नरेंद्र मोदी सरकार के 12 साल पूरे होने के अवसर पर राजनीतिक गलियारों से एक बड़ी खबर आ रही है। सूत्रों के मुताबिक, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) सरकार लोकसभा में आवश्यक बहुमत जुटाने की संभावनाओं को तलाश रही है ताकि संविधान (131वां संशोधन) विधेयक यानी परिसीमन विधेयक 2026 (Delimitation Bill, 2026) को जल्द से जल्द पास कराया जा सके। माना जा रहा है कि सरकार इस बेहद महत्वपूर्ण विधेयक को पारित कराने के लिए जुलाई के दूसरे सप्ताह में शुरू होने वाले आगामी मॉनसून सत्र से पहले ही संसद का एक विशेष सत्र बुला सकती है।
भाजपा के एक वरिष्ठ पदाधिकारी ने मीडिया के साथ बातचीत के दौरान इस बात के संकेत दिए हैं। उन्होंने कहा, “अगर हमें सदन में आवश्यक बहुमत मिल जाता है तो हम परिसीमन विधेयक को पारित करने के लिए संसद का विशेष सत्र बुलाएंगे।” इसके साथ ही उन्होंने एक बड़ा राजनीतिक संकेत देते हुए कहा कि यदि विपक्ष मांग करता है तो सरकार विधेयक में 50% से जुड़े नियमों को शामिल करने पर भी सहमत हो सकती है।
पदाधिकारी ने उन अफवाहों और चिंताओं को भी खारिज किया जिसमें कानून में बड़े बदलाव की बात कही जा रही थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि परिसीमन आयोग अधिनियम (Delimitation Commission Act) में कोई बदलाव प्रस्तावित नहीं किया जा रहा है और मौजूदा कानूनी ढांचा पूरी तरह से बरकरार रहेगा। उन्होंने कहा, “जो कोई भी भ्रम पैदा कर रहा है, वह इस विधेयक के वास्तविक इरादे से अनजान है।”
क्या है सीटों का नया फॉर्मूला?
एक अन्य आधिकारिक सूत्र ने विधेयक के तकनीकी और गणितीय आधार को समझाते हुए बताया कि यह परिसीमन विधेयक समानुपातिक विस्तार दृष्टिकोण पर आधारित है। देश के सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के बीच मौजूदा राजनीतिक संतुलन और अनुपात को बनाए रखने के लिए सभी सीटों में समान रूप से 50% की वृद्धि की जाएगी।
यदि इस 50% बढ़ोतरी के सिद्धांत को लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों पर लागू किया जाता है तो कुल सीटों की संख्या बढ़कर लगभग 815 हो जाएगी। इसी भविष्य की संभावना को देखते हुए लोकसभा में सीटों की अधिकतम सीमा को मौजूदा 550 सीटों से बढ़ाकर अब 850 करने का प्रावधान इस विधेयक में किया गया है।
सूत्रों ने उन चिंताओं और दावों को भी सिरे से खारिज कर दिया जिसमें कहा जा रहा था कि इस नए परिसीमन अभ्यास से छोटे राज्यों या दक्षिण भारत के राज्यों के प्रतिनिधित्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। सरकार का दावा है कि समानुपातिक विस्तार के कारण किसी भी राज्य का हिस्सा कम नहीं होगा।
इस संविधान संशोधन विधेयक को पारित कराना सरकार के लिए एक बड़ी कूटनीतिक और राजनीतिक चुनौती है, क्योंकि इसके लिए विशेष बहुमत की आवश्यकता होती है। लोकसभा की वर्तमान ताकत 540 है। विधेयक पारित कराने के लिए दो तिहाई बहुमत की आवश्यक्ता होगी, जो कि 360 है। सत्तारूढ़ एनडीए की वर्तमान ताकत 293 सांसदों की है। जरूरी 360 के आंकड़े से 67 सीटें कम है। इसलिए सरकार को इस ऐतिहासिक विधेयक को कानून का रूप देने के लिए अन्य विपक्षी या क्षेत्रीय दलों के समर्थन की सख्त जरूरत होगी। यही कारण है कि सरकार पर्दे के पीछे से आम सहमति बनाने और बहुमत जुटाने के प्रयासों में तेजी से जुट गई है। टीएमसी में जारी बगावत के बाद इसे और बल मिला है।
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