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ब्लैकमेलिंग कांड में पुराने कांड की एंट्री:  श्वेता जैन का रेशू से कनेक्शन आया सामने; नेताओं-अफसरों के वीडियो की जांच – Indore News

ब्लैकमेलिंग कांड में पुराने कांड की एंट्री: श्वेता जैन का रेशू से कनेक्शन आया सामने; नेताओं-अफसरों के वीडियो की जांच – Indore News


मध्य प्रदेश में सात साल पहले सामने आए चर्चित हनी ट्रैप कांड की परछाई एक बार फिर सत्ता और प्रशासन के गलियारों तक पहुंचती नजर आ रही है। इंदौर से जुड़े ब्लैकमेलिंग कांड की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे पुराने हनी ट्रैप प्रकरण से जुड़े नाम भी सामने आ रहे हैं। जांच में श्वेता विजय जैन और रेशू चौधरी के बीच संपर्क की कड़ी सामने आने का दावा किया जा रहा है। दरअसल इस मामले में पुलिस ने 14 अगस्त को कोर्ट में चालान पेश किया है। इसमें अब तक की जो जांच की गई है उससे जुड़े तथ्य और मामले से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां हैं। मामला शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर से कथित ब्लैकमेलिंग और आपत्तिजनक फोटो-वीडियो वायरल करने की धमकी से जुड़ा है। पुलिस जांच में रेशू चौधरी को इस नेटवर्क की प्रमुख कड़ी माना जा रहा है। मामले में रेशू सहित कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है और उनसे पूछताछ जारी है। पहले हनी ट्रैप से जुड़े नाम की फिर एंट्री जांच की सबसे अहम कड़ी यह है कि ब्लैकमेलिंड कांड जांच के दौरान पहले चर्चित हनी ट्रैप मामले की आरोपी श्वेता विजय जैन का नाम भी सामने आया। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, जांच एजेंसियां रेशू और श्वेता के बीच संपर्क तथा पूरे नेटवर्क में उनकी भूमिका को खंगाल रही हैं। पुलिस की जांच का फोकस अब यह पता लगाने पर है कि कथित नेटवर्क में कौन-कौन लोग जुड़े थे, किस तरह रसूखदार लोगों से संपर्क बनाया जाता था और फोटो-वीडियो का इस्तेमाल किस तरह दबाव बनाने के लिए किया जाता था। नेताओं और अफसरों से जुड़े वीडियो की भी जांच मामले ने राजनीतिक हलकों में इसलिए भी हलचल पैदा की है क्योंकि जांच के दौरान कई रसूखदार लोगों से जुड़े फोटो और वीडियो होने की बात सामने आई है। हालांकि, इन वीडियो की वास्तविकता, उनमें मौजूद लोगों की पहचान और उनका किसी अपराध से संबंध है या नहीं, यह जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगा। पुलिस डिजिटल डिवाइस और अन्य साक्ष्यों की पड़ताल कर रही है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि मोबाइल फोन, लैपटॉप और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों से नेटवर्क की गतिविधियों और संपर्कों से जुड़े महत्वपूर्ण सुराग मिल सकते हैं। एक करोड़ की मांग से शुरू हुआ मामला ब्लैकमेलिंग का मामला 18 मई को शराब कारोबारी हितेंद्र सिंह चौहान उर्फ चिंटू ठाकुर की शिकायत के बाद सामने आया था। आरोप है कि उनकी आपत्तिजनक फोटो-वीडियो सार्वजनिक नहीं करने के बदले एक करोड़ रुपए की मांग की गई थी। पुलिस जांच आगे बढ़ने पर अलका दीक्षित, उसके बेटे जयदीप, लाखन चौधरी, हेड कांस्टेबल विनोद शर्मा, जितेंद्र पुरोहित समेत अन्य नाम सामने आए। बाद में रेशू चौधरी और श्वेता जैन की कथित भूमिका भी जांच के दायरे में आई। राजनीतिक कनेक्शन ने बढ़ाई हलचल रेशू चौधरी के राजनीतिक संपर्कों को लेकर भी चर्चा तेज है। रिपोर्टों के मुताबिक वह पहले भाजपा से जुड़ी रही हैं और वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव में टिकट की दावेदारी भी कर चुकी थीं। हालांकि, किसी राजनीतिक दल से जुड़ाव अपने आप में अपराध में लिप्तता का प्रमाण नहीं है। मामले में उनकी भूमिका का निर्धारण जांच और न्यायिक प्रक्रिया में सामने आने वाले साक्ष्यों से ही होगा। फिलहाल पुलिस की जांच का दायरा आरोपों और ब्लैकमेलिंग नेटवर्क से जुड़े लोगों तक बढ़ रहा है। आने वाले दिनों में डिजिटल साक्ष्यों की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि नेटवर्क कितना बड़ा था और इसमें किन-किन लोगों की भूमिका रही।

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