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ट्रम्प महिलाओं की उपलब्धियों को रिकॉर्ड से मिटा रहे:  नासा और पेंटागन से महिलाओं से जुड़ी जानकारियां हटाईं

ट्रम्प महिलाओं की उपलब्धियों को रिकॉर्ड से मिटा रहे: नासा और पेंटागन से महिलाओं से जुड़ी जानकारियां हटाईं

वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के 20 जनवरी 2025 को दिए गए कार्यकारी आदेश के बाद से उनके प्रशासन ने महिलाओं की उपलब्धियों को सार्वजनिक रिकॉर्ड से हटाने की मुहिम शुरू कर दी है।

इस आदेश में ट्रम्प ने डाइवर्सिटी, इक्विटी और इन्क्लूजन (DEI) कार्यक्रमों को ‘अवैध और अनैतिक’ बताया था। इसके बाद नासा को अपनी वेबसाइट से महिलाओं से जुड़ी हर जानकारी हटाने का आदेश दिया गया।

पेंटागन ने भी महिला सैनिकों की ऐतिहासिक उपलब्धियों से जुड़ी जानकारियां ऑनलाइन से हटा दी हैं। यहां तक कि ऑरलिंगटन नेशनल सेमेट्री की वेबसाइट से महिला वेटरन्स के पेज भी गायब कर दिए गए हैं।

ऑरलिंगटन नेशनल सेमेट्री अमेरिका का एक प्रमुख कब्रिस्तान है।

ऑरलिंगटन नेशनल सेमेट्री अमेरिका का एक प्रमुख कब्रिस्तान है।

महिलाओं के इतिहास को मिटाने का ऑरवेलियन तरीका

यह पूरी प्रक्रिया लेखक जॉर्ज ऑरवेल के नोबेल 1984 की याद दिलाती है, जिसमें सरकार असुविधाजनक तथ्यों को मेमोरी होल में डालकर मिटा देती है।

नोबेल का नायक विंस्टन स्मिथ मिनिस्ट्री ऑफ ट्रुथ में काम करता है, जहां इतिहास को झूठ में बदला जाता है। ट्रम्प प्रशासन का यह कदम भी वैसा ही है।

लेखिका अन्ना फंडर का कहना है कि इतिहास में कई पुरुषों की सफलता के पीछे महिलाओं की मेहनत होती है।

ऑरवेल की मां और बहनें भी फेमिनिस्ट थीं और उन्होंने ही ऑरवेल को समाज की सच्चाई देखने की समझ दी। लेकिन जब बात उनकी उपलब्धियों की आती है, तो महिलाओं का नाम गायब कर दिया जाता है।

ऑरवेल की पत्नी को भी इतिहास से गायब कर दिया

लेखिका अन्ना फंडर ने अपनी किताब ‘वाइफडम- मिसेज ऑरवेल इनविजिबल लाइफ’ में बताया है कि जॉर्ज ऑरवेल की पत्नी आइलीन ओ’शॉनेसी ने उनके जीवन और लेखन में अहम भूमिका निभाई थी, लेकिन उन्हें इतिहास में जगह नहीं मिली।

ऑरवेल की मशहूर किताब एनिमल फार्म में भी ओ’शॉनेसी का योगदान था, लेकिन उनका नाम कहीं नहीं है। उन्होंने ही ऑरवेल को स्टालिन पर सीधी आलोचना की बजाय प्रतीकात्मक कहानी लिखने की सलाह दी थी।

महिलाओं को मिटाना पितृसत्ता की रणनीति

फंडर कहती हैं कि महिलाओं को इतिहास से मिटाना पितृसत्तात्मक व्यवस्था की एक सोची-समझी रणनीति है। इससे पुरुषों को मुख्य किरदार और महिलाओं को सहायक या अदृश्य बना दिया जाता है।

ऑरवेल की पत्नी न केवल उनकी जान बचाने वाली थीं, बल्कि वे परिवार की कमाने वाली सदस्य भी थीं। उन्होंने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटेन के सेंसरशिप विभाग में काम किया। लेखिका का मानना है कि ट्रम्प की नीतियां असंतुष्ट पुरुषों को यह संदेश देती हैं।

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