धार भोजशाला मामले में आए हाईकोर्ट के फैसले को लेकर महाधिवक्ता प्रशांत सिंह ने कहा कि इसके लिए विभिन्न प्रकार की याचिकाएं उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ के समक्ष दायर की गई थीं। सभी पक्षों ने अपनी-अपनी धार्मिक आस्थाओं और मान्यताओं के आधार पर अनुच्छेद 2
.
वहां धार्मिक गतिविधियों की अनुमति देने की प्रार्थना की थी। इस मामले में पूर्व में ही उच्च न्यायालय ने आर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) को पूरे परिसर का विशेषज्ञों के माध्यम से सर्वे कराने के निर्देश दिए थे। सर्वे रिपोर्ट रिकॉर्ड पर आई, जिसकी फाइंडिंग्स का न्यायालय ने विस्तृत परीक्षण किया।
सरकार निर्णय को जीत-हार की तरह नहीं देखती
उन्होंने कहा कि देश की सर्वोच्च न्यायालय के निर्देशों के तहत 6 अप्रैल 2026 से इस मामले की लगातार सुनवाई चल रही थी। सभी पक्षों के वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपने-अपने तर्क न्यायालय के समक्ष रखे। आज न्यायाधीश विजय शुक्ला ने आदेश का प्रासंगिक हिस्सा पढ़कर सुनाया। न्यायालय ने माना कि भोजशाला भवन एक पुरातात्विक एवं संरक्षित स्मारक है, जिसे “Archaeological Sites and Remains Act, 1958” के तहत संरक्षित माना गया है। साथ ही न्यायालय ने सर्वे रिपोर्ट, ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, विधिक और संवैधानिक पक्षों का परीक्षण करते हुए यह फाइंडिंग दी कि भोजशाला भवन का धार्मिक चरित्र मां वाग्देवी सरस्वती जी के मंदिर का है।
न्यायालय ने दूसरे पक्ष के लिए भी व्यवस्था दी है कि यदि वे अपनी धार्मिक मान्यताओं के अनुरूप किसी धार्मिक भवन के निर्माण हेतु भूमि आवंटन चाहते हैं, तो राज्य सरकार के समक्ष आवेदन प्रस्तुत कर सकते हैं, जिस पर विधिसम्मत निर्णय लिया जाएगा। इसके अलावा, मां वाग्देवी सरस्वती जी की लंदन के संग्रहालय में रखी प्रतिमा को वापस भारत लाने संबंधी अभ्यावेदन पर भी न्यायालय ने कहा कि मामला केंद्र सरकार के विचाराधीन है और इस पर वैधानिक निर्णय लिया जाएगा।
दूसरे पक्ष के पास सुप्रीम कोर्ट जाने का अधिकार
महाधिवक्ता ने कहा कि राज्य शासन की ओर से कहा गया कि सरकार इस निर्णय को जीत या हार के रूप में नहीं देखती, बल्कि प्रदेश में शांति, सौहार्द और सामंजस्य बनाए रखना उसकी प्राथमिकता है। लंबे समय से वहां भारी पुलिस बल की तैनाती करनी पड़ती थी और कई बार तनावपूर्ण स्थितियां भी बनीं। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से प्रदेश में सामाजिक समरसता मजबूत होगी और विकास का वातावरण बेहतर बनेगा। वहीं यदि किसी पक्ष को निर्णय से असहमति है, तो संविधान के तहत उन्हें सर्वोच्च न्यायालय जाने का अधिकार है, जहां राज्य शासन भी अपना पक्ष रखेगा।
यह है पूरा मामला
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने धार की भोजशाला को वाग्देवी मंदिर माना है। शुक्रवार को दिए फैसले में हाईकोर्ट ने कहा- हमने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई की सर्वे रिपोर्ट पर विचार किया है। ASI एक्ट के प्रावधानों के साथ-साथ अयोध्या मामले को भी आधार माना। न्यूज वेबसाइट बार एंड बेंच के मुताबिक, हाईकोर्ट ने कहा- ऐतिहासिक और संरक्षित जगह देवी सरस्वती का मंदिर है। केंद्र सरकार और ASI यह फैसला लें कि भोजशाला मंदिर का मैनेजमेंट कैसा रहेगा।
अदालत ने ASI का 2003 का वह आदेश भी रद्द कर दिया, जिसमें ASI ने भोजशाला में हिंदुओं को पूजा का अधिकार नहीं दिया था। उस आदेश को भी खारिज कर दिया, जिसमें मुस्लिमों को नमाज पढ़ने का अधिकार दिया गया था। भोजशाला को कमाल मौला मस्जिद बताते रहे मुस्लिम पक्ष को कोर्ट ने सरकार से मस्जिद के लिए अलग जमीन मांगने को कहा है।
हाईकोर्ट के फैसले के पॉइंट्स
- हाईकोर्ट ने कहा कि भोजशाला में सरस्वती मंदिर और संस्कृत शिक्षा केंद्र के साक्ष्य पाए गए हैं।
- कोर्ट ने पुरातात्विक और ऐतिहासिक तथ्यों, एएसआई सर्वे के साथ अयोध्या केस को भी आधार माना।
- कोर्ट ने कहा- हर सरकार की जिम्मेदारी है कि वह ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व वाले प्राचीन स्मारकों और मंदिरों की सुरक्षा निश्चित करे। साथ ही गर्भगृह और धार्मिक आस्था से जुड़ी देव प्रतिमाओं का भी संरक्षण करे।
सुप्रीम कोर्ट जाएगा मुस्लिम पक्ष
धार शहर काजी वकार सादिक ने कहा है कि हाईकोर्ट के फैसले का सम्मान है। सलमान खुर्शीद साहब और शोभा मेनन ने तथ्य रखे थे। हम फैसले की समीक्षा करेंगे। इसके बाद हम सुप्रीम कोर्ट जाएंगे।
फिलहाल, भोजशाला के मेन गेट पर बैरिकेड्स लगाकर इसे बंद कर दिया गया है। इसके बाहर बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात है।
सुनवाई के दौरान किसने क्या तर्क दिए


