बाल विवाह रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों और कॉलोनियों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए, लेकिन इसके बावज …और पढ़ें
HighLights
- 13 साल की बच्ची की 42 के आदमी से हो रही थी शादी
- ऐन वक्त पर पहुंची टीम ने आधा दर्जन बाल विवाह रोके
- सामूहिक विवाह आयोजनों पर कड़ी नजर रखी गई
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। बाल विवाह रोकने के लिए जिला प्रशासन द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। स्कूलों, कॉलेजों और कॉलोनियों में जागरूकता कार्यक्रम चलाए गए, लेकिन इसके बावजूद यह कुप्रथा पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही है। हाल ही में अक्षय तृतीया के मौके पर जिले में प्रशासन ने करीब आधा दर्जन बाल विवाह रुकवाए, जो यह दर्शाता है कि जागरूकता के बावजूद समाज में अभी भी इस मुद्दे पर पर्याप्त समझ विकसित नहीं हो सकी है।
प्रशासन की विशेष तैयारी और निगरानी
प्रशासन ने इस बार विशेष तैयारी करते हुए अलग-अलग टीमें गठित की थीं। साथ ही 18 वर्ष से कम उम्र की बालिकाओं की सूची तैयार करवाई गई थी, ताकि संभावित बाल विवाह को पहले ही रोका जा सके। ग्राम पंचायत सचिव, कोटवार, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और स्वास्थ्य कर्मचारियों को निगरानी की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके बावजूद कई स्थानों पर बाल विवाह की कोशिशें सामने आईं, जिन्हें कंट्रोल रूम पर मिली सूचनाओं के आधार पर रोका गया। महिला एवं बाल विकास विभाग के जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिंहा के अनुसार जैसे ही किसी बाल विवाह की सूचना मिली, तत्काल कार्रवाई कर विवाह रुकवाया गया।
13 वर्ष की बालिका का 42 साल के व्यक्ति से विवाह का प्रयास
गौरतलब है कि प्रशासन ने बाल विवाह रोकने के लिए स्थानीय स्तर पर कर्मचारियों को जिम्मेदारी सौंपकर निगरानी बढ़ाई थी। इसके बावजूद सामने आ रहे मामले इस बात का संकेत हैं कि केवल प्रशासनिक प्रयास पर्याप्त नहीं हैं, बल्कि समाज के हर वर्ग को इस कुप्रथा के खिलाफ आगे आना होगा।
इस माह सामने आए मामलों में एक बेहद चौंकाने वाला मामला भी शामिल है, जिसमें 13 साल की बालिका का विवाह 42 साल के युवक से कराया जा रहा था। परिजनों ने इसके लिए नकली दस्तावेज भी तैयार कर लिए थे, लेकिन समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप कर विवाह रुकवा दिया। इसी तरह गांधीनगर, खजराना, गोविंद नगर और राऊ क्षेत्रों में भी नाबालिग बालिकाओं के विवाह की कोशिशें रोकी गईं।
सामूहिक विवाह आयोजनों पर कड़ी नजर
प्रशासन ने सामूहिक विवाह समारोहों पर भी विशेष नजर रखी। आयोजनों में पहुंचकर बालक-बालिकाओं के दस्तावेजों की जांच की गई और आयोजकों को स्पष्ट निर्देश दिए गए कि किसी भी हालत में नाबालिगों का विवाह न कराया जाए। उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक का कहना है कि सामूहिक विवाह आयोजनों में किसी नाबालिग के विवाह का मामला सामने नहीं आया।
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