हमने गंदे पानी की समस्या पर काम शुरू किया। वर्तमान में हालात विकट हैं, लेकिन हम आज नहीं जागे तो भविष्य में स्थिति और विकट हो जाएगी। …और पढ़ें
HighLights
- पिछले 13 साल में शहर का तेजी से विकास हुआ
- कई नई टंकियां बनी, लेकिन इनको भरने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं आया
- कई नए क्षेत्रों में नर्मदा लाइन का विस्तार किया गया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। वर्ष 2013 में नर्मदा का तीसरा चरण इंदौर आया था। पिछले 13 साल में शहर का तेजी से विकास हुआ। कई नई टंकियां बनी, लेकिन इन टंकियों को भरने के लिए अतिरिक्त पानी नहीं आया। कई नए क्षेत्रों में नर्मदा लाइन का विस्तार किया गया।
29 गांव नगर निगम सीमा में शामिल हुए। इन गांवों में और आसपास के क्षेत्रों में तेजी से रहवासी कालोनियां विकसित हुईं। इन क्षेत्रों में नर्मदा लाइन पहुंची, लेकिन अतिरिक्त पानी नहीं मिला। चार वर्ष पहले जब हमारी परिषद ने कामकाज संभाला था तो सबसे बड़ी समस्या गंदे पानी की थी। हमने गंदे पानी की समस्या पर काम शुरू किया। वर्तमान में हालात विकट हैं, लेकिन हम आज नहीं जागे तो भविष्य में स्थिति और विकट हो जाएगी।
यह बात नगर निगम जलकार्य प्रभारी अभिषेक शर्मा बबलू ने कही। वे सोमवार को नईदुनिया के साप्ताहिक कार्यक्रम विमर्श में शामिल हुए। शर्मा ने कहा कि नर्मदा का तीसरा चरण जब इंदौर आया था उस समय शहर में चार लाख मकान थे जो अब बढ़कर आठ लाख हो चुके हैं।
शहर के 20 प्रतिशत हिस्से में नर्मदा लाइन नहीं है
शहर का 20 प्रतिशत हिस्सा आज भी ऐसा है जहां नर्मदा लाइन नहीं है। अमृत 2.0 की योजना पहले 1100 करोड़ रुपये की थी जिसे बढ़ाकर 2300 करोड़ रुपये किया गया। इसकी वजह थी कि इस योजना में पहले शहर का बाहरी हिस्सा शामिल ही नहीं था। वर्तमान में स्थिति यह है कि नर्मदा का जल इंदौर लाने पर निगम प्रतिवर्ष 300 करोड़ रुपये खर्च करता है जबकि जलकर वसूली इससे बहुत कम है।
शर्मा ने कहा कि जहां तक दूषित पानी का सवाल है हमें यह समझना होगा कि इंदौर में दो दिन में एक बार पानी आता है। अगर हम मान भी लें कि दो दिन में एक घंटा पानी आ रहा है तो 47 घंटे लाइन खाली रहती है। हमारे यहां कई क्षेत्रों में मोटर से पानी खींचा जाता है। मोटर लगाने वाले पांच-दस मिनट पहले से मोटर चालू कर देते हैं। ऐसे में मोटर आसपास का गंदा पानी खींच लेती है।
नर्मदा के चौथे चरण में मिलेगी राहत, लेकिन इंतजार करना होगा
शर्मा ने कहा कि नर्मदा का चौथा चरण इंदौर आने के बाद यहां लोगों को राहत मिलेगी, लेकिन इसके लिए शहर को कम से कम वर्ष 2029 तक इंतजार करना होगा। अमृत 2.0 में हम 1.45 लाख नए कनेक्शन देंगे वहीं दो लाख से ज्यादा पुराने जल कनेक्शन की लाइन भी बदली जाएगी। अमृत 2.0 के तहत कई क्षेत्रों में सीवरेज लाइनें बिछाई जा रही हैं। दरअसल शहर में बडी संख्या ऐसी कालोनियों की है जहां सीवरेज का सिस्टम ही नहीं विकसित किया गया। हमारा लक्ष्य पहले इन क्षेत्रों में सिस्टम विकसित करना है।
घटना के बाद भागीरथपुरा में एक भी फाइल स्वीकृत नहीं हुई
शर्मा ने बताया कि भागीरथपुरा में दूषित पानी की समस्या के बाद तेजी से काम हुए। नई लाइनें बिछाई गई, लेकिन इनमें से किसी भी काम की फाइल घटना के बाद स्वीकृत नहीं हुई। ये सभी काम घटना के पहले ही स्वीकृत हो चुके थे। दरअसल वहां घर-घर में बोरिंग हैं और इन्हीं बोरिंगों को नर्मदा लाइन से जोड़ दिया गया था। इनमें एक दिन नर्मदा जल और दूसरे दिन बोरिंग का पानी आता था। भागीरथपुरा में लगभग सभी बोरिंग दूषित पानी दे रहे थे।
नए तालाबों के लिए मांगी है जगह
जलकार्य प्रभारी ने बताया कि नगर निगम ने शासन से नए तालाबों के लिए जमीन की मांग की है। इस संबंध में मुख्यमंत्री से चर्चा भी हुई है। भविष्य की चिंता करते हुए हमें नए तालाब बनाना होंगे। नए तालाब बनेंगे तो आसपास के क्षेत्र में भूजल स्तर में सुधार होगा और इसका फायदा आमजन को मिलेगा। शर्मा ने बताया कि हम शहर में नए संपवेल का निर्माण भी कर रहे हैं। इसके अलावा पानी के स्टोरेज को लेकर भी काम कर रहे हैं। वर्तमान में स्थिति यह है कि अगर एक दिन भी नर्मदा लाइन बंद हो जाए तो हाहाकार मच जाता है। हमें इस स्थिति को नियंत्रित करना है तो पानी के संरक्षण पर काम करना ही होगा।
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