मध्यप्रदेश सरकार ने किसानों को दिन में बिजली देने के लिए सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना शुरू की है। इसके तहत किसान सौर ऊर्जा से बिजली पैदा कर सरकार को बेच सकेंगे। 10 जून को भोपाल में समिट होगा। योजना से सिंचाई आसान होगी, पारेषण हानि घटेगी और स्थायी आय बढ़ेगी।
By Anurag Mishra
Publish Date: Sun, 08 Jun 2025 10:05:27 PM (IST)
Updated Date: Sun, 08 Jun 2025 10:05:27 PM (IST)
HighLights
- सिंचाई फीडरों पर लगेंगे सौर संयंत्र
- पारेषण हानि घटेगी, बिजली सस्ती होगी
- सात साल तक ब्याज में तीन प्रतिशत छूट
नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। प्रदेश में किसानों को दिन के समय सस्ती और भरपूर बिजली देने के उद्देश्य से सरकार ने सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना लागू करने की तैयारी कर ली है। इस योजना के तहत किसान न केवल सौर ऊर्जा से अपने खेतों की सिंचाई कर सकेंगे, बल्कि बिजली उत्पादक बनकर सरकार को 25 साल तक बिजली बेच सकेंगे। आगामी 10 जून मंगलवार को भोपाल के कुशाभाऊ ठाकरे सभागार में इस योजना को लेकर राज्य स्तरीय समिट आयोजित किया जाएगा।
किसान बनेंगे ऊर्जा उत्पादक
नवीन एवं नवकरणीय ऊर्जा मंत्री राकेश शुक्ला ने बताया कि सूर्य मित्र कृषि फीडर योजना का उद्देश्य किसानों और छोटे निवेशकों को सौर ऊर्जा के माध्यम से बिजली उत्पादन का सीधा अवसर देना है। योजना के तहत विद्युत सब-स्टेशन की 100 प्रतिशत क्षमता तक सौर परियोजनाएं लगाई जाएंगी। सरकार इन परियोजनाओं से 25 वर्षों तक बिजली खरीदेगी, जिससे किसानों को स्थायी आय का स्रोत मिलेगा।
सौर ऊर्जा से सिंचाई फीडरों को जोड़ा जाएगा
विभाग के अपर मुख्य सचिव मनु श्रीवास्तव ने बताया कि प्रदेश में करीब 8,000 कृषि फीडर स्थापित हैं, जिनसे 35 लाख कृषि पंप जुड़े हुए हैं। इन फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने के लिए 11 केवी स्तर पर सौर संयंत्र स्थापित किए जाएंगे, जिससे दिन में भी इन पंपों को निर्बाध बिजली मिल सकेगी। इससे न केवल सिंचाई आसान होगी बल्कि विद्युत अनुदान का भार भी कम होगा।
पारेषण हानि में भी होगी कमी
फीडर के निकट सौर संयंत्र स्थापित करने से ऊर्जा सीधे खपत स्थल तक पहुंचाई जाएगी, जिससे पारेषण हानि में कमी आएगी और मध्यप्रदेश पावर मैनेजमेंट कंपनी को सस्ती दर पर बिजली उपलब्ध हो सकेगी। इससे राज्य की बिजली व्यवस्था और भी मजबूत होगी।

520 मेगावाट क्षमता पर चल रहा काम
विभागीय अधिकारियों के अनुसार अब तक 80 मेगावाट की परियोजनाएं स्थापित हो चुकी हैं, जिनसे 16,000 से अधिक कृषि पंप सौर ऊर्जा से संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 240 मेगावाट की परियोजनाओं के अनुबंध हो चुके हैं और 200 मेगावाट पर कार्य जारी है। कुल 520 मेगावाट परियोजनाओं से 1 लाख से अधिक पंपों को सौर ऊर्जा से जोड़ा जा सकेगा।
सात साल तक ब्याज में मिलेगी छूट
परियोजनाओं को स्थापित करने के लिए कृषि अधोसंरचना निधि से निवेशकों को तीन प्रतिशत ब्याज छूट के साथ सात साल तक सहायता दी जाएगी, जिससे यह योजना किसानों और निवेशकों के लिए आर्थिक रूप से भी आकर्षक बन सकेगी।
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