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‘साहब पानी दिलवा दो जनता मर जाएगी…’, पुलिस अफसरों के पैरों में लोटकर बोले पार्षद, इंदौर में पानी के लिए मचा हाहाकार

‘साहब पानी दिलवा दो जनता मर जाएगी…’, पुलिस अफसरों के पैरों में लोटकर बोले पार्षद, इंदौर में पानी के लिए मचा हाहाकार

नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सूरज के तीखे तेवर और भीषण गर्मी के बीच शहर में जलसंकट गहरा गया है। हालत यह है कि आक्रोशित जनता अब सड़क पर उतरकर प्रदर्शन कर रही है। शहर के अलग-अलग चौराहों पर कांग्रेस पार्षदों के नेतृत्व में रहवासियों ने उग्र प्रदर्शन और चक्काजाम किया। पालदा क्षेत्र में तो कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी पुलिस अधिकारियों के पैर में गिरकर पानी की मांग करने लगे। वे जमीन पर दंडवत होकर रेंगते हुए अधिकारियों तक पहुंचे और बोले “सर पानी नहीं है, पानी दिलवा दो… जनता मर जाएगी।”

जगह-जगह हुए प्रदर्शन और चक्काजाम की वजह से शहर की रफ्तार थम गई। तपती धूप में यात्रियों को परेशान होना पड़ा। निगम और पुलिस के अधिकारियों के आश्वासन के बाद धरना समाप्त हुआ और स्थिति सामान्य हो सकी।

जल संकट का सही आकलन नहीं किया

दरअसल, नगर निगम के अधिकारियों ने जल संकट का सही आंकलन ही नहीं किया था। प्रतिवर्ष अप्रैल के पहले पखवाड़े में ही जल संकट से निपटने की तैयारी शुरू हो जाती है, लेकिन इस वर्ष ऐसा नहीं हुआ। इस वर्ष 15 मई तक जिम्मेदार आंख मूंदें सोते रहे। सूरज के तीखे तेवर ने जब शहर के ज्यादातर बोरिंग सूखा दिए तब जिम्मेदारों की नींद खुली। समय रहते जल संकट से निपटने के प्रयास तेज कर दिए जाते तो हालात इतना भयावह नहीं होते जितने हो गए हैं।

सड़क पर बैठ गए, किया चक्काजाम

पानी की किल्लत के चलते शहर के दो अलग-अलग क्षेत्रों में रविवार सुबह ही जनता ने मोर्चा खोल दिया था। पालदा चौराहा पर कांग्रेस पार्षद कुणाल सोनी के नेतृत्व में वार्ड 75 और 64 के रहवासी धरने पर बैठे थे। इधर सुखलिया चौराहा पर पार्षद राजू भदौरिया के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ता और रहवासियों ने मौर्चा खोल दिया। इन दोनों चौराहों पर चक्काजाम होने से वाहनों की लंबी-लंबी कतारें नजर आने लगी। देर तक स्थिति असमान्य बनी रही। बाद में निगम और पुलिस के अधिकारियों ने समझाइश दी जिसके बाद स्थिति सामान्य हो सकी।

खाली बर्तन लेकर पहुंचे लोग

प्रदर्शन के दौरान रहवासी खाली बर्तन लेकर पहुंचे थे। वे नगर निगम और महापौर पुष्यमित्र भार्गव के विरुद्ध नारेबाजी कर रहे थे। सुखलिया में लोगों ने आरोप लगाया कि जलवितरण की जो व्यवस्था पहले से चल रही थी उसे भी बंद कर दिया गया है। इसके चलते बस्तियों में मध्यमवर्गीय परिवारों के सामने पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। बस्तियों के लोग पानी खरीद नहीं सकते।

पार्षद ने पुलिस अधिकारियों के पैरों में लगाई लोट

पालदा चौराहा पर प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस पार्षद कुणाल सोलंकी ने पुलिस अधिकारियों के पैरों में लोट लगा दी। वे अधिकारियों के पैर पकड़ककर बोले की साहब पानी नहीं है। आप तो पानी दिलवा दो। उन्होंने पुलिस अधिकारियों के पैरों में मटके रखे और उनके पैर पकड़ लिए। अधिकारियों ने जैसे-तैसे पैर छुड़ाए। प्रदर्शनकारियों ने बताया कि क्षेत्र में पानी सप्लाई, टैंकर व्यवस्था और नर्मदा लाइन को लेकर अधिकारियों ने समाधान का भरोसा दिया है। इसके बाद लोगों ने सड़क से हटकर आंदोलन खत्म कर दिया।

