प्रदेश के अलग-अलग थानों में पुलिस द्वारा की जा रही एफआईआर और विवेचना में स्पेशल एक्ट के प्रावधानों की गलत व्याख्या के चलते लीगल प्रोसेस प्रभावित हो रही है। इस तरह के मामले सामने आने के बाद पुलिस मुख्यालय ने सभी पुलिस आयुक्तों, पुलिस अधीक्षकों को विशेष अधिनियम वाले प्रावधानों में सटीक व्याख्या के आधार पर एफआईआर करने और विवेचना करने के निर्देश जारी किए हैं ताकि केस की लीगल स्थिति प्रभावित नहीं होने पाए। स्पेशल डीजी अपराध अनुसंधान विभाग पुलिस मुख्यालय ने स्पेशल एक्ट के अंतर्गत आने वाले अपराधों के पंजीयन, विवेचना और अभियोजन प्रक्रिया को लेकर डिटेल दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पीएचक्यू द्वारा जारी सर्कुलर में कहा गया है कि विधानसभा सत्र के दौरान उठे प्रश्नों और समीक्षा के बाद यह सामने आया है कि कई पुलिस थानों में विशेष अधिनियमों में चिन्हित अपराधों को “असंज्ञेय” या अन्य श्रेणी में मानते हुए भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) के संज्ञेय अपराधों के साथ जोड़कर प्रथम सूचना रिपोर्ट (एफआईआर) दर्ज की जा रही है। इससे कई मामलों में लीगल प्रोसेस प्रभावित हो रही है। बीएनएसएस के प्रावधान तभी लगेंगे जब स्पेशल एक्ट में चालान की अलग प्रोसेस तय न हो पुलिस मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 के अंतर्गत प्रावधानों का उपयोग तभी किया जाएगा, जब संबंधित विशेष अधिनियम में अभियोजन की अलग प्रक्रिया निर्धारित न हो। यदि किसी विशेष कानून में अपराध के पंजीयन, जांच या अभियोजन की स्पष्ट प्रक्रिया दी गई है, तो पुलिस को उसी प्रक्रिया के तहत कार्रवाई करना अनिवार्य होगा। आदेश में सभी पुलिस आयुक्त, पुलिस अधीक्षक, रेल पुलिस, एसटीएफ, साइबर इकाइयों और पुलिस मुख्यालय की शाखाओं को निर्देशित किया गया है कि विशेष अधिनियमों से जुड़े मामलों में अपराध पंजीयन करते समय संबंधित कानूनों का गंभीरता से अध्ययन करें और उसी के अनुरूप वैधानिक कार्रवाई करें, ताकि जांच और अभियोजन प्रक्रिया मजबूत, पारदर्शी और कानून सम्मत बनी रहे। इन अधिनियमों का दिया हवाला
#पलस #कर #रह #अपरध #क #गलत #ववचन #और #एफआईआर #सआईड #न #पलस #आयकत #एसप #क #कय #अलरट #लगल #परसस #क #सह #धयन #रखन #कह #Bhopal #News



Post Comment