नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। ग्वालियर में फास्टर केयर यानी देखरेख के लिए अपनेपन का बच्चे और नाबालिग इंतजार कर रहे हैं। यहां ढाई साल से कोई फास्टर केयर के लिए आगे नहीं आया है। इसी बीच ग्वालियर के शिशु गृह में रह रही पांच साल नौ माह की बच्ची को गोद लेने के लिए दुबई के कारोबारी दंपती ने रुचि दिखाई है। दंपती यहां आकर बच्ची से मिल भी गए हैं और सभी औपचारिकताएं पूरी हो चुकी हैं।
दंपती के पहले से एक बच्ची भी है
अब विधिवत आदेश जारी होते ही वे बच्ची को प्रक्रिया के तहत अपने साथ ले जाएंगे। दंपती के पहले से एक बच्ची भी है और मूल रूप से भारत के रहने वाले हैं। बता दें कि, बच्चों को गोद लेने की प्रक्रिया पूरी तरह आनलाइन है। इस प्रक्रिया के तहत आनलाइन ही रजिस्ट्रेशन कराना होता है।
इसके लिए वेबसाइट सीएआरए की वेबसाइट पर रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसमें एड्रेस प्रूफ, आइडी प्रूफ और फोटो सहित अन्य संबंधित जानकारी देनी होती है, इसके बाद किस उम्र के बच्चे को गोद लेना चाहते हैं, किस जेंडर और सिबलिंग को गोद लेना चाहते हैं इसकी जानकारी भी आनलाइन ही भरी जाती है। इसके बाद रजिस्टर्ड सामाजिक संस्था की ओर से होम स्टडी रिपोर्ट तैयार होती है।
फास्टर केयर: ढाई साल से इंतजार, लोग आगे नहीं आ रहे
अपनेपन का प्यार पाने के लिए मासूम तरस रहे हैं। ग्वालियर बड़ा महानगर है लेकिन यहां जिन बच्चों का कोई नहीं उन्हें प्यार देने वाले फिलहाल तो नहीं हैं। ग्वालियर में यही हकीकत है जहां बड़े दिलवाले और प्यार देने वालों की बच्चे राह तक रहे हैं। शासन की फास्टर केयर यानी पालन पोषण योजना में पिछले ढ़ाई साल से किसी ने रुचि नहीं दिखाई है।
बालिका गृह में चार बालिकाएं हैं जो लीगल फ्री हैं और फास्टर केयर में जाने का इंतजार है। फास्टर केयर में छह साल से लेकर 18 की उम्र के अंदर तक के बच्चों से लेकर किशोरों को शामिल किया जाता है और शासन इसके लिए चार हजार रूपये प्रति केस भी प्रदान करता है।
इसमें गोद भी दिए जाने का प्रविधान है क्योंकि गोद लिए जाने को लेकर निसंतान दंपत्तियों की कारा पोर्टल पर कतार है, वहां पेंडेंसी ही खत्म नहीं होती है। ऐसे में यह योजना बड़ा विकल्प है। फास्टर केयर के बच्चों को गोद के लिए भी अधिकृत कर दिया जाता है इस तरह से फास्टर केयर एक महत्वपूर्ण योजना है।
इनका कहना है…
फास्टर केयर योजना में अभी लोग कम रुचि दिखा रहे हैं, इसको लेकर हम जागरूक कर रहे हैं। ढ़ाई साल से लगभग कोई आवेदक नहीं आया है। इसमें छह से 18 साल के बच्चों व नाबालिगों को देखरेख के लिए लिया जा सकता है, हर साल रिन्युअल हो जाता है और गोद लिए जाने का विकल्प भी है। गोद लेने के लिए ग्वालियर के शिशु गृह से एक बालिका को लेने में दुबई के दंपती ने रुचि दिखाई है। -उपासना राय, जिला कार्यक्रम अधिकारी, ग्वालियर।
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