पानी को लेकर लगातार हो रहे हैं प्रदर्शन

पानी की किल्लत की वजह से शहर में पिछले लगभग एक पखवाड़े से लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं। कांग्रेस ही नहीं भाजपा के पार्षद और विधायक भी जल वितरण व्यवस्था को लेकर असंतोष जता चुके हैं। विधायक महेंद्र हार्डिया ने नगर निगम पर असमान पानी वितरण का आरोप लगाते हुए धमकी दी थी कि स्थिति नहीं सुधरी तो वे महापौर के घर के बाहर धरना देंगे। एक दिन पहले ही वार्ड 26 के रहवासी भाजपा पार्षद लालबहादुर वर्मा के साथ मिलकर पानी दो पानी दो के नारे लगाते हुए विधायक रमेश मेंदोला के घर पहुंच गए थे।

निश्शुल्क पानी नहीं देने का आरोप भी लगाया

कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि जलसंकट को देखते हुए पार्टी के कुछ नेता अपनी जेब से टैंकर खरीदकर पानी वितरित करवा रहे थे, लेकिन नगर निगम ने अब इन टैंकरों को पानी देना बंद कर दिया है। इसके चलते अब संकट और गहरा गया है।

अप्रैल में तैयार हो जाना थी कार्ययोजना, मई के मध्य तक सोता रहा निगम

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार निगम ने समस्या का आंकलन करने में ही गड़बड़ी कर दी है। मार्च के मध्य से संकट से लड़ने की तैयारी शुरू हो जाती है। अप्रैल में तो संभावित जलसंकट को देखते हुए कार्ययोजना तैयार होकर मूर्त रूप लेने लगती है, लेकिन इस बार ऐसा नहीं हुआ। मौसम विभाग ने महीनों भीषण गर्मी की चेतावनी दे दी थी, बावजूद इसके निगम के अधिकारी आंख मूंदे बैठे रहे। मई के मध्य में जब जलसंकट गहराने लगा तो नींद खुली, लेकिन तब तक शहर के ज्यादातर बोरिंग सूख चुके थे।

25 हजार से ज्यादा बोरिंग सूख गए

शहर के 30 प्रतिशत हिस्से में अब भी नर्मदा लाइन नहीं है। इन क्षेत्रों में आज भी पानी का एकमात्र स्रोत्र बोरिंग ही हैं। धूप की त्रीवता के चलते हर बार मई के अंत तक दम भरने वाले बोरिंग अप्रैल में ही दम तोड़ गए। यही वजह है कि ये क्षेत्र जो पानी के मामले में आत्मनिर्भर थे पूरी तरह से निगम के टैंकरों पर आश्रित हो गए।

कांग्रेस ने फिर दी चेतावनी, हालत नहीं सुधरे तो करेंगे आंदोलन

जल संकट को लेकर निगम के 22 जोन में प्रदर्शन करने वाली कांग्रेस ने एक बार फिर चेतावनी दी है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि अगले कुछ दिन में टैंकरों की संख्या नहीं बढ़ी और जल संकट का स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो पार्टी रहवासियों के साथ मिलकर शहरव्यापी उग्र आंदोलन करेगी।

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ये हैं इंदौर में गंभीर जल संकट के कारण

  • शहर के 30 प्रतिशत हिस्से में अब भी नर्मदा लाइन नहीं है, ये क्षेत्र पूरी तरह से बोरिंग पर निर्भर हैं। बोरिंग सूखने से अब टैंकरों पर निर्भर हैं।
  • पिछले 13 वर्ष में नर्मदा का पानी बढ़ाने के लिए कोई कदम नहीं उठाए गए
  • जलसंकट से निपटने के लिए अप्रैल में तैयार की जाने वाली योजना मई के मध्य तक तैयार नहीं की गई।
  • मौसम विभाग की चेतावनी को गंभीरता से नहीं लिया, पूर्व से कोई तैयारी नहीं की
  • समय रहते नए बोरिंग नहीं करवाएं, हाईड्रेंट के लिए वैकल्पिक स्थान नहीं तलाशे

विवाद की स्थिति भी बनी

धरना प्रदर्शन के दौरान पालदा चौराहा पर विवाद की स्थिति भी बनी। दरअसल लंबे जाम की वजह से परेशान कुछ बस ड्रायवरों ने बस निकालने का प्रयास किया। प्रदर्शनकारियों ने इसका विरोध किया जिसके बाद स्थिति बिगड़ गई। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति नियंत्रित की।

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