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Raja Sonam Case: आखिरकार किसको बचाना चाहती है पुलिस? सोनम के पिता की थ्योरी ने खड़े किए गहरे सवाल, जानें सब

Raja Sonam Case: आखिरकार किसको बचाना चाहती है पुलिस? सोनम के पिता की थ्योरी ने खड़े किए गहरे सवाल, जानें सब

इंदौर के दंपती सोनम और राजा केस की गुत्थी लगातार उलझती जा रही है। 24 मई को दोनों के मिसिंग केस से शुरू हुआ ये घटनाक्रम राजा का शव मिलने के बाद हत्या केस में बदल गया है। वहीं सोनम की तलाश अभी भी जारी है। इस तलाश को दस दिन से ज्यादा हो गए हैं। अब तो पुलिस की जांच भी संदेह के घेरे में आने लगी है। अमर उजाला से बातचीत में सोनम के पिता देवी सिंह रघुवंशी ने पुलिस की जांच पर सवाल उठाए हैं। शिलांग पुलिस और बेटे से मिली जानकारी के आधार पर देवी सिंह ने कई गहरे सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि शिलांग पुलिस होटल वालों को बचाने की दिशा में काम कर रही है। आइए जानते हैं कौन से हैं वो सवाल….  

पहले जानते हैं कहां से शुरू हुआ मामला

इंदौर में ट्रांसपोर्ट व्यवसाय करने वाले राजा रघुवंशी की शादी 11 मई को सोनम से हुई थी। शादी के करीब 8 दिन बाद 20 मई को दोनों हनीमून पर निकले। सबसे पहले दोनों गुवाहाटी पहुंचे। वहां कामाख्या देवी के दर्शन किए। इसके बाद वहीं पर दोनों में शिलांग जाने का प्लान बनाया। ये जानकारी उन्होंने घर पर दी। इसके बाद दोनों 23 मई को मेघालय के शिलांग पहुंचे। 23 मई को दोपहर बाद से सोनम और राजा का परिवार से संपर्क टूट गया। 24 मई को दोनों के फोन बंद हो गए। कई कोशिशों के बाद भी जब बात नहीं हो पाई तो सोनम के भाई गोविंद और राजा के भाई विपिन शिलांग पहुंचे और पुलिस के साथ खोज शुरू की।

पुलिस और प्रशासन लगातार सर्च कर रहे थे, लेकिन खराब मौसम और कठिन इलाके के कारण खोज में दिक्कतें आईं। दोनों के बैग तो मिले लेकिन मोबाइल और गहने नहीं मिले। खोजी कुत्तों को कपड़े सुंघाकर तलाश भी की गई, लेकिन कोई सुराग नहीं मिला। थक हारकर परिवार ने जानकारी देने वाले को पांच लाख रुपये इनाम की घोषणा की।

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इसके बाद 2 जून को ड्रोन से खोज के दौरान राजा का शव शिलांग के डबल डेकर रूट के पास एक 150 फीट गहरी खाई में मिला। पास में एक टी-शर्ट और दवा भी पड़ी थी। शरीर पर चोट के कई निशान थे। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में साफ हुआ कि राजा की धारदार हथियार से हत्या की गई थी और फिर शव को खाई में फेंका गया था। पुलिस को हत्या में इस्तेमाल पेड़ काटने वाला औजार भी मिला। राजा के अंतिम संस्कार के बाद परिजनों ने इंसाफ की मांग करते हुए कहा कि यह हत्या है और इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए। उन्होंने घर पर एक पोस्टर भी लगाया “मैं मरा नहीं, मारा गया हूं।” अब तक सोनम का कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस ने एक लाल-काली जैकेट बरामद की है, जिसे फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है, ताकि पता चले कि वो सोनम की है या नहीं। सर्च ऑपरेशन में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और पुलिस टीम लगी हुई है, लेकिन सोनम का अब तक कोई पता नहीं है।

कमरे में रखा सामान नाले के पास कैसे मिला?

सोनम के पिता देवी सिंह रघुवंशी कह रहे हैं कि पुलिस वाले होटल वालों को बचा रहे हैं। जो भी राज़ निकलेंगे, वो होटल से ही निकलेंगे। पिता का कहना है कि सोनम और राजा के भाइयों से होटल वाले दो दिन तक कहते रहे कि सारा सामान कमरे में रखा हुआ है। जिस कमरे में जिसमें राजा और सोनम ठहरे हुए थे। फिर पुलिस ने कहा कि उनको सामान रात 11 बजे नाले के पास से मिला। अब पहला सवाल ये उठता है कि जो सामान कमरे में दो दिन तक रखा रहा, वो नाले के पास तीसरे दिन कैसे मिला? उसको कमरे से बाहर निकालकर नाले के पास कौन ले गया? दूसरा सवाल ये है कि जो पुलिस वाले शाम 6 बजे ही जांच बंद करके जंगल में जाने से मना करते रहे। वो रात 11 बजे नाले के पास क्या करने पहुंचे थे, जहां उनको सामान मिला।

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गैंग को नए हथियार की जरूरत क्या थी?

