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दुनिया हमारी इच्छा से नहीं चलेगी, लेकिन हमारा आचरण कैसा हो यह निर्णय हमारे हाथ में, इंदौर में जैन महिला महाकुंभ में की चर्चा

दुनिया हमारी इच्छा से नहीं चलेगी, लेकिन हमारा आचरण कैसा हो यह निर्णय हमारे हाथ में, इंदौर में जैन महिला महाकुंभ में की चर्चा

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। दो दिवसीय जैन महिला महाकुंभ की शुरुआत रविवार को वीआइपी रोड स्थित दलालबाग में हुई। इसमें एक जैसी वेषभू में एक जैसी परिधान में सैकड़ों मातृशक्तियां उपस्थित थी। एक ओर जहां अपने क्षेत्र में विशेष योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित किया गया तो दूसरी और रंगारंग सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने इस महाकुम्भ की आभा को कई गुना बढ़ा दिया। साथ ही समाजिक जिम्मेदारी निभाते हुए पीढ़ियों को संस्कारित करने के उद्देश्य पर चर्चा भी हुई।

मुनि पुंगव सुधासागर महाराज ने कहा कि संसार कभी भी पूरी तरह पाप, छल और अधर्म से रहित नहीं होगा इसलिए धर्म के लिए अनुकूल परिस्थितियों की प्रतीक्षा करना स्वय को टालना है। दुनिया हमारी इच्छा के अनुसार नहीं चलेगी लेकिन दुनिया में हमारा आचरण कैसा होगा, इसका निर्णय हमारे हाथ में है।

समाज की दृष्टि को पूरी तरह नियंत्रित करना संभव नहीं है लेकिन हमारा चरित्र, व्यवहार, वाणी, संस्कार और जीवनशैली इस बात को बहुत हद तक प्रभावित करते हैं कि लोग हमें किस दृष्टि से देखें। बच्चों को उनकी स्वाभाविक ऊर्जा से वंचित करने के बजाय उन्हें संस्कार और सही दिशा देना प्रत्येक माता-पिता का दायित्व है।

दुनिया को सुधारने की कोशिश करने के बजाय पहले यह तय करना होगा कि हमें कैसी दुनिया चाहिए और फिर स्वयं वैसा बनने का पुरुषार्थ करना होगा।राष्ट्रीय महिला अधिवेशन के इस आयोजन का शुभारम्भ ध्वजारोहण एवं ध्वज गीत के साथ हुआ।

प्रारम्भ में मुख्य संयोजक चक्रवर्ती सपना मनीष गोधा एवं चक्रवर्ती शिवानी- नवीन गोधा, राष्ट्रीय अध्यक्ष शीला जैन डोडिया (जयपुर), श्रीमती सुशील पाटनी, श्रीमती शांता पाटनी, तारिका पाटनी, सामाजिक संसद महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष साधना दगडे, रूचि गोधा एवं संगीता बाकलीवाल सहित आयोजन से जुडी बहनों ने सभी अतिथियों की अगवानी की।इस मौके महामंत्री हर्ष जैन, अशोक रानी दोषी, कोषाध्यक्ष विजय पाटोदी, अक्षय जैन उपस्थित थे।

शील कोई ड्रेस कोड नहीं, माइंड सेट है

साहित्यकार एवं पुरातत्व शोधकर्ता डॉ. ममता जैन (जयपुर) ने कहा कि यह आयोजन पीढ़ियों को संस्कारित करने वाला एक एतिहासिक अधिवेशन है। यहां केवल भीड़ एकत्र नहीं होती बल्कि परिवार बदलते हैं, जीवन संवरते हैं और आने वाली पीढियां संस्कारों से समृद्ध होती है।

“आज के युग में नारी की चुनौती” विषय पर उन्होंने कहा कि शील कोई ड्रेस कोड नहीं, माइंड सेट है। आज की महिला के सामने अनेक चुनौतियाँ हैं। एक ओर आधुनिक दिखने का दबाव है तो दूसरी ओर अपनी पहचान और संस्कृति को बचाने की चुनौती। जब अच्छा होने से अच्छा दिखना अधिक महत्वपूर्ण हो जाए और फैशन ही हमारी पूरी पहचान को परिभाषित करने लगे तब हमें ठहरकर सोचना होगा।

भारतीय वायुसेना की पूर्व स्क्वाड्रन लीडर एवं मिसेस इंडिया सम्मानित

महाकुम्भ में भारतीय वायुसेना की पूर्व स्क्वाड्रन लीडर नूपुर जैन एवं मिसेस इंडिया श्वेता मेहता मोदी के साथ अन्य प्रतिभाओं और समाज की विभिन्न मातृशक्ति का भी सम्मान किया गया। जुलूस संयोजक राहुल सेठी एवं सामाजिक संसद महिला प्रकोष्ठ की अध्यक्ष साधना दगडे, सह संयोजक गौरव पाटोदी ने बताया कि 5 अक्टूबर को देशभर से आई करीब 5100 महिलाओं का चल समारोह एयरपोर्ट थाने के आगे मिडफ्लाइट होटल से निकाला जाएगा।

मार्ग में अनेक स्थानों पर स्वागत और पुष्प वर्षा जैसे दृश्य भी नजर आएंगे। इसमें अश्वारोही 24 मातृशक्ति, 16 बग्घी, 2 बैंड दल, 1 आर्केस्ट्रा पार्टी और तीर्थ क्षेत्र महावीरजी से आए भजन गायक सोनू भाई एवं उनकी मंडली भजनों प्रस्तुति देंगे। दूसरा सत्र दोपहर 1.15 बजे से होगा। शाम 4.30 बजे तक पुरस्कार वितरण होगा।

  • 125 महिला मंडल के प्रतिनिधि व सदस्यों ने लिया भाग।
  • 12 राज्यों से आई महिलाओं ने भागीदारी की।
  • 97 शहरों से आई 5 हजार सदस्य आए।

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