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अब सस्ती होंगी कई जरूरी दवाएं: सरकार ने 39 दवाओं के दाम तय किए,  ज्यादा वसूली पर क्या कार्रवाई  होगी?

अब सस्ती होंगी कई जरूरी दवाएं: सरकार ने 39 दवाओं के दाम तय किए, ज्यादा वसूली पर क्या कार्रवाई होगी?

राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने औषधि (मूल्य नियंत्रण) आदेश (डीपीसीओ), 2013 के तहत 39 नई दवा फॉर्मूलेशन के खुदरा मूल्य निर्धारित किए हैं।

इसका उद्देश्य क्या है?


इन फॉर्मूलेशन में दवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला शामिल है, जिनमें उच्च रक्तचाप, मधुमेह, एचआईवी, हृदय रोग और आंखों के संक्रमण के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवाएं शामिल हैं, जिनका उद्देश्य उन्हें रोगियों के लिए अधिक किफायती बनाना है। यह अधिसूचना 8 जुलाई को जारी की गई थी। यह डीपीसीओ, 2013 के तहत नई दवा निर्माणों के लिए खुदरा मूल्य निर्धारण आदेश है, न कि मूल्य कटौती आदेश।


  •  एमलोडिपाइन + बिसोप्रोलोल + टेल्मिसार्टन टैबलेट की कीमत 14.74 रुपये प्रति टैबलेट तय की गई है।

  •  आई ड्रॉप, नेपाफेनाक + मोक्सीफ्लोक्सासिन ऑप्थेल्मिक सॉल्यूशन का खुदरा मूल्य 68.64 रुपये प्रति मिलीलीटर तय किया गया है।

  •  क्लोपिडोग्रेल + एस्पिरिन + एटोरवास्टेटिन कैप्सूल, की कीमत 6.37 रुपये प्रति कैप्सूल रखी गई है।






एनपीपीए ने यह भी दोहराया कि खुदरा विक्रेताओं और डीलरों को निर्माताओं द्वारा प्रदान की गई मूल्य सूचियों को प्रमुखता से प्रदर्शित करना आवश्यक है। डीपीसीओ, 2013 का हवाला देते हुए प्राधिकरण ने कहा, ‘डीपीसीओ, 2013 के पैरा 24(4) के अनुसार, प्रत्येक खुदरा विक्रेता और डीलर निर्माता द्वारा प्रदान की गई मूल्य सूची और पूरक मूल्य सूची,  अगर कोई हो उसको अपने व्यवसाय स्थल के एक प्रमुख हिस्से पर इस प्रकार प्रदर्शित करेगा कि इसे देखने के इच्छुक किसी भी व्यक्ति के लिए यह आसानी से सुलभ हो।’

नियम ना पालन करने में क्या होगा? 


अधिसूचना में आगे कहा गया है कि अगर कोई निर्माता या विपणन कंपनी अधिसूचित खुदरा कीमतों का पालन करने में विफल रहती है, तो वह अधिक वसूल की गई राशि को लागू ब्याज सहित जमा करने के लिए उत्तरदायी होगी।

अधिसूचना में कहा गया है, ‘अगर उपर्युक्त किसी भी उत्पाद का खुदरा मूल्य, इस मूल्य अधिसूचना और ऊपर निर्दिष्ट निर्देशों के अनुसार निर्धारित नहीं किया जाता है, तो संबंधित निर्माता/विपणन कंपनी, आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 के साथ पढ़े गए डीपीसीओ, 2013 के प्रावधानों के तहत, अधिक वसूल की गई राशि और उस पर लगने वाले ब्याज को जमा करने के लिए उत्तरदायी होगी।’ 

 

 

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