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ग्वालियर: 45 साल पुराने डकैती एक्ट पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार और अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी

ग्वालियर: 45 साल पुराने डकैती एक्ट पर हाईकोर्ट सख्त, सरकार और अफसरों को कारण बताओ नोटिस जारी

हाई कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि जब प्रदेश में कोई डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है तो इस विशेष और सख्त कानून को बनाए रखने का क्या औचित्य है।

Publish Date: Tue, 08 Sep 2026 11:01:39 PM (IST)Updated Date: Tue, 08 Sep 2026 11:02:35 PM (IST)

HighLights

  1. पूर्व नेता प्रतिपक्ष गोविंद सिंह की जनहित याचिका पर सुनवाई
  2. वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने हाईकोर्ट में रखीं दलीलें
  3. सक्रिय गिरोह न होने पर कानून का औचित्य पूछा

नईदुनिया प्रतिनिधि,ग्वालियर। ग्वालियर-चंबल संभाग में 45 साल से लागू मध्य प्रदेश डकैती और व्यपहरण प्रभावित क्षेत्र अधिनियम, 1981 को खत्म करने की मांग पर दायर जनहित याचिका पर मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने बड़ी कार्रवाई की है।

मंगलवार को हुई सुनवाई में हाई कोर्ट ने डीआईजी, आईजी ग्वालियर-चंबल, संभाग के सभी पुलिस अधीक्षकों (एसपी), प्रमुख सचिव गृह और प्रमुख सचिव विधि को नोटिस जारी करने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा है कि जब प्रदेश में कोई डकैत गिरोह सक्रिय नहीं है तो इस विशेष और सख्त कानून को बनाए रखने का क्या औचित्य है।

यह पीआईएल लहार के पूर्व विधायक, पूर्व नेता प्रतिपक्ष और पूर्व मंत्री डॉ. गोविंद सिंह ने दायर की है। याचिका में कहा गया है कि वर्ष 1981 में जब चंबल के बीहड़ों में डकैतों का आतंक था, तब यह कानून जरूरी था, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। सरकार खुद विधानसभा में स्वीकार कर चुकी है कि वर्ष 2007 के बाद प्रदेश में कोई नया सूचीबद्ध डकैत नहीं बना और वर्तमान में कोई गिरोह सक्रिय नहीं है। इसके बावजूद इस कानून के तहत धारा 11 और 13 का इस्तेमाल आम आपराधिक मामलों में भी किया जा रहा है।

राज्यसभा सदस्य व वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा ने की पैरवी

इसी मामले में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सदस्य, वरिष्ठ अधिवक्ता विवेक तन्खा मंगलवार को ग्वालियर पहुंचे और याचिकाकर्ता की ओर से पैरवी की। तन्खा ने कहा, कोई भी कानून समय की जरूरत के हिसाब से बनता है। जब वह अपना उद्देश्य पूरा कर ले तो उसे खत्म करना चाहिए। ग्वालियर-चंबल की परिस्थितियां अब पहले जैसी नहीं हैं।

गौरतलब है कि तन्खा ने पिछले साल मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर भी इस कानून को समाप्त करने की मांग की थी और भिंड से पूर्व विधायक मेवाराम जाटव 2023 में विधानसभा में भी यह मुद्दा उठा चुके हैं। अब कोर्ट ने सभी पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है। अगली सुनवाई में तय होगा कि इस 45 साल पुराने विशेष कानून को जारी रखा जाए या खत्म किया जाए।

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