शहर का भूगोल बदल गया, लेकिन पुलिस का नक्शा 20 साल पुराने कागजों में अटका है। नतीजा यह है कि तेजाजी नगर थाने से महज डेढ़ किमी दूर रहने वाली जनता की सुरक्षा का जिम्मा 20 किमी दूर बैठे खुड़ैल थाने पर है। यह दूरी सिर्फ किलोमीटर की नहीं है, बल्कि जान-माल की सुरक्षा के बीच का फासला है। हाल ही में बायपास पर हुई डकैती में जब तक पुलिस पहुंची, अपराधी शहर छोड़ चुके थे। भास्कर ने पड़ताल की तो सामने आया कि शहर की 10 लाख की नई आबादी इसी ‘बॉर्डर डिस्प्यूट’ के साये में जीने को मजबूर है। डकैती के 3 घंटे बाद पहुंची पुलिस, अपराधी हुए फरार
दो थानों की सीमाओं पर पुलिस गश्त नहीं होने से बाग-टांडा-देवास की कंजर गैंग के चोर-लुटेरों व अपराधियों को आने-जाने के सुरक्षित रास्ते मिल गए हैं। हाल ही में खुडैल थाना इलाके में एक कॉलोनी के बंगले में डकैती की घटना हुई। पास के थाने ने सीमा का हवाला दिया और खुडैल थाने की पुलिस को 20 किलोमीटर दूर से मौके पर पहुंचने में करीब तीन घंटे लग गए। रहवासियों का कहना है कि पुलिस के पहुंचने तक अपराधी आसानी से फरार हो चुके होते हैं। हल क्या… नया परिसीमन और बीट सिस्टम
भौगोलिक निकटता और नई आबादी को आधार बनाकर नए सिरे से परिसीमन हो।
– महालक्ष्मी नगर, पालदा सहित सभी प्रस्तावित थानों को शीघ्र मंजूरी दी जाए।
– सीमा विवाद को खत्म कर पूरे क्षेत्र में पुलिस के ‘बीट सिस्टम’ को दोबारा पुनर्गठित करें।
(शहर के रिटायर्ड पुलिस अफसरों और सुरक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक) अपराधियों के लिए ‘सेफ जोन’ बना यह
गश्त नहीं: सीमाओं पर पुलिस गश्त नहीं करती। कंजर गैंग और बाहरी अपराधी इसका फायदा उठा रहे हैं। रिस्पॉन्स टाइम फेल: 20 किमी से पुलिस 30-40 मिनट में पहुंच रही, तब तक अपराधी फरार हो रहे। सिस्टम का बहाना: वारदात होने पर पीड़ित पास के थाने जाता है, तो उसे ‘क्षेत्राधिकार’ बताकर लौटा देते हैं। एक ही जोन, लेकिन अलग-अलग एसीपी
स्थिति तब और जटिल हो जाती है जब एक ही जोन में आने वाली कॉलोनियों में अलग-अलग एसीपी का नियंत्रण होता है, जिससे पुलिस की जवाबदेही तय करना मुश्किल हो रहा है। जुआ चलता रहा, पर पुलिस नहीं दे सकी दबिश
बाणगंगा थाने से पालिया सिर्फ 7 किमी दूर है, लेकिन वहां लगने वाला हातोद थाना 15 किमी दूर है। कुछ समय पहले इस इलाके में बड़े स्तर पर जुआ चला, लेकिन सीमा की बाधा होने के कारण इंदौर पुलिस दबिश नहीं दे पाई। ऐसे ही खुडैल थाना क्षेत्र के पास देवास जिले की सीमा पर बड़े स्तर पर जुआ चला, लेकिन दूसरा जिला होने से पुलिस की कोई कार्रवाई ही नहीं हुई। भोपाल में अटकी थानों की फाइल
शहर का विस्तार बायपास, सुपर कॉरिडोर, उज्जैन रोड और राऊ-पीथमपुर क्षेत्र में तेजी से हुआ है। इन इलाकों में 8 से 10 लाख की नई आबादी बस चुकी है, फिर भी सीमाएं पुराने भूगोल पर तय हैं। महालक्ष्मी नगर, भागीरथपुरा, धार रोड और पालदा में नए थाने प्रस्तावित हैं, लेकिन इनकी फाइलें अब तक भोपाल में मंजूरी का इंतजार कर रही हैं।
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