माली से बड़ी खबर सामने आई है। देश भर में हुए सिलसिलेवार हमले में माली के रक्षा मंत्री जनरल सादियो कैमारा की मौत हो गई है। अल जजीरा की रिपोर्ट के अनुसार, सैन्य सूत्रों ने इस खबर की पुष्टि की है। जनरल कैमारा की मौत को माली की वर्तमान सैन्य सरकार के लिए बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है।
हमले की पूरी कहानी
एक दिन पहले काती स्थित उनके आवास को निशाना बनाया गया था। काती एक महत्वपूर्ण सैन्य छावनी वाला शहर है। अल-कायदा से जुड़े एक गुट और तुआरेग विद्रोहियों ने मिलकर देश के कई सैन्य ठिकानों पर एक साथ हमला बोला था। जनरल सादियो कैमारा माली की सैन्य सरकार के सबसे प्रभावशाली स्तंभ थे। उन्होंने वर्ष 2020 और 2021 में तख्तापलट के जरिए सत्ता हासिल की थी। कैमारा न केवल एक शक्तिशाली मंत्री थे, बल्कि उन्हें भविष्य के संभावित राष्ट्रपति के तौर पर भी देखा जा रहा था। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, उनकी मौत देश की सेना के लिए एक बहुत बड़ा आघात है।
अति-सुरक्षित इलाके में सुरक्षा में चूक
हैरानी की बात यह है कि यह हमला काती में हुआ, जिसे माली का सबसे सुरक्षित इलाका माना जाता है। यह राजधानी बमाको से मात्र 15 किलोमीटर दूर है। इसी शहर में अंतरिम राष्ट्रपति असिमी गोइता भी रहते हैं। हमलावरों ने कैमारा के आवास पर आत्मघाती कार बम का इस्तेमाल किया।
इस हमले की जिम्मेदारी संयुक्त रूप से अल-कायदा से जुड़े जमात नुसरत अल-इस्लाम वल-मुस्लिमीन (जेएनआईएम) और तुआरेग विद्रोहियों के अजावाद लिबरेशन फ्रंट (एफएलए) ने ली है। राहत की बात यह रही कि राष्ट्रपति असिमी गोइता पूरी तरह सुरक्षित हैं। हमले के तुरंत बाद उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाया गया, जहां से वे वर्तमान में सेना की कमान संभाल रहे हैं।
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पिछले साल दोनों गुटों के बीच हुआ था समझौता
आतंकियों ने केवल काती को ही नहीं, बल्कि बमाको, गाओ, किदाल और सेवाने सहित कई अन्य स्थानों को भी निशाना बनाया। रविवार को भी उत्तरी किदाल में भारी गोलीबारी और धमाकों की आवाजें सुनी गईं। सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि यह ऑपरेशन काफी लंबा खिंच रहा है। आने वाले दिनों में रणनीतिक ठिकानों पर नियंत्रण के लिए और भी भीषण जंग देखने को मिल सकती है।
वहीं, दो अलग-अलग विचारधारा वाले समूह जेएनआईएम औरएफएलए कभी आपस में लड़ते थे, अब माली सरकार के खिलाफ एकजुट हो गए हैं। अल जजीरा ने विश्लेषक बुलामा बुखार्ती के हवाले से बताया है कि पिछले साल इन दोनों गुटों के बीच एक समझौता हुआ था। हालिया हमले उसी खतरनाक गठबंधन का नतीजा हैं।
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