एनसीआरबी की ‘क्राइम इन इंडिया 2024’ रिपोर्ट ने इंदौर में किशोर अपराध की चिंताजनक तस्वीर उजागर की है। …और पढ़ें
HighLights
- हिंसक अपराध ज्यादा, आधी एफआईआर में चार्जशीट ही नहीं
- चोट पहुंचाने के 30, हत्या के प्रयास के 5, अपहरण के 6 मामले
- किशोरों पर डिजिटल प्रभाव और संवादहीनता भी इसमें जिम्मेदार
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। देश का सबसे स्वच्छ शहर कहलाने वाला इंदौर अब किशोर अपराध की एक नई और चिंताजनक तस्वीर से भी जूझ रहा है। यहां अपराध की राह पर बढ़ रहे किशोर न तो अनपढ़ हैं, न बेघर और न ही टूटे परिवारों से आते हैं। राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) की रिपोर्ट क्राइम इन इंडिया 2024 बताती है कि इंदौर में पकड़े गए सभी किशोर अपराधी पढ़े-लिखे थे और अधिकांश अपने माता-पिता के साथ रह रहे थे।
एनसीआरबी के अनुसार इंदौर में वर्ष 2024 में किशोर अपराध के 173 मामले दर्ज हुए। वर्ष 2022 में यह संख्या 211 थी, जो 2023 में घटकर 141 हुई थी, लेकिन 2024 में फिर बढ़ोतरी दर्ज की गई। देश के 19 महानगरों में इंदौर किशोर अपराध के मामलों में आठवें स्थान पर है। हालांकि विशेषज्ञों को सबसे ज्यादा चिंता अपराध करने वाले किशोरों की सामाजिक पृष्ठभूमि को लेकर है।
एक भी निरक्षर नहीं था
रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2024 में पकड़े गए कुल 249 किशोर अपराधियों में एक भी निरक्षर नहीं था। इनमें 96 किशोर प्राथमिक शिक्षा प्राप्त थे, 121 मैट्रिक तक पढ़ चुके थे, 23 उच्च माध्यमिक और नौ किशोर इससे आगे की पढ़ाई कर चुके थे। यह स्थिति राष्ट्रीय औसत से अलग है। 19 महानगरों के कुल 7,095 किशोर अपराधियों में 519 निरक्षर पाए गए, जबकि इंदौर में यह संख्या शून्य रही।
मां-बाप के साथ रह रहे, फिर भी भटकाव
रिपोर्ट का एक और अहम पहलू यह है कि 249 में से 212 किशोर अपने माता-पिता के साथ रह रहे थे। 28 किशोर अभिभावकों के साथ रह रहे थे, जबकि केवल नौ किशोर बेघर या अनाथ थे। यानी इंदौर में किशोर अपराध के पीछे गरीबी, बेघरपन या परिवार टूटने जैसे पारंपरिक कारण प्रमुख रूप से सामने नहीं आए। विशेषज्ञ इसे सामाजिक और व्यवहारिक बदलावों से जोड़कर देख रहे हैं।
हिंसक प्रवृत्ति वाले मामले ज्यादा
रिपोर्ट के अनुसार इंदौर में किशोरों के खिलाफ दर्ज मामलों में चोट पहुंचाने के 30 मामले प्रमुख रहे। इसके अलावा हत्या के प्रयास के पांच मामले, अपहरण के छह मामले और लापरवाही से वाहन चलाने का एक मामला दर्ज हुआ। चार किशोरों पर नशे से जुड़े कानूनों के तहत भी कार्रवाई हुई।
आधे मामलों में आरोप-पत्र तक नहीं
इंदौर में बच्चों के विरुद्ध अपराधों की चार्जशीटिंग दर महज 46.3 प्रतिशत रही। यानी आधे से ज्यादा मामलों में पुलिस आरोप-पत्र तक दाखिल नहीं कर सकी। 19 महानगरों में यह औसत 49.6 प्रतिशत रहा।
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क्या संकेत दे रहे हैं आंकड़े?
- किशोर अपराध अब केवल गरीबी या अशिक्षा से जुड़ा मुद्दा नहीं
- डिजिटल प्रभाव और सामाजिक निगरानी की कमी बड़ा कारण
- परिवार साथ होने के बावजूद संवाद का अभाव
- पढ़ाई के साथ बढ़ रहा व्यवहारिक और मानसिक दबाव
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