बेंगलुरु के नेलामंगला स्थित करीब 4500 फीट ऊंची शिवगंगे पहाड़ियों में ट्रेकिंग के दौरान लापता हुए इंदौर के 31 वर्षीय अद्वैत उपाध्याय की तलाश लगातार जारी है। छठे दिन भी अद्वैत का कोई पता नहीं चल सका। बुधवार को SDRF समेत पुलिस और फायर ब्रिगेड की कई टीमों ने पहाड़ी के अलग-अलग हिस्सों में सर्च ऑपरेशन चलाया। गुरुवार को भी तलाश शुरू कर दी गई है। अब पुलिस ड्रोन के जरिए पहाड़ी के उन हिस्सों को भी खंगाल रही है, जहां रेस्क्यू टीमों का सीधे पहुंचना मुश्किल है। चप्पे-चप्पे की निगरानी कर यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कहीं अद्वैत किसी दुर्गम हिस्से में फंसा तो नहीं है। DSP उमा रानी के साथ कई टीमें अद्वैत की तलाश और मामले की जांच में जुटी हैं। दूसरी ओर, बेंगलुरु पुलिस ने रेस्क्यू ऑपरेशन के साथ जांच का दायरा भी बढ़ा दिया है। शांताला ड्रॉप के पास अद्वैत का मोबाइल और ड्रोन मिलने के बाद पुलिस उसकी मोबाइल लोकेशन, कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR), SIM कनेक्शन, मंगेतर और महिला मित्रों से संपर्क के साथ ड्रोन की खरीद से जुड़ी जानकारी जुटा रही है। पुलिस तकनीकी और परिस्थितिजन्य साक्ष्यों को जोड़कर अद्वैत के लापता होने से पहले और बाद की पूरी टाइमलाइन तैयार कर रही है। मोबाइल मिला, अब दूसरे SIM कनेक्शन की भी जांच अद्वैत का मोबाइल शांताला ड्रॉप के पास मिला है। पुलिस मोबाइल की लोकेशन, कॉल डिटेल और उसमें मौजूद डिजिटल गतिविधियों की जांच कर रही है। इसके साथ ही टेलीकॉम कंपनियों से यह जानकारी भी जुटाई जा रही है कि अद्वैत के नाम पर इस SIM के अलावा कोई दूसरा SIM जारी हुआ था या नहीं। पुलिस यह भी जांच रही है कि उसके नाम पर किसी दूसरे नंबर का कनेक्शन तो नहीं था या किसी अन्य व्यक्ति के नाम से जारी SIM का इस्तेमाल अद्वैत कर रहा था। इस पड़ताल का उद्देश्य उन संपर्कों तक पहुंचना है, जिनकी जानकारी फिलहाल सामने नहीं आई है। 6 और 7 अगस्त की कॉल डिटेल की जांच जांच में अद्वैत की 6 और 7 अगस्त की कॉल डिटेल को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। पुलिस यह पता कर रही है कि इन दो दिनों में उसने मंगेतर के अलावा किन लोगों से बातचीत की थी। मंगेतर के साथ उसके अन्य महिला मित्रों और परिचितों से हुए संपर्कों की भी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस यह समझने की कोशिश कर रही है कि लापता होने से पहले अद्वैत किन लोगों के संपर्क में था और क्या उसकी बातचीत से उसकी मानसिक स्थिति, किसी विवाद या पहाड़ी पर जाने की वजह से जुड़ी कोई कड़ी मिलती है। फिलहाल पुलिस ने किसी व्यक्ति को संदिग्ध नहीं बताया है और न ही किसी विवाद की पुष्टि हुई है। ये सभी बिंदु जांच का हिस्सा हैं। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि अद्वैत के गायब होने के बाद उसे किन-किन लोगों ने फोन किया था। ड्रोन मिला तो अब खरीद का रिकॉर्ड तलाश रही पुलिस अद्वैत का ड्रोन भी शांताला ड्रॉप के पास मिला है। अब पुलिस सिर्फ ड्रोन के मिलने की जगह तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पता लगाने में जुटी है कि ड्रोन कब, कहां से और किसके साथ खरीदा गया था। इसके लिए ड्रोन बनाने वाली कंपनी के स्थानीय डीलर और बिक्री से जुड़े लोगों से जानकारी ली जा रही है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि ड्रोन की खरीद किस तारीख को हुई, भुगतान किस माध्यम से किया गया और उसे खरीदते समय अद्वैत के साथ कौन था। ड्रोन की तकनीकी जानकारी से यह भी पता लगाने की कोशिश होगी कि उसने आखिरी बार कब उड़ान भरी थी और क्या उसके स्टोरेज में कोई फोटो या वीडियो मौजूद है। 4500 फीट ऊंची पहाड़ी पर ड्रोन से सर्च, दुर्गम हिस्सों पर नजर शिवगंगे पहाड़ी का इलाका पथरीला और बेहद ऊबड़-खाबड़ है। कई हिस्सों में खड़ी चट्टानें और संकरे रास्ते हैं। बारिश के कारण फिसलन ने रेस्क्यू टीमों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। SDRF समेत पुलिस और फायर ब्रिगेड की टीमें अलग-अलग हिस्सों में तलाशी कर रही हैं। ड्रोन की मदद से ऊपर से पहाड़ी के उन हिस्सों को देखा जा रहा है, जहां जमीन से पहुंचना मुश्किल है। शांताला ड्रॉप और उसके आसपास के इलाके पर विशेष नजर रखी जा रही है, क्योंकि यहीं अद्वैत का मोबाइल और ड्रोन मिला था। इससे पहले इसी क्षेत्र के पास उसका बैग और स्वेटर भी मिला था। 