पुलिस का कहना है कि राजा की हत्या गैंग ने की। हत्या में उपयोग किया गया हथियार नया था, जिससे पेड़ काटे जाते हैं। इस पर सोनम के पिता देवी सिंह रघुवंशी ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस के अनुसार ये गैंगवार है। गैंग के पास पिस्तौल और चाकू होते हैं। गैंग के लोग नया हथियार क्यों खरीदेंगे? वे अपने पास रखे हथियारों का इस्तेमाल करेंगे। अगर मान भी लिया जाए कि नया हथियार गैंग ने खरीदा तो फिर वे उसे फेंक के क्यों चले गए? अगर गैंग है तो उसे आगे भी आपराधिक घटनाओं के लिए हथियार की जरूरत पड़ेगी, वो भला नया हथियार क्यों फेंकने लगे? ये हथियार स्थानीय व्यक्ति ने खरीदा है।

जहां राजा का शव मिला वहां तीन ट्रक कचरा कैसे आया?

सोनम के पिता का आरोप है कि बेटे गोविंद को शिलांग गए 10 दिन हो चुके हैं। छह से सात दिन तक तो पुलिस उसको मूर्ख बनाती रही। थोड़ी सी बारिश होती थी तो पुलिस वाले कह देते थे, पानी के छींटे आ रहे हैं। गाड़ी में बैठो। खाई के अंदर जहां राजा का शव मिला। वहां पर दो से तीन ट्रक कचरा कहां से आ गया? सबसे बड़ा सवाल वहां कचरा कौन डाल गया? वहां पर डंपिंग किसने की? तीन ट्रक कचरा स्पॉट पर आ जाना कोई मामूली बात नहीं है। हो सकता है कि पहले भी कचरा डाला गया हो और उसके नीचे उन लोगों के शव दबे हुए हों, जो वहां से पहले लापता हुए हैं। इन सबकी वजह से इस पूरी घटना की सीबीआई जांच होनी चाहिए। वहां की पुलिस की जांच पर भरोसा नहीं है।

तीन मोबाइल फोन कहां हैं?

पिता का कहना है कि सोनम और राजा के पास तीन मोबाइल फोन थे। वो कहां हैं? ये तीन मोबाइल फोन स्कूटी वाले के पास होने चाहिए। स्कूटी को बिना जांच के ही पुलिस ने किराए पर देने वाले को सौंप दिया। स्कूटी किराए पर देने के लिए कितने पैसे लिए? किसकी जमानत पर स्कूटी दी गई। स्कूटी देने के लिए कितनी रकम सोनम और राजा से ली। ये सब भी जानना जरूरी है। स्कूटी वाले के पास अभी कितना पैसा जमा है। ये भी पता नहीं चल पाया है। चाबी स्कूटी में लगी थी तो पुलिस वालों ने डिक्की खोलकर क्यों नहीं देखी? इन सब सवालों के जवाब नहीं मिल पाए हैं। इस वजह से हम लोग पीएम नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह से निवेदन कर रहे हैं कि पूरे मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिए।

सोनम और राजा को चारों तरफ से घेरने वाले कौन थे?

शिलांग और बेटे से मिली जानकारी के आधार पर सोनम के पिता देवी सिंह सवाल किया कि ने कहा कि स्कूटी के चारों तरफ चार गाड़ियां आकर लगी थीं। एक गाड़ी आगे थी। एक पीछे। एक बाएं और एक दाएं थी। इन गाड़ियों में कौन लोग आए थे? उन्होंने कहा कि अगर एक गाड़ी में दो लोगों के आने की बात मानी जाए तो आठ लोगों ने बच्चों को घेरा होगा। ये लोग उनको उठाकर कहां ले गए?

गाड़ी पर आने वालों के मोबाइल की जांच क्यों नहीं हुई?

जिन लोगों ने बच्चों को घेरा था। उनके पास कितने मोबाइल थे। उन लोगों ने घटना से पहले किन से बात की? बच्चों को घेरने के बाद किससे बात की? अभी मोबाइल कहां हैं? उनकी सर्चिंग क्यों नहीं की गई? उनकी मोबाइल कॉल की डिटेल क्यों नहीं शिलांग पुलिस ने निकाली।

गाड़ियों के नंबर की जांच क्यों नहीं हुई?

बच्चों को घेरने वाले लोग जिस गाड़ी से आए थे। वो किसके नाम पर थीं। इन गाड़ियों की जांच क्यों नहीं की गई? वहां की पुलिस सबको बचाने की दिशा में  क्यों काम कर रही है?

पुलिस पर राजा के भाई ने भी उठाए सवाल, मेघालय सरकार से मांगा सहयोग

राजा का शव मिलने के बाद सोनम की तलाश में जुटे राजा रघुवंशी के भाई विपुल रघुवंशी ने भी पुलिस जांच और कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं। वे पुलिस की जांच से संतुष्ट नहीं हैं। इसके लिए उन्होंने मेघालय सरकार से सहयोग की मांग की है। उनका कहना है कि, “मध्य प्रदेश में मुझे भाजपा और कांग्रेस दोनों से अच्छा समर्थन मिल रहा है। हम चाहते हैं कि मेघालय सरकार इस मामले में थोड़ा बेहतर सहयोग करे। वहां पुलिस प्रशासन ठीक से काम नहीं कर रहा है। वे घटनास्थल के 50 फीट के दायरे में ही तलाशी ले रहे हैं, जो सीसीटीवी फुटेज (राजा और सोनम के अंतिम ज्ञात ठिकाने की) प्रसारित हो रही है, वह संदिग्ध लग रही है।”

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