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Bhopal 90 Degree Bridge: अजूबे पुल पर माथापच्ची, भोपाल में रेलवे से 3 फीट अतिरिक्त जगह की उम्मीद पर टिका है बदलाव

भोपाल के ऐशबाग ओवरब्रिज के 90 डिग्री तीखे मोड़ को अब गोलाई देने की तैयारी तेज हो गई है। लोक निर्माण विभाग ने रेलवे से ढाई-तीन फीट जमीन मांगी है। रेलवे की टीम ने सर्वे किया है, लेकिन निर्णय रेलवे बोर्ड से प्रस्ताव मिलने के बाद ही होगा।

By Anurag Mishra

Publish Date: Wed, 18 Jun 2025 11:35:54 PM (IST)

Updated Date: Wed, 18 Jun 2025 11:35:54 PM (IST)

Bhopal 90 Degree Bridge: अजूबे पुल पर माथापच्ची, भोपाल में रेलवे से 3 फीट अतिरिक्त जगह की उम्मीद पर टिका है बदलाव
भोपाल के ब्रिज को ठीक करने की जुगत में लगे अधिकारी। (फाइल फोटो)

HighLights

  1. पुल के मोड़ को गोलाई देने की योजना बनी।
  2. लोनिवि ने रेलवे से अतिरिक्त जमीन मांगी है।
  3. सुरक्षा के लिए कई तकनीकी सिफारिशें की गईं।

नईदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। देशभर में मजाक का विषय बन चुके ऐशबाग रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) के 90 डिग्री तीखे मोड़ को अब गोलाई देने की तैयारी शुरू हो गई है। लोक निर्माण विभाग (लोनिवि) ने इस पुल की खामी को सुधारने के लिए रेलवे से ढाई से तीन फीट अतिरिक्त जमीन मांगी है, ताकि मोड़ को थोड़ा गोलाकार बनाया जा सके और भारी वाहनों के लिए इसे सुरक्षित किया जा सके।

रेलवे की इंजीनियरिंग टीम ने बुधवार को मौके पर पहुंचकर लोनिवि के इस मौखिक प्रस्ताव पर प्रारंभिक सर्वे किया। हालांकि बुधवार देर शाम तक रेलवे को लोनिवि की ओर से कोई औपचारिक प्रस्ताव नहीं भेजा गया था। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि जमीन देने का अंतिम निर्णय रेलवे बोर्ड से ही लिया जाएगा, लेकिन यह प्रस्ताव मंडल स्तर से भेजा जाएगा।

ढाई-तीन फीट जमीन मिली तो बदलेगी डिजाइन

लोनिवि ने सोमवार को रेलवे अधिकारियों को प्रस्तावित किया था कि यदि ढाई से तीन फीट की जमीन मिल जाती है, तो पुल पर डाले गए गर्डर की दिशा बदली जा सकती है, जिससे तीखा मोड़ कुछ हद तक गोलाई में बदल सकेगा। इससे वाहनों के मुड़ने में सुविधा होगी और दुर्घटना की संभावना घटेगी। रेलवे की टीम ने इसी संभावना को देखते हुए नापजोख कर स्थल का निरीक्षण किया।

एनएचएआई के पूर्व मुख्य अभियंता ने दीं सुरक्षा से जुड़ी सिफारिशें

  • पूर्व मुख्य अभियंता एके चिंडके, जो एनएचएआई ब्रिज सेक्शन से जुड़े रहे हैं, ने पुल पर सुरक्षित यातायात के लिए कई सिफारिशें की हैं। उनके अनुसार, भारी वाहनों को इस पुल से गुजरने से रोकने के लिए ओवरब्रिज के आरंभ में ही छह फीट ऊंचा लोहे का एंगल लगाया जाना चाहिए। इसके साथ ही हल्के वाहनों की गति सीमा 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे तक सीमित रखनी होगी।
  • मोड़ से ठीक पहले स्पीड ब्रेकर बनाए जाएं और मोड़ के सामने छह फीट ऊंची दीवार भी खड़ी की जाए ताकि चालक सतर्क हो जाएं। साथ ही, दोनों तरफ बड़े आकार के शीशे (कन्वेक्स मिरर) लगाए जाएं ताकि दूसरी ओर से आने वाला वाहन भी नजर आ सके। पर्याप्त रोशनी के लिए मोड़ पर लाइटों की संख्या बढ़ाने की जरूरत बताई गई है। साथ ही, फुटपाथ की चौड़ाई डेढ़ फीट तक कम करने का सुझाव भी दिया गया है।
  • निर्णय रेलवे बोर्ड के अनुमोदन पर निर्भर

    रेलवे अधिकारियों ने साफ किया है कि भले ही लोनिवि का प्रस्ताव तकनीकी रूप से व्यावहारिक हो, लेकिन रेलवे की जमीन देने का निर्णय केवल रेलवे बोर्ड द्वारा ही लिया जा सकता है। ऐसे में जब तक औपचारिक प्रस्ताव नहीं भेजा जाता, तब तक जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकती।

    “रेलवे से निरंतर संपर्क में हैं”

    • लोक निर्माण विभाग के अपर मुख्य सचिव नीरज मंडलोई ने कहा है, “हम रेलवे से लगातार संपर्क में हैं। जैसे ही जमीन के हस्तांतरण को लेकर सहमति बनती है, पुल की डिजाइन में सुधार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।”
    • ऐशबाग ओवरब्रिज का यह तीखा मोड़ जहां एक ओर तकनीकी चुनौती बना हुआ है, वहीं दूसरी ओर सोशल मीडिया पर उपहास का केंद्र भी बन चुका है। अब देखना होगा कि प्रस्ताव रेलवे बोर्ड तक कब पहुंचता है और उसे कब मंजूरी मिलती है।

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