देशभर में बिना बीमा सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद इंदौर का ट्रैफिक रिकार्ड भी चिंता बढ़ाने वाला है। कोर्ट ने कहा ह…और पढ़ें
HighLights
- 56 प्रतिशत वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं, कुल 39,600 चालान हुए
- सुरक्षा के लिहाज से प्रत्येक वाहन चालक को मोटर वाहन अधिनियम के तहत बीमा करना अनिवार्य है
- दुर्घटना होनी की स्थिति वाहन चालक को बीमा कंपनी की तरफ से क्षतिपूर्ति मिलना वाहन चालक का अधिकार है
प्रणय चौहान, नईदुनिया, इंदौर : देशभर में बिना बीमा सड़कों पर दौड़ रहे वाहनों पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद इंदौर का ट्रैफिक रिकॉर्ड भी चिंता बढ़ाने वाला है।
कोर्ट ने कहा है कि बिना वैध थर्ड पार्टी बीमा वाले वाहनों की पहचान कैमरों के माध्यम से कर उनके चालान किए जाएं। साथ ही केंद्र सरकार से नो इंश्योरेंस-नो फ्यूल जैसे पायलट प्रोजेक्ट पर भी विचार करने को कहा है। कोर्ट के समक्ष यह तथ्य रखा गया कि देश में 56 प्रतिशत वाहन बिना वैध बीमा के चल रहे हैं।
सुरक्षा के लिहाज से प्रत्येक वाहन चालक को मोटर वाहन अधिनियम के तहत बीमा करना अनिवार्य है। दुर्घटना होनी की स्थिति वाहन चालक को बीमा कंपनी की तरफ से क्षतिपूर्ति मिलना वाहन चालक का अधिकार है।
ट्रैफिक पुलिस के जुलाई 2026 के आंकड़े बताते हैं कि एक महीने में 3,079 वाहन बिना बीमा के पकड़े गए। यानी औसतन हर दिन जांच के दौरान करीब 99 वाहन ऐसे मिले, जिनके पास वैध बीमा नहीं पाया गया। इसी अवधि में ट्रैफिक पुलिस ने कुल 39,600 चालान बनाएं और 82.31 लाख शमन शुल्क वसूला है।
मोटर वाहन अधिनियम के तहत थर्ड पार्टी बीमा अनिवार्य है। इसके बिना वाहन चलाना कानून का उल्लंघन है। दुर्घटना की स्थिति में ऐसे वाहन न केवल चालक के लिए कानूनी मुश्किलें खड़ी करते हैं, बल्कि पीड़ित को मुआवजा मिलने की प्रक्रिया भी प्रभावित हो सकती है। इसी कारण सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों से बीमा नियमों का कड़ाई से पालन कराने और तकनीक आधारित निगरानी बढ़ाने पर जोर दिया है।
इंदौर में बिना बीमा के चालानों की संख्या यह संकेत देती है कि बड़ी संख्या में वाहन मालिक समय पर बीमा का नवीनीकरण नहीं करा रहे हैं। यदि सुप्रीम कोर्ट के सुझावों के अनुरूप कैमरा आधारित ई-चालान और अन्य सख्त व्यवस्थाएं लागू होती हैं, तो ऐसे वाहन मालिकों पर कार्रवाई और तेज हो सकती है।
बीमा करना अनिवार्य
ट्रैफिक एडिशनल डीसीपी संतोष कुमार काैल के अनुसार सुरक्षा के लिहाज से प्रत्येक वाहन चालक को मोटर वाहन अधिनियम के तहत बीमा करना अनिवार्य है। दुर्घटना होनी की स्थिति वाहन चालक को बीमा कंपनी की तरफ से क्षतिपूर्ति मिलना वाहन चालक का अधिकार है। वहीं, जांच के दौरान वैध बीमा न होने पर चालानी कार्रवाई की जाती है। जांच के दौरान बड़ी संख्या में वाहन चालकों के पास बीमा नहीं होता है। चालानी शुल्क जमा नहीं करने पर वाहन जब्ती की कार्रवाई भी की जाती है।
- 3,079 : जुलाई में बिना बीमा के पकड़े गए वाहन
- 39,600 : कुल ट्रैफिक चालान
- 82.31 लाख : कुल शमन शुल्क वसूला गया
- 99 प्रतिदिन : औसतन बिना बीमा पकड़े गए वाहन
- 56 प्रतिशत : देश में बिना बीमा चल रहे वाहनों का अनुपात (सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तुत आंकड़ा)
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
- बिना बीमा वाहनों की पहचान कैमरों से कर ई-चालान जारी किए जाएं।
- नो इंश्योरेंस-नो फ्यूल पायलट परियोजना तैयार करने पर विचार हो।
- बीमा नियमों के पालन के लिए तकनीक आधारित निगरानी बढ़ाई जाए।
- थर्ड पार्टी बीमा सड़क सुरक्षा और दुर्घटना पीड़ितों के मुआवजे के लिए अनिवार्य है।
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