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आज का शब्द: उष्ण और नागार्जुन की कविता- तन गई रीढ़

आज का शब्द: उष्ण और नागार्जुन की कविता- तन गई रीढ़

                
                                                         
                            'हिंदी हैं हम' शब्द शृंखला में आज का शब्द है- उष्ण, जिसका अर्थ है- तासीर में गर्म, फुरतीला, तेज। प्रस्तुत है नागार्जुन की कविता- तन गई रीढ़
                                                                 
                            

झुकी पीठ को मिला
किसी हथेली का स्पर्श
तन गई रीढ़

महसूस हुई कन्धों को
पीछे से,
किसी नाक की सहज उष्ण निराकुल साँसें
तन गई रीढ़

कौंधी कहीं चितवन
रंग गए कहीं किसी के होठ
निगाहों के ज़रिये जादू घुसा अन्दर
तन गई रीढ़

गूँजी कहीं खिलखिलाहट
टूक-टूक होकर छितराया सन्नाटा
भर गए कर्णकुहर
तन गई रीढ़

आगे से आया
अलकों के तैलाक्त परिमल का झोंका
रग-रग में दौड़ गई बिजली
तन गई रीढ़

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28 मिनट पहले

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