मध्य प्रदेश कांग्रेस में जल्द ही बड़ा संगठनात्मक बदलाव देखने को मिलेगा। राहुल गांधी के निर्देशों के तहत राज्य में पार्टी की नई जिलाध्यक्ष टीम तैयार की जा रही है। इस बार नेतृत्व की जिम्मेदारी युवाओं को सौंपने की योजना है।
By Himadri Hada
Edited By: Himadri Hada
Publish Date: Mon, 09 Jun 2025 05:23:34 PM (IST)
Updated Date: Mon, 09 Jun 2025 05:28:34 PM (IST)
HighLights
- कांग्रेस जिलाध्यक्ष के लिए संगठन को मिलेगा युवा नेतृत्व।
- पार्टी में अब संगठन और चुनाव कार्य होंगे अलग-अलग।
- पार्टी जिलाध्यक्ष के लिए 6 नामों का पैनल करेगी तैयार।
राज्य ब्यूरो, नईदुनिया, भोपाल। मध्य प्रदेश कांग्रेस में संगठन सृजन अभियान के अंतर्गत जिलाध्यक्षों के चयन के लिए सख्त मानदंड तय किए गए हैं। पार्टी प्रत्येक जिले से जिलाध्यक्ष पद के लिए छह नामों का पैनल तैयार करेगी। इस पैनल में प्राथमिकता 45 वर्ष से कम आयु के उन कार्यकर्ताओं को दी जाएगी जिन्होंने पार्टी में कम से कम 5 वर्षों तक काम किया हो।
कांग्रेस में जिलाध्यक्षों के लिए नए नियम
पार्टी ने यह निर्देश रविवार को वर्चुअल बैठक के दौरान प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी द्वारा 165 पर्यवेक्षकों को दिए। इस बैठक में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार भी मौजूद रहे। हरीश चौधरी ने स्पष्ट किया कि यह बदलाव युवाओं को नेतृत्व में लाने की दिशा में एक ठोस प्रयास है। हालांकि, यदि किसी जिले में कोई वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता है, तो उसके नाम पर भी विचार किया जा सकता है — लेकिन कारण स्पष्ट रूप से दर्ज होना चाहिए। इसके साथ ही, जातीय संतुलन का विशेष ध्यान रखते हुए निर्देश दिए गए हैं कि पैनल में अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग या महिला उम्मीदवार में से किसी एक को जरूर शामिल किया जाए।
संगठन और चुनाव कार्य होंगे अलग-अलग
संगठनात्मक मजबूती के लिए एक और बड़ा निर्णय लिया गया है। अब पार्टी के संगठन पदाधिकारियों को चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं होगी। यदि कोई संगठन पदाधिकारी चुनाव लड़ना चाहता है, तो उसे पद से इस्तीफा देना होगा। यह निर्णय पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी की उपस्थिति में आयोजित राजनीतिक मामलों की समिति की बैठक में लिया गया।
पार्टी ने क्या कहा?
पार्टी का मानना है कि चुनाव और संगठन को अलग रखने से दोनों कार्य बेहतर तरीके से संचालित किए जा सकते हैं। हाल के चुनावों में देखा गया कि संगठन के पदाधिकारी चुनाव लड़ने में व्यस्त हो जाते हैं जिससे संगठनात्मक गतिविधियां प्रभावित होती हैं। इस निर्णय से पार्टी को चुनावी रणनीति और संगठनात्मक मजबूती दोनों में संतुलन मिलेगा।
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