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कुपोषण की गंभीर स्थिति: इंदौर के 45 हजार बच्चे नाटे, 17 किलो होना चाहिए पांच वर्ष के बच्चे का वजन

कुपोषण की गंभीर स्थिति: इंदौर के 45 हजार बच्चे नाटे, 17 किलो होना चाहिए पांच वर्ष के बच्चे का वजन

पोषण ट्रैकर के अनुसार जिले में 0 से 5 वर्ष के 1 लाख 36 हजार 202 पंजीकृत बच्चों में 44 हजार 946 बच्चों की लंबाई उनकी उम्र के अनुसार सामान्य से कम है। व…और पढ़ें

Publish Date: Fri, 17 Jul 2026 09:09:59 AM (IST)Updated Date: Fri, 17 Jul 2026 09:09:59 AM (IST)

कुपोषण की गंभीर स्थिति। (एआई इमेज)

HighLights

  1. विभाग का दावा- रोज 20 ग्राम प्रोटीन और 500 कैलोरी का भोजन दे रहे
  2. विशेषज्ञों के अनुसार नाटापन लंबे समय तक पर्याप्त पोषण नहीं मिलने और बार-बार संक्रमण का संकेत होता है
  3. पोषण की कमी का असर बच्चे पर लंबे समय तक हो सकता है

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर जिले में कुपोषण की स्थिति इतनी गंभीर है कि हर तीन में से एक बच्चा नाटेपन का शिकार है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार 5 वर्ष की उम्र के लड़कों की औसत लंबाई करीब 110 सेमी और लड़कियों की 109.4 सेमी और वजन 15 से 17 किलो होना चाहिए। लालबाई-फूलबाई आंगनवाड़ी सिमरोल, भगोरा की आंगनवाड़ी क्रमांक 1-2 और 3 में एक भी बच्चा इस मापदंड पर खरा नहीं उतरा।

पोषण ट्रैकर के अनुसार जिले में 0 से 5 वर्ष के 1 लाख 36 हजार 202 पंजीकृत बच्चों में 44 हजार 946 बच्चों की लंबाई उनकी उम्र के अनुसार सामान्य से कम है। विशेषज्ञों के अनुसार नाटापन लंबे समय तक पर्याप्त पोषण नहीं मिलने और बार-बार संक्रमण का संकेत होता है। पोषण की कमी का असर बच्चे पर लंबे समय तक हो सकता है। महिला एवं बाल विकास विभाग का दावा है कि आंगनवाड़ियों में बच्चों को 15-20 ग्राम प्रोटीन और 500 कैलोरी वाला आहार दिया जा रहा है।

WHO के मापदंड

  • उम्र: 2 वर्ष | लंबाई सेमी: 85-88 | वजन किलो: 11.5-13
  • उम्र: 2 वर्ष | लंबाई सेमी: 85-88 | वजन किलो: 11.5-13
  • उम्र: 3 वर्ष | लंबाई सेमी: 94-96 | वजन किलो: 13.5-15
  • उम्र: 4 वर्ष | लंबाई सेमी: 94-96 | वजन किलो: 13.5-15
  • उम्र: 5 वर्ष | लंबाई सेमी: 100-103 | वजन किलो: 15-17

सख्ती: अब फील्ड से अपलोड करेंगे फोटो

महिला व बाल विकास विभाग आयुक्त निधि निवेदिता ने इंदौर की टीम को फटकार लगाई। उमठ आंगनवाड़ी में भोजन देने वाले समूह को हटा दिया है। टीम को रोज फील्ड से फोटो भेजने को कहा है।

लापरवाही: सेंव-परमल खिला दिए

भगोरा पंचायत की आंगनवाड़ी में लगातार बच्चों को खीर-पुड़ी की जगह सेंव-परमल परोसा गया। पंचायत ने जनपद सीईओ से शिकायत भी की, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई।

पहल: पंचायत दूर करेगी कुपोषण

गुरुवार को भगोरा पंचायत सरपंच और सचिव ने क्षेत्र की 6 आंगनवाड़ियों का निरीक्षण किया। इसमें 15 बच्चे कुपोषित निकले। पंचायत क्षेत्र की हर आंगनवाड़ी के बच्चों को केले और गुड़-चना देगी।

पहले दो साल में होता है दिमाग का सबसे तेज विकास, ये सबसे महत्वपूर्ण

0 से 5 वर्ष की उम्र बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास की सबसे महत्वपूर्ण अवधि होती है। जन्म से दो वर्ष तक मस्तिष्क का सबसे तेजी से विकास होता है। यदि इस दौरान बच्चे को पर्याप्त प्रोटीन, कैलोरी और अन्य जरूरी पोषक तत्व नहीं मिलते, तो उसकी सोचने-समझने, सीखने और याद रखने की क्षमता प्रभावित हो सकती है। लंबे समय तक पोषण की कमी रहने पर बच्चा नाटापन (स्टंटिंग), कम वजन (अंडरवेट) और दुबलापन (वेस्टिंग) का शिकार हो सकता है। हड्डियों का विकास, रोग प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित होती है। बच्चे बार-बार संक्रमण व बीमारियों की चपेट में आ सकते हैं। कुपोषण से शरीर के विकास के लिए जरूरी हार्मोन और टीशू के निर्माण की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है। इसका असर आगे चलकर बच्चे की लंबाई, शारीरिक विकास और कार्यक्षमता पर पड़ सकता है। इसलिए शुरुआती पांच वर्षों में संतुलित और पर्याप्त पोषण सबसे जरूरी होता है। –डॉ. रामाशीष शुक्ला, शिशु रोग विशेषज्ञ

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