डायबिटीज के इलाज में अब तक रोज इंसुलिन का इंजेक्शन लगाने वाले मरीजों को राहत मिलने वाली है। भारत में लांच हो चुकी इंसुलिन अवीकली सोमवार तक इंदौर पहुंच…और पढ़ें
HighLights
- डायबिटीज के इलाज में अब तक रोज इंसुलिन का इंजेक्शन लगाने वाले मरीजों को राहत मिलने वाली है
- भारत में लांच हो चुकी इंसुलिन के सोमवार तक इंदौर पहुंचने की संभावना है
- यह हफ्ते में सिर्फ एक बार लगने वाली बेसल इंसुलिन है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। डायबिटीज के इलाज में अब तक रोज इंसुलिन का इंजेक्शन लगाने वाले मरीजों को राहत मिलने वाली है। भारत में लांच हो चुकी इंसुलिन अवीकली सोमवार तक इंदौर पहुंचने की संभावना है। यह हफ्ते में सिर्फ एक बार लगने वाली बेसल इंसुलिन है। यानी जिन मरीजों को अभी सालभर में करीब 365 इंजेक्शन लगाने पड़ते हैं, उन्हें अब केवल 52 इंजेक्शन से काम चल सकेगा।
विशेषज्ञों के मुताबिक टाइप 1 एवं टाइप 2 मरीजों के लिए सबसे बड़ी राहत इंजेक्शन की संख्या कम होना नहीं, बल्कि रोज सुई लगाने के मानसिक दबाव से छुटकारा मिलना है। कई मरीज इंसुलिन की जरूरत होने के बावजूद केवल इस डर से इलाज शुरू नहीं करते कि उन्हें हर दिन इंजेक्शन लगाना पड़ेगा। यही वजह है कि बड़ी संख्या में मरीजों में इंसुलिन थेरेपी शुरू करने में सात से नौ साल तक की देरी हो जाती है। इससे शुगर लंबे समय तक अनियंत्रित रहती है और आंख, किडनी, दिल तथा नसों से जुड़ी गंभीर समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। ऑल इंडिया वैक्सीन डीलर एसोसिएशन के सचिव डा. मकरंद शर्मा ने बताया कि सोमवार तक यह इंसुलिन की पहली खैप इंदौर में आ जाएगी।
रोजाना समय याद रखने की चिंता खत्म
विशेषज्ञों के मुताबिक इंसुलिन मरीजों के लिए इलाज को पहले से कहीं अधिक आसान बनाएगी। मरीज अपनी सुविधा के अनुसार सप्ताह का एक निश्चित दिन तय कर सकते हैं और उसी दिन इंसुलिन ले सकते हैं। रोज समय याद रखने या इंजेक्शन छूट जाने की चिंता काफी हद तक खत्म हो जाएगी। नियमित इलाज होने से ब्लड शुगर नियंत्रण में रखने में भी मदद मिलेगी। इसका सबसे अधिक लाभ बच्चों और बुजुर्गों को मिलने की उम्मीद है। छोटे बच्चों को रोज इंजेक्शन लगवाना माता-पिता के लिए कठिन होता है, वहीं बुजुर्ग कई बार समय भूल जाते हैं या रोज इंजेक्शन लगाने में असहज महसूस करते हैं।
हर चौथा युवा प्री-डायबिटीज
हेल्थ आफ इंदौर द्वारा इंदौर में सर्वे किया गया था, सर्वे में 30 हजार युवाओं को भी शामिल किया गया, जिसमें चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि इनमें से 25 प्रतिशत युवाओं को प्री-डायबिटीज मिले। इंदौर में हर वर्ष 25 हजार से अधिक डायबिटीज के मरीज सामने आ रहे हैं।
डायबिटीज प्रबंधन की सोच में बड़ा बदलाव
इंसुलिन आइकोडेक केवल एक नई दवा नहीं, बल्कि डायबिटीज प्रबंधन की सोच में बड़ा बदलाव है। इससे मरीजों का आत्मविश्वास बढ़ेगा और रोज इंजेक्शन लगाने की चिंता भी खत्म हो जाएगी। कई बार मरीज इंसुलिन लगाने में लापरवाही कर लेते हैं, समय पर नहीं लगाते हैं। सप्ताह में एक दिन लगने से मरीज को राहत मिलेगी। – डॉ. राजेश वर्मा, मधुमेह रोग विशेषज्ञ
रोजाना इंसुलिन लगाने का तनाव नहीं रहेगा
यह इंसुलिन मरीजों के लिए काफी फायदेमंद है। इन्हें रोजाना इंसुलिन लगाने का तनाव नहीं रहेगा। लेकिन यह इंसुलिन हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है। किस मरीज को यह दवा दी जानी चाहिए, इसका निर्णय केवल डायबिटीज विशेषज्ञ ही करेंगे। मरीज की बीमारी की अवस्था, ब्लड शुगर के स्तर और पहले से चल रहे इलाज का मूल्यांकन करने के बाद ही इसे शुरू करें। – डॉ. राहुल चऊदा, मधुमेह रोग विशेषज्ञ
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