मुकेश मंगल, नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर शहर में अपराध का एक ऐसा चेहरा सामने आ रहा है, जो चिंता बढ़ाने वाला है। इस साल अब तक कमिश्नरेट क्षेत्र में 62 से ज्यादा हत्या की वारदातें सामने आ चुकी हैं। इन घटनाओं की पड़ताल करें तो एक बात बार-बार सामने आती है- कातिल कोई बाहर का नहीं, बल्कि घर-परिवार या करीबी रिश्तों में शामिल व्यक्ति ही है।
हत्या की हालिया घटनाएं इस तस्वीर को और भयावह बनाती हैं। एक मामले में पोती पर 75 वर्षीय दादा की क्रिकेट बैट से हत्या करने का आरोप है। पुलिस पूछताछ में युवती ने दादा पर लंबे समय से अश्लील हरकतें करने का आरोप लगाया है। युवती का कहना है कि बदनामी और परिवार की सामाजिक प्रतिष्ठा के डर से वह अब तक चुप थी।
विवाद बढ़ा तो उसने दादा पर हमला कर दिया। पुलिस पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है। इसके ठीक एक दिन बाद पत्नी द्वारा पति की हत्या का मामला सामने आया। यानी एक के बाद एक घटनाओं में अपराधी और मृतक के बीच रिश्ता खून का या वैवाहिक रहा।
एक-दूसरे को जानते थे
हत्या की इन घटनाओं का विश्लेषण करने पर पुलिस अधिकारियों के अनुसार बड़ी संख्या में मामलों में मृतक और आरोपित एक-दूसरे को पहले से जानते थे। कई मामलों में पति-पत्नी, भाई-भाई, पिता-पुत्र, अन्य स्वजन या परिचितों के बीच विवाद हिंसा में बदला और फिर जानलेवा हमला हो गया।
यानी हत्या के लिए बदमाशों का घर में घुसना जरूरी नहीं रहा। घर के भीतर पनपा विवाद ही कई बार खून तक पहुंच रहा है। छोटी-सी कहासुनी, पुरानी रंजिश, घरेलू कलह, संपत्ति विवाद, प्रेम संबंध, नशा या लंबे समय से चली आ रही प्रताड़ना- इनमें से किसी एक वजह ने कई मामलों में हिंसा का रूप लिया।
कई मामलों में पहले से चल रहा था विवाद
जिन मामलों में स्वजन ही हमलावर बने, उनमें कई जगह पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि मृतक और आरोपित के बीच विवाद नया नहीं था। परिवार के लोग एक-दूसरे के व्यवहार, गुस्से या तनाव से परिचित थे, लेकिन समय रहते विवाद को गंभीरता से नहीं लिया गया।
‘अपने’ ही बन रहे हत्या के आरोपी
कमिश्नरेट के हत्या के मामलों में सामने आए घटनाक्रमों को एक साथ रखने पर तस्वीर और स्पष्ट होती है। कहीं पति-पत्नी का विवाद जानलेवा बना, कहीं भाई या अन्य स्वजन आमने-सामने आ गए, तो कहीं लंबे समय से चली आ रही दुश्मनी ने परिवार के भीतर ही खून करा दिया। ऐसे मामलों में पुलिस को अपराधी तक पहुंचने के लिए लंबी तलाश नहीं करनी पड़ती, लेकिन हत्या की वजह और उसके पीछे के रिश्तों की परतें खोलना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है।
इस साल अब तक 62 से ज्यादा हत्या की घटनाएं यह बताने के लिए काफी हैं कि इंदौर में हत्या का खतरा सिर्फ सड़क, बाजार या आपराधिक गिरोहों से नहीं है। कई मामलों में खतरा उसी दायरे में मौजूद था, जिसे परिवार और अपना समझा जाता है।
केस-1 : राऊ थाना अंतर्गत कैट रोड पर नवीन पाटीदार की गोली मारकर हत्या की गई थी। पुलिस ने मामले में ठेका लेकर हत्या करने वाले बदमाशों को गिरफ्तार किया तो पता चला साजिश में नवीन की पत्नी ही शामिल थी। उसने प्रेमी के साथ मिलकर नवीन की हत्या करवाई थी।
केस-2 : हीरा नगर थाना क्षेत्र में रहने वाली ज्योति अग्रवाल की उसके भाई प्रकाश ने ही गला दबाकर हत्या कर दी। ज्योति प्रेम विवाह करना चाहती थी। हत्या में उसकी मां शीतल भी शामिल निकली।
केस-3 : खजराना थाना क्षेत्र में जुलाई माह में एक बैंककर्मी की उसके प्रेमी मोहित ने गला दबाकर हत्या कर दी। उसने दुर्घटना बताने के लिए युवती के शव को पेट्रोल डालकर जला दिया।
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