नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। खानपान की आदतों में बदलाव के कारण अब बच्चों में दांतों से जुड़ी समस्याएं तेजी से बढ़ने लगी हैं। शासकीय दंत चिकित्सा महाविद्यालय के शिशु एवं बाल दंत रोग विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2025-26 में 16 हजार से अधिक बच्चे इलाज करवाने के लिए पहुंचे हैं, जिन्हें फिलिंग और रूट कैनाल का इलाज करना पड़ा। चिंताजनक है कि इनमें से करीब 75 फीसदी बच्चों के दांतों में सड़न यानी कैविटी पाई गई।
इन चीजों के सेवन से पहुंच रहा नुकसान
विशेषज्ञों के मुताबिक बच्चों में बढ़ती समस्या केवल मीठा खाने तक सीमित नहीं है। मैदा से बनी चीजें, पैकेज्ड स्नैक्स, चॉकलेट और ठंडे पेय पदार्थों का अधिक सेवन दांतों को तेजी से नुकसान पहुंचा रहा है। इसके साथ ही नियमित रूप से ब्रश न करना और समय-समय पर दांतों की जांच नहीं करवाना स्थिति को और गंभीर बना रहा है।
देरी से अस्पताल पहुंचने पर बढ़ती है जटिलता
अस्पताल में इलाज करवाने के लिए अधिकांश बच्चे तब पहुंच रहे हैं, जब दांतों की समस्या काफी बढ़ चुकी होती है। शुरुआती अवस्था में इलाज नहीं होने से छोटी कैविटी गहरी होकर नसों तक पहुंच जाती है और फिर रूट कैनाल जैसी जटिल प्रक्रिया करनी पड़ती है। इसमें कई मामलों में दांत बचाना भी संभव नहीं रह जाता।
इंदौर के साथ ही यहां खंडवा, खरगोन, बड़वानी, झाबुआ और देवास सहित आसपास के कई जिलों से भी बच्चे इलाज के लिए आते हैं।
फिलिंग और रूट कैनाल के सबसे ज्यादा मामले
अस्पताल में इलाज के लिए पहुंचने वालों में सबसे अधिक 4500 बच्चों के दांतों में फिलिंग की गई। वहीं 3500 बच्चों का रूट कैनाल उपचार किया गया। बच्चों में कैविटी कितनी तेजी से बढ़ रही है। यदि शुरुआती स्तर पर जांच हो जाए तो इनमें से अधिकांश मामलों में साधारण उपचार से ही दांत बचाए जा सकते हैं।
वहीं आंकड़ों में यह भी सामने आया कि करीब 2800 बच्चों के दांत निकालने पड़े, क्योंकि ये इलाज करवाने के लिए देरी से पहुंचे थे। इसके अलावा 1200 बच्चों के दांतों की सफाई की गई, 900 बच्चों को स्टेनलेस स्टील क्राउन लगाए गए।
इलाज के लिए पहुंचे मरीजों की संख्या (आंकड़े)
| दांतों का इलाज | संख्या |
| फिलिंग | 4500 |
| रूट कैनाल | 3500 |
| दांत निकालना | 2800 |
| दांतों की सफाई | 1200 |
| स्टेनलेस स्टील क्राउन | 900 |
| पल्प थेरेपी | 700 |
| फ्लोराइड प्रिवेंटिव केयर | 400 |
वर्ष 2025 में हर माह इतने बच्चे पहुंचे उपचार के लिए
| माह | महिला | पुरुष | कुल मरीज |
| जनवरी | 734 | 671 | 1405 |
| फरवरी | 567 | 469 | 1358 |
| मार्च | 581 | 455 | 1036 |
| अप्रैल | 677 | 602 | 1279 |
| मई | 865 | 764 | 1629 |
| जून | 896 | 713 | 1609 |
| जुलाई | 807 | 752 | 1559 |
| अगस्त | 598 | 602 | 1200 |
| सितंबर | 679 | 651 | 1330 |
| अक्टूबर | 505 | 680 | 1185 |
| नवंबर | 669 | 615 | 1284 |
| दिसंबर | 795 | 864 | 1659 |
मेडिसिनल सिरप भी कैविटी की बड़ी वजह
खानपान की आदतों में बदलाव के कारण बच्चों में दांतों की समस्या तेजी से बढ़ने लगी है। मेडिसिनल सिरप भी बच्चों के दांतों में कैविटी करने के विशेष कारक होते हैं। बचपन में अगर इन्हें दिया गया हो तो यह कैविटी कर सकते हैं। सिरप पीने के बाद कुल्ला करना चाहिए।
बच्चों को दो बार ब्रश करने की आदत डालें। मीठा या एसिडिक ड्रिंक के सेवन के बाद कुल्ला अवश्य करें। मैदा या उससे बने पदार्थ खाने से ये दांतों में चिपकते हैं जो सड़न का कारण बनते हैं। समय रहते बच्चों के दांतों की जांच जरूरी है। – डॉ. विशाल खंडेलवाल, प्रभारी, शिशु एवं बाल दंत रोग विभाग
स्टिकी फूड और जूस के सेवन से बचें
बच्चों में स्टिकी फूड खाने का चलन काफी बढ़ गया है। चॉकलेट, बिस्किट, चिप्स स्टिकी होते हैं। पहले फलों का सेवन किया जाता था, लेकिन अब रस का सेवन किया जाता है। माता-पिता को ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे को वह जो खिला रहे हैं, वह दांतों की सेहत के लिए अच्छा है या नहीं। स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम करने की आवश्यकता है। – डॉ. प्रीति द्विवेदी पाठक, दंत रोग विशेषज्ञ
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