इंदौर पोलोग्राउंड में औद्योगिक कॉम्प्लेक्स के दो फेज बनेंगे। पहले फेज को 40 करोड़ मंजूरी मिली। डेढ़ साल में निर्माण होगा। इससे 200 नई औद्योगिक इकाइयों …और पढ़ें
HighLights
- पोलोग्राउंड में दो फेज में औद्योगिक कॉम्प्लेक्स बनाए जाएंगे जल्द।
- पहले फेज के लिए 40 करोड़ रुपए की मंजूरी मिल गई।
- प्रोजेक्ट डेढ़ साल में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर: जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र द्वारा पोलोग्राउंड औद्योगिक क्षेत्र के प्रमुख स्थान पर बनाए जाने वाले औद्योगिक कांप्लेक्स का फेज-टू भी बनाया जाएगा। इसमें उद्योगपतियों और कारोबारियों के लिए छोटी-बड़ी करीब सौ यूनिट बनाकर दी जाएंगी। यह भवन छह मंजिला (तल मंजिल मिलाकर) होगा।
गौरतलब है कि शासन स्तर पर पोलोग्राउंड इस प्रोजेक्ट के साथ फेज वन में इसी तरह का एक अन्य छह मंजिला काम्प्लेक्स बनाने की तैयारी पहले ही शुरू हो गई है। पहले फेज के लिए 40 करोड़ रुपए पर मंजूर हो गए हैं। इसे डेढ़ साल में पूरा करने की योजना है। इस तरह दोनो फेज दो काम्प्लेक्स तैयार होने पर 200 नई औद्योगिक इकाईयों को पोलोग्राउंड में स्थान मिल सकेगा।
डेढ़ साल में तैयार होगा फेज वन
- पोलोग्राउंड में विभाग 3.83 एकड़ जमीन पर औद्योगिक कांप्लेक्स के पहले फेज की डीपीआर, डिजाइन आदि के टेंडर मप्र लघु उद्योग निगम द्वारा खुल गए है। जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र के अधिकारियों के अनुसार मप्र और अन्य प्रदेशों की कुल पांच एजेंसियों ने बनाने में रूचि दिखाई है। सभी टेंडर अंतिम जांच और मंजूरी के लिए भोपाल स्थित कार्यालय भेजे गए हैं।
- संभावना है कि एक से दो सप्ताह में अंतिम फैसला हो जाएगा। टेंडर पर फैसला होने के बाद निर्माण एजेंसी तय करने की कार्रवाई शुरू हो जाएगी। दोनों प्रोजेक्ट का खर्च मप्र राज्य और केंद्र सरकार मिलकर उठा रही हैं। पहले फेज के लिए 40 करोड़ रुपए पर मंजूर हो गए हैं। इसे डेढ़ साल में पूरा करने की योजना है।
फेज-टू भी होगा छह मंजिला
- अधिकारियों के अनुसार विभाग के पास इतनी बड़ी जमीन (करीब 15 हजार 500 वर्ग मीटर) है कि वहां औद्योगिक कांप्लेक्स का फेज-टू भी आसानी से लाया जा सकता है। परिसर के अंदर ड्रेनेज, पानी, पार्किंग, केंटीन जैसी मूलभूत सुविधाएं दो फेज के हिसाब से तैयार की जाएंगी, ताकि दूसरे फेज में सिर्फ भवन ही बनाना पड़े।
- दूसरे फेज का भवन भी कुल छह मंजिला ही बनेगा। हालांकि, इनमें बड़े उद्योग तो स्थापित नहीं हो पाएंगे, लेकिन स्टार्ट अप, पैकेजिंग, प्रिंटिंग जैसी छोटी-छोटी इकाइयाें के लिए दोनों भवन वरदान साबित होंगे। पहले फेज की कागजी कार्रवाई पूरी होने के बाद अब दूसरे की तैयारी शुरू हो जाएगी।
वर्षों बाद नए उद्योगों को मिला मौका
- पोलोग्राउंड औद्योगिक क्षेत्र को बने हुए करीब 64 साल हो गए है। यहां 250 से ज्यादा इकाइयां चल रही है, जिनमें फार्मास्युटिकल, पैकेजिंग, पेपर, इंजीनियरिंग, आप्टिक्स और आटोमोबाइल पार्ट्स के सर्वाधिक काम होता है। अनुमान के मुताबिक सालाना तीन हजार करोड़ का टर्नओवर होता है। करीब 10 हजार से ज्यादा लोगों काे रोजगार मिल रहा है। फिलहाल वहां अधिकांश उद्योग चालू है।
- इसके चलते जिला व्यापार एवं उद्योग केंद्र को नई जमीन नहीं मिल रही थी। किसी उद्योग को नियमों के उल्लघंन के चलते लीज निरस्ती का नोटिस भी दिया जाए तो उसके पास अपील के लिए भोपाल से लेकर कोर्ट तक कई प्लेटफार्म होते है। इससे विभाग को जमीन ही नहीं मिल पाती है। वर्षों के बाद ऐसा हो रहा है कि किसी उद्योग की जमीन विभाग को वापस मिली है और वो नए उद्योगों के लिए जगह बना पा रहा है।
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