर्मा, नईदुनिया, श्योपुर। मध्य प्रदेश पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा-2023 में फर्जीवाड़े का एक बड़ा नेटवर्क सामने आया है। श्योपुर पुलिस की रिमांड में पकड़े गए बिहार निवासी साल्वर रंजन कुमार ने खुलासा किया है कि इस फर्जीवाड़े में वह अकेला नहीं, बल्कि बिहार, दिल्ली, छत्तीसगढ़ और राजस्थान समेत अन्य राज्यों के कई साल्वर शामिल हैं। रंजन ने बताया कि करीब एक दर्जन साल्वर मप्र पुलिस भर्ती परीक्षा में दूसरों की जगह बैठकर परीक्षा दे रहे थे।
एमपी पुलिस भर्ती घोटाला
रंजन कुमार बिहार में ग्रेड-2 का शिक्षक है और उसकी पत्नी भी शिक्षिका है। उसने खुद कबूला कि उसने अकेले 10 अभ्यर्थियों की परीक्षा दी, जबकि अन्य साल्वरों ने भी 30 से 40 अभ्यर्थियों की परीक्षा दी थी। इनमें से कई उम्मीदवार अब एमपी पुलिस में आरक्षक के रूप में जॉइन भी कर चुके हैं। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने इन सभी की जांच शुरू कर दी है।
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फर्जी पहचान बताकर दी परीक्षा
श्योपुर एसपी वीरेंद्र जैन ने बताया कि यह इंटरस्टेट साल्वर गैंग है, जिसका नेटवर्क कई राज्यों तक फैला हुआ है। अब तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है और कई अन्य की गिरफ्तारी जल्द हो सकती है। पुलिस को यह भी जानकारी मिली है कि परीक्षा ऑनलाइन होने की वजह से साल्वर लंबे समय तक एक ही स्थान पर रुके रहे और फर्जी पहचान का उपयोग कर परीक्षा दी। पुलिस ने पैसे के लेनदेन में शामिल एक दलाल लालू रावत के खिलाफ भी केस दर्ज किया है, जो मुरैना जिले का निवासी है। वह उम्मीदवारों और साल्वरों के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा था। रंजन के साथ अन्य दो साल्वर गणेश रावत और सतेंद्र भी इस रैकेट का हिस्सा हैं। गणेश ने लगभग 10 और सतेंद्र ने 6 अभ्यर्थियों की परीक्षा दी थी।
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जांच में आए फर्जीवाड़े के मामले
जांच में यह भी सामने आया है कि इस फर्जीवाड़े का तंत्र काफी संगठित था। अभ्यर्थियों से मोटी रकम लेकर उनकी जगह साल्वर को परीक्षा में बैठाया जाता था। ऑनलाइन परीक्षा प्रणाली के बावजूद यह घोटाला होना, सिस्टम की खामियों की ओर इशारा करता है।
श्योपुर जिले को इस भर्ती में कुल 23 आरक्षक मिले हैं, जिनमें से कई के दस्तावेज और परीक्षा रिकॉर्ड अब दोबारा जांचे जा रहे हैं। एसपी वीरेंद्र जैन का कहना है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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