इंदौर में नाबालिग भाई-बहन के विवाह का मामला सामने आया। अंकसूची में बदलाव कर बच्चों को बालिग बना दिया गया था, जबकि बालिका 13 वर्ष और बालक 19 वर्ष का नि …और पढ़ें
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। बाल विवाह जैसी कुरीति को रोकने के लिए लगातार जागरूकता कार्यक्रम चलाए जा रहे हैं, इसके बावजूद इस पर रोक नहीं लग रही। शुक्रवार को इंदौर जिले के राऊ रंगवासा क्षेत्र में नाबालिग भाई-बहन के विवाह का मामला सामने आया। अंकसूची में बदