उमरिया जिले के देवरा गांव में सड़क न होने के कारण एक गर्भवती महिला को प्रसव पीड़ा के दौरान ग्रामीणों ने कंधों पर उठाकर अस्पताल पहुंचाया। एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच सकी और ई-रिक्शा भी कीचड़ में फंस गया। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद प्रशासनिक व्यवस्था और ग्रामीण सड़क निर्माण को लेकर सवाल उठने लगे हैं। यह घटना शुक्रवार को हुई, जब देवरा निवासी सुनील कोल की पत्नी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई। परिवार ने तुरंत 108 एंबुलेंस सेवा को सूचित किया, लेकिन खराब सड़क के कारण एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाई। इसके बाद महिला को ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाने का प्रयास किया गया, जो करीब डेढ़ किलोमीटर चलने के बाद कीचड़ और जर्जर सड़क में फंस गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, परिवार और ग्रामीणों ने महिला को कंधों पर उठाकर लगभग एक किलोमीटर पैदल चलकर राष्ट्रीय राजमार्ग-43 तक पहुंचाया। वहां से एक एंबुलेंस की व्यवस्था की गई, जिसने महिला को चंदिया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। अस्पताल में महिला ने एक स्वस्थ बच्चे को जन्म दिया। प्रसूता के पति सुनील कोल ने बताया कि ई-रिक्शा फंसने के बाद चार ग्रामीणों की मदद से उनकी पत्नी को हाईवे तक लाया गया। इसके बाद एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाया गया, जहां सुरक्षित प्रसव हुआ। इस घटना का वीडियो सामने आने के बाद ग्रामीणों में नाराजगी है। उनका आरोप है कि वर्षों से सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। इस घटना ने ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं की बदहाली को एक बार फिर उजागर कर दिया है।
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