2022 में दायर हुई थी याचिका
यह मामला 2022 में शुरू हुआ, जब रंजना अग्निहोत्री और अन्य ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की ओर से हाईकोर्ट में याचिका दायर कर भोजशाला का धार्मिक स्वरूप तय करने और हिंदू समाज को पूर्ण अधिकार देने की मांग की।
याचिका में नियमित पूजा-अर्चना का अधिकार, परिसर में नमाज पर रोक, ट्रस्ट गठन और ब्रिटिश म्यूजियम में रखी मां वाग्देवी की प्रतिमा वापस लाने जैसी मांगें शामिल हैं।
ASI ने किया था 98 दिन का वैज्ञानिक सर्वे
2024 में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) ने भोजशाला परिसर का 98 दिन तक वैज्ञानिक सर्वे किया था। इसके बाद 23 जनवरी 2026 को वसंत पंचमी पर सुप्रीम कोर्ट ने दिनभर निर्बाध पूजा-अर्चना की अनुमति दी। हाईकोर्ट में 6 अप्रैल से नियमित सुनवाई शुरू हुई, जो 12 मई तक चली।
हिंदू पक्ष ने मंदिर होने के दिए तर्क
हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ताओं ने भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर और प्राचीन विद्या केंद्र बताते हुए ऐतिहासिक दस्तावेज, ASI सर्वे, शिलालेख, स्थापत्य अवशेष और वसंत पंचमी पर पूजा की परंपरा का हवाला दिया। अधिवक्ता मनीष गुप्ता ने परमार राजा भोज के ग्रंथ समरांगण सूत्रधार का उल्लेख करते हुए कहा कि भोजशाला की संरचना उसमें वर्णित मंदिर निर्माण मानकों से मेल खाती है।



#भजशल #फसल #पर #महधवकत #बल #सरकर #इसम #जतहर #नह #दखत #हईकरट #न #मन #भजशल #भवन #एक #परततवक #एव #सरकषत #समरक #दसर #पकष #क #लए #भ #वयवसथ #Jabalpur #News



Post Comment