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जिस मिलावटी हल्दी से बीमार हुए दूल्हा-दुल्हन, उसकी होगी जांच, कारखानों में चल रहा मिलावट का बड़ा कारोबार

जिस मिलावटी हल्दी से बीमार हुए दूल्हा-दुल्हन, उसकी होगी जांच, कारखानों में चल रहा मिलावट का बड़ा कारोबार

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। जिस मिलावटी हल्दी के कारण दूल्हा-दुल्हन बीमार हुए थे, अब उसकी जांच की जाएगी। एमवाय अस्पताल के मेडिसिन विभाग के चिकित्सकों ने हल्दी के सैंपल एकत्रित किए हैं, जिन्हें खाद्य विभाग की टीम को सौंपा जाएगा। इस जांच में यह स्पष्ट हो पाएगा कि हल्दी में कौन से जानलेवा केमिकल की मिलावट की गई थी, जिसको लगाने से लोग बीमार हो रहे हैं। एमवाय अस्पताल में इंदौर, खरगोन सहित अन्य जिलों से चार दूल्हा-दुल्हन हल्दी की रस्म के बाद बीमार होकर भर्ती हुए थे। इन्हें मिलावटी हल्दी के कारण गंभीर एलर्जी रिएक्शन हो गया था।

हाट बाजारों से खरीदी गई थी खुली हल्दी

अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले दूल्हा-दुल्हन ग्रामीण क्षेत्र के रहने वाले हैं। इनके स्वजन ने हाट बाजारों में लगने वाली दुकानों से खुली हल्दी खरीदी थी। खाद्य विभाग की टीम अब हाट बाजारों में लगने वाली दुकानों पर जाकर भी हल्दी की जांच करेगी। अधिकारियों ने बताया कि हमेशा पैकिंग वाली हल्दी को ही खरीदना चाहिए।

एमवाय अस्पताल के अधीक्षक डॉ. अशोक यादव ने बताया कि हल्दी का उपयोग हमें घर पर बनाकर करने का प्रयास करना चाहिए। हल्दी के कारण मरीज को एलर्जिक रिएक्शन था। होठों पर सूजन थी और शरीर पर चकत्ते थे। हिस्ट्री निकाली तो पता चला कि शादी में हल्दी लगाई थी। मरीज को सांस लेने में भी तकलीफ हो रही थी। हल्दी के सैंपल की जांच करवाई जाएगी। गर्मी में इस तरह की घटना बढ़ जाती है।

ग्रामीण क्षेत्रों के छोटे कारखानों में मिलावट का खेल

हल्दी सहित अन्य मसालों का निर्माण ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे-छोटे कारखानों में किया जा रहा है। घर और छोटी जगह पर स्थित कई कारखानों की जानकारी प्रशासन को नहीं होती है। इसके कारण यह मिलावटखोर मनमाने तरीके से मिलावट करते रहते हैं। डेढ़ से दो लाख रुपये में मशीन लाकर यह खुद की निर्माण इकाई शुरू कर देते हैं। इन हानिकारक हल्दी सहित अन्य मसालों की सप्लाय भी ग्रामीण क्षेत्रों तक ही सीमित रखते हैं।

मिलावटखोर हल्दी का निर्माण करने के लिए उसमें चावल का बारीक पीसा हुआ आटा मिलाते हैं। चावल का आटा शरीर पर चिपकता नहीं है। इसका रंग पीला करने के लिए इसमें आर्टिफिशियल रंग या फिर डाई का उपयोग किया जाता है। इसके बाद इसे हल्दी में मिला दिया जाता है। यह खाने के साथ ही त्वचा के लिए भी नुकसानदायक होती है।

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शुद्धता की पहचान और विशेषज्ञों की सलाह

हल्दी का उपयोग खाने, शरीर में लगाने और आयुर्वेद में दवाइयों के रूप में किया जाता है। खाद्य सुरक्षा में प्रावधान है कि हल्दी को पैक कर ही बेच सकते हैं, जिसमें बैच नंबर और निर्माता की जानकारी हो। मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनीष स्वामी ने बताया कि खाने में बारीक पीसी हुई हल्दी का उपयोग करें। हल्दी को पानी में घोलकर कुछ देर रख दें। हल्दी घुलती नहीं है, नीचे बैठ जाती है। यदि मिलावटी होगी तो पानी में घुलेगी। मरीजों को सांस लेने में दिक्कत, होंठों में सूजन, शरीर पर लाल चकत्ते, कमजोरी और पूरे शरीर में सूजन जैसे लक्षण दिखाई दिए थे।

खरगोन जिले के कसरावद निवासी 21 वर्षीय राखी, दूधिया निवासी 35 वर्षीय गोलू सहित अन्य दो को अस्पताल में भर्ती किया गया था। विशेषज्ञों के मुताबिक मिलावटी हल्दी में मेटानिल येलो नाम का जहरीला रंग मिलाया जा रहा है। यह रंग हल्दी को ज्यादा चमकीला और आकर्षक दिखाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि यह रंग खाने और शरीर पर लगाने दोनों के लिए बेहद खतरनाक माना जाता है।

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