प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवाय (MY) में ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू, ब्लड बैंक, डायलिसिस सहित सभी ‘जीवनरक्षक सेवाओं’ की बैकअप व्यवस्था 20 साल पुरा…और पढ़ें
HighLights
- पिछले दिनों टूट गया था जनरेटर का फैन ब्लेड
- सुधरने में लगे थे दो दिन, किराए का मंगाना पड़ा था
- 3.80 करोड़ का मेंटेनेंस भुगतान 1 साल से लंबित
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। प्रदेश के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल एमवाय (MY) में ऑपरेशन थियेटर, आईसीयू, ब्लड बैंक, डायलिसिस सहित सभी ‘जीवनरक्षक सेवाओं’ की बैकअप व्यवस्था 20 साल पुराने जनरेटर (250-250 केवीए डीजी सेट) के भरोसे है। अस्पताल प्रबंधन ने बढ़ते लोड को देखते हुए दो साल पहले दो नए 500-500 केवीए डीजी सेट की खरीदी का प्रस्ताव भोपाल भेजा था।
पिछले एक साल में छह रिमाइंडर भेजे जा चुके हैं, लेकिन अब तक मंजूरी नहीं मिली है। इसी बीच पिछले दिनों एक डीजी सेट का फैन ब्लेड टूट गया था। स्पेयर पार्ट उपलब्ध नहीं होने से सुधरने में दो दिन लगे, ऐसे में किराए का जनरेटर लगाकर व्यवस्थाएं संभालना पड़ा।
सवाल यह है कि अगर किसी दिन बिजली गुल हुई और पुराना जनरेटर भी नहीं चला तो अस्पताल में भर्ती गंभीर मरीजों का क्या होगा। अस्पताल में वर्तमान में हर समय 25 से अधिक मरीज वेंटिलेटर पर रहते हैं। बिजली आपूर्ति बाधित होने पर 15 से 20 सेकंड में यही डीजी सेट बैकअप सप्लाई शुरू करते हैं। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि मॉड्यूलर ओटी शुरू होने के बाद बिजली का लोड और बढ़ेगा, इसलिए नए डीजी सेट की जरूरत और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
फैक्ट फाइल
- 2004 से चल रहे दो 250-250 केवीए डीजी सेट
- दो नए 500-500 केवीए डीजी सेट का प्रस्ताव दो साल से लंबित
- पिछले एक साल में छह रिमाइंडर
- 12 जुलाई को डीजी सेट में खराबी
- दो दिन किराए के डीजी सेट से चली व्यवस्था
- बिजली जाने पर 15-20 सेकंड में बैकअप सप्लाई
- 25 से अधिक मरीज वेंटिलेटर पर रहते हैं
- विद्युत मेंटेनेंस के 3.80 करोड़ रुपए का भुगतान लंबित
4 अगस्त को होने वाली बैठक में लिया जा सकता है निर्णय
12 जुलाई को डीजी सेट का फैन ब्लेड टूट गया था। कंपनी के इंजीनियर ने जांच के बाद बताया कि आवश्यक पार्ट उपलब्ध नहीं है। पार्ट आने में दो दिन लगे। इस दौरान प्रतिदिन 15 से 20 हजार रुपए खर्च कर किराए का डीजी सेट लगाया गया, ताकि अस्पताल की जरूरी सेवाओं की बिजली आपूर्ति बाधित न हो। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार दो नए 500-500 केवीए डीजी सेट की जरूरत का प्रस्ताव दो साल पहले भेजा था। अब 4 अगस्त को होने वाली कार्यकारिणी (ईसी) की बैठक में प्रस्ताव पर निर्णय की उम्मीद है, जहां यह तय होगा कि खरीदी सरकारी मद से होगी या स्वायत्त निधि से।
मेंटेनेंस भी हो रहा प्रभावित
पड़ताल में यह भी सामने आया कि एमजीएम मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पतालों में बिजली मेंटेनेंस कार्यों के करीब 3.80 करोड़ रुपए का भुगतान पिछले एक साल से लंबित है। इसके कारण ट्रांसफॉर्मर, ब्रेकर, एसटी-एलटी पैनल और लिफ्ट के नियमित मेंटेनेंस पर असर पड़ा है। गुरुवार को एमवायएच की चार लिफ्ट बंद हो गई थीं, जिन्हें शुक्रवार शाम तक चालू कराया गया।
स्थिति से अवगत करा दिया है
नए डीजी सेट से संबंधित निर्णय डीन स्तर पर होगा। 12 जुलाई को खराबी आने पर तत्काल किराए का जनरेटर लगाकर सभी आवश्यक सेवाएं सुचारू रखी गई थीं। वहीं एमजीएम मेडिकल कॉलेज प्रबंधन ने बताया कि डीजी सेट की स्थिति, लंबित भुगतान और नए जनरेटर की आवश्यकता से भोपाल स्थित उच्च अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। -डॉ. अशोक यादव, अधीक्षक
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