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जबलपुर में पानी की पाइपलाइनों पर NGT सख्त, अधिकारियों की लापरवाही पर जताया गुस्सा

जबलपुर में पानी की पाइपलाइनों पर NGT सख्त, अधिकारियों की लापरवाही पर जताया गुस्सा

नालियों से होकर गुजर रही पेयजल पाइपलाइनों की जांच के लिए गठित समिति में मनोनीत अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण नहीं करने और रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने…और पढ़ें

Publish Date: Wed, 19 Aug 2026 04:32:15 PM (IST)Updated Date: Wed, 19 Aug 2026 04:32:15 PM (IST)

जबलपुर में पानी की पाइपलाइनों पर NGT सख्त (सांकेतिक तस्वीर)

HighLights

  1. नालियों से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन की जांच में लापरवाही
  2. मनोनीत अधिकारियों ने न स्थल निरीक्षण किया न रिपोर्ट दी
  3. स्पष्टीकरण लेकर अनुशासनात्मक कार्रवाई के निर्देश

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर। नालियों से होकर गुजर रही पेयजल पाइपलाइनों की जांच के लिए गठित समिति में मनोनीत अधिकारियों द्वारा स्थल निरीक्षण नहीं करने और रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करने को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने गंभीरता से लिया है। ट्रिब्यूनल ने जबलपुर कलेक्टर और नगर निगम को निर्देश दिए हैं कि संबंधित अधिकारियों के स्थान पर अन्य सक्षम अधिकारियों को तत्काल मनोनीत किया जाए। साथ ही, जिन अधिकारियों ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के पत्रों और बार-बार किए गए संपर्क के बावजूद कार्रवाई नहीं की, उनसे स्पष्टीकरण लेकर आवश्यक अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाए।

एनजीटी की सेंट्रल जोन बेंच भोपाल के न्यायिक सदस्य एसके सिंह व एक्सपर्ट मेंबर सुधीर कुमार चतुर्वेदी की युगलपीठ ने डा. पीजी नाजपांडे व अन्य विरुद्ध यूनियन ऑफ इंडिया व अन्य में यह आदेश पारित किया। सुनवाई के दौरान मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से बताया गया कि समिति के सदस्यों को स्थल निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए विभिन्न पत्रों के माध्यम से सूचित किया गया था। इसके बावजूद संबंधित अधिकारियों ने न तो जवाब दिया और न ही स्थल निरीक्षण के लिए उपस्थित हुए। बार-बार फोन किए जाने के बाद भी उन्होंने काल का जवाब देना बंद कर दिया।

30 दिन में देनी होगी रिपोर्ट

ट्रिब्यूनल ने निर्देश दिया कि कलेक्टर जबलपुर और जबलपुर नगर निगम तत्काल अन्य सक्षम अधिकारियों को नामित करें। ये अधिकारी राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के साथ समन्वय कर संबंधित स्थल का निरीक्षण करेंगे और 30 दिनों के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे। ट्रिब्यूनल ने राज्य सरकार के अधिवक्ता को आदेश की जानकारी कलेक्टर व नगर निगम तक तत्काल पहुंचाने के निर्देश भी दिए हैं।

80 प्रतिशत पाइपलाइन नालियों से गुजरने का आरोप

याचिकाकर्ताओं की ओर से बताया गया कि जबलपुर में करीब 80 प्रतिशत पेयजल पाइपलाइन नालियों से होकर गुजर रही हैं। इनमें कई पाइपलाइन 40-50 वर्ष पुरानी और क्षतिग्रस्त हैं। इससे पेयजल की गुणवत्ता व नागरिकों के स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव पड़ने की आशंका जताई गई है।

याचिका में पुरानी पाइपलाइनों को बदलने के लिए ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने का भी मुद्दा उठाया गया है। इसी शिकायत पर एनजीटी ने जांच समिति गठित करते हुए मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को नोडल एजेंसी बनाया है। याचिकाकर्ताओं डा. पी.जी. नाजपांडे व रजत भार्गव की ओर से अधिवक्ता प्रभात कुमार यादव ने पैरवी की। मामले की अगली सुनवाई तीन नवंबर को होगी।

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