अब इसके अलाइनमेंट (स्थान) को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और ग्रामीणों के बीच गतिरोध पैदा हो गया है। सोमवार को बड़ी संख्या में ग…और पढ़ें
HighLights
- हाईवे पर निर्माणाधीन टनल (सुरंग) के कारण यह गांव दो हिस्सों में बंट गया है
- अलाइनमेंट (स्थान) को लेकर एनएचएआई और ग्रामीणों के बीच गतिरोध पैदा हो गया है
- सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मेघा इंजीनियरिंग के साइट ऑफिस पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर-खंडवा रोड पर तेजाजी नगर से बलवाड़ा के बीच बन रहे 1100 करोड़ रुपये के फोरलेन हाईवे पर सिमरोल के पास स्थित तलाई नाका गांव में एक नया विवाद खड़ा हो गया है। हाईवे पर निर्माणाधीन टनल (सुरंग) के कारण यह गांव दो हिस्सों में बंट गया है।
इन दोनों हिस्सों को जोड़ने के लिए टनल के ऊपर एक कनेक्टिंग ब्रिज की मांग ग्रामीण पिछले डेढ़ साल से कर रहे थे, लेकिन अब इसके अलाइनमेंट (स्थान) को लेकर भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) और ग्रामीणों के बीच गतिरोध पैदा हो गया है। सोमवार को बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने मेघा इंजीनियरिंग के साइट ऑफिस पहुंचकर अपना विरोध दर्ज कराया।
ग्रामीणों का आरोप: दो किलोमीटर घूमकर आना पड़ेगा, निजी कॉलोनाइजर को फायदा
गांव के सरपंच लेखराज डाबी सहित अन्य ग्रामीणों का आरोप है कि एनएचएआई और ठेकेदार कंपनी द्वारा यह ब्रिज आईआईटी इंदौर के दूसरे गेट के पास (यानी गांव से करीब 500 मीटर दूर) प्रस्तावित किया गया है। ग्रामीणों का दावा है कि इस अलाइनमेंट से एक निजी कॉलोनाइजर को सीधा फायदा पहुंचेगा। वहीं दूसरी ओर, इस फैसले के कारण करीब 5000 ग्रामीणों को लगभग 2 किलोमीटर का चक्कर लगाना पड़ेगा। इसके अलावा टनल के समानांतर सर्विस रोड बनाने के लिए अलग से जमीन का अधिग्रहण भी करना होगा।
गांव के पास बनाने से टूटेंगे मकान और स्कूल, बनेगा ‘ब्लैक स्पॉट’
दूसरी तरफ, एनएचएआई ने कॉलोनाइजर को लाभ पहुंचाने के आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। अधिकारियों का कहना है कि यदि ग्रामीणों की मांग के अनुसार गांव के बिल्कुल नजदीक ब्रिज बनाया जाता है, तो कई मकानों और एक स्कूल को तोड़ना पड़ेगा। इसके अलावा गांव के पास ही ब्लास्टिंग से 15 मीटर गहरी खुदाई करनी होगी, जिससे गांव के घरों को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।
तकनीकी कारणों का हवाला देते हुए एनएचएआई ने बताया कि वर्तमान प्रस्तावित स्थान पर सिर्फ 3 पियर (खंभे) बनाने होंगे। इसके विपरीत, अगर गांव के पास ब्रिज बनता है तो महू-सिमरोल सर्विस रोड की चौड़ाई के कारण 5 पियर बनाने पड़ेंगे। ढलान वाली सर्विस रोड के बीच में खंभे आने से नीचे टनल में आने-जाने वाले वाहनों के लिए यह स्थान ‘ब्लैक स्पॉट’ (दुर्घटना संभावित क्षेत्र) बन सकता है।
लिखित में देना होगा निर्णय
हमने ग्रामीणों को दोनों स्थानों के तकनीकी गुण-दोष अच्छी तरह समझा दिए हैं और आखिरी फैसला उन्हीं पर छोड़ दिया है। यदि तलाई नाका के लोग अपने गांव के नजदीक 12 मीटर की ब्लास्टिंग झेलने और मकानों-स्कूल को तोड़ने के लिए तैयार हैं, तो वे हमें इसका लिखित निर्णय दें, हम वहीं ब्रिज बना देंगे। –प्रवीण यादव, एनएचएआई के प्रोजेक्ट डायरेक्टर
परियोजना पर एक नजर:
- प्रोजेक्ट व लागत: इंदौर-इच्छापुर हाईवे (तेजाजी नगर-बलवाड़ा खंड), ₹1100 करोड़।
- डेडलाइन: मूल डेडलाइन जनवरी 2025 थी, जो बीत चुकी है। अब इसे दिसंबर 2026 तक का एक्सटेंशन मिला है।
इंदौर-खंडवा-एदलाबाद राजमार्ग पर सिमरोल में फ्लाईओवर का काम सितंबर तक होगा पूरा, फिलहाल सर्विस रोड के भर रहे गड्ढे
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