4 अगस्त की सर्च हिस्ट्री ने भी बढ़ाए सवाल पुलिस की जांच में यह भी सामने आया है कि अद्वैत की डिजिटल गतिविधियों से उसके 4 अगस्त को ही शिवगंगे पहाड़ी पहुंचने के संकेत मिले हैं। जबकि उसकी मंगेतर की शिकायत के मुताबिक, वह 7 अगस्त की सुबह ट्रेकिंग के लिए निकला था। अब पुलिस 4 से 7 अगस्त के बीच उसकी पूरी गतिविधि खंगाल रही है। सवाल यह है कि यदि वह 4 अगस्त को ही पहाड़ी गया था तो तीन दिन बाद 7 अगस्त को दोबारा वहां जाने की वजह क्या थी? लैपटॉप में पहाड़ी की ऊंचाई और गिरने के बाद की स्थिति सर्च की अद्वैत के लैपटॉप की सर्च हिस्ट्री में शिवगंगे पहाड़ी की ऊंचाई, शांताला ड्रॉप तक पहुंचने के रास्ते और अलग-अलग ट्रैकिंग रूट से जुड़ी जानकारी मिली है। पुलिस के मुताबिक, AI टूल पर पहाड़ी से गिरने के बाद इंसान कितनी देर तक जीवित रह सकता है और ऐसी स्थिति में शरीर पर क्या प्रभाव पड़ता है, इससे जुड़ी जानकारी भी सर्च की गई थी। पुलिस इसे खुद को नुकसान पहुंचाने की आशंका के एक संभावित एंगल के तौर पर देख रही है। हालांकि पुलिस का कहना है कि सिर्फ सर्च हिस्ट्री के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचना संभव नहीं है। इसे मोबाइल, CDR, CCTV और अन्य परिस्थितिजन्य साक्ष्यों से मिलाया जा रहा है। मंगेतर से आखिरी बातचीत, फिर फोन बंद अद्वैत की मंगेतर ने 7 अगस्त की रात करीब 8 बजे व्हाइटफील्ड सब-डिवीजन के कडुगोडी पुलिस थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। शिकायत के मुताबिक, 7 अगस्त की सुबह करीब 7:30 बजे अद्वैत ने फोन कर बताया था कि वह शिवगंगे पहाड़ी पर ट्रेकिंग के लिए जा रहा है। इसके बाद वह वापस नहीं लौटा। फोन करने पर उससे संपर्क नहीं हो सका। शुरुआत में कडुगोडी पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज की थी, जिसके बाद मामला नेलामंगला पुलिस को रेफर किया गया। मां और रिश्तेदार चिंतित, मीडिया से बात करने की स्थिति में नहीं अद्वैत परिवार का इकलौता बेटा है। उसके पिता प्रोफेसर प्रमोद उपाध्याय की 2016 में हार्ट अटैक से मौत हो गई थी। इसके बाद उसकी मां को अकाउंट विभाग में अनुकंपा नियुक्ति मिली थी। कुछ समय पहले उन्होंने VRS लिया है। फिलहाल वह इंदौर में अकेली रहती हैं। अद्वैत लंबे समय से बेंगलुरु में रहकर फाइनेंस कंपनी में इंजीनियर के रूप में काम कर रहा था। इससे पहले वह सॉफ्टवेयर प्रोफेशनल के रूप में भी काम कर चुका है। बेटे के लगातार नहीं मिलने से मां और रिश्तेदार बेहद चिंतित हैं। परिवार फिलहाल मीडिया से बात करने की स्थिति में नहीं है। उनकी उम्मीद अब रेस्क्यू टीमों की तलाश और पुलिस की जांच पर टिकी है। मंगेतर ने भी पक्ष देने से इनकार किया मामले में ‘दैनिक भास्कर’ ने अद्वैत की मंगेतर से संपर्क कर उनका पक्ष जानने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने इस मामले में कोई पक्ष देने से इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि इस संबंध में बेंगलुरु पुलिस से ही बात की जाए। पुलिस उनकी ओर से दर्ज कराई गई गुमशुदगी रिपोर्ट और उपलब्ध अन्य जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ा रही है। विजयवर्गीय ने परिवार से बात कर दिया भरोसा अद्वैत के लगातार नहीं मिलने की जानकारी के बाद मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी परिवार से बात कर चिंता जताई। उन्होंने परिवार को भरोसा दिलाया कि वे बेंगलुरु पुलिस से बात करेंगे और अद्वैत की तलाश को लेकर आवश्यक समन्वय का प्रयास करेंगे। इधर, इंदौर क्राइम ब्रांच भी बेंगलुरु पुलिस के संपर्क में है। अद्वैत के परिवार और इंदौर में उसके संपर्कों से जुड़ी जानकारी जांच एजेंसियों के बीच साझा की जा रही है। फिलहाल इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए एक तरफ 4500 फीट ऊंची शिवगंगे पहाड़ी का चप्पा-चप्पा ड्रोन और रेस्क्यू टीमों से खंगाला जा रहा है, तो दूसरी तरफ पुलिस मोबाइल, SIM, CDR, डिजिटल सर्च और ड्रोन की खरीद तक की कड़ियां जोड़ रही है। अद्वैत के नहीं मिलने के साथ सामने आ रही हर नई जानकारी जांच को एक नई दिशा दे रही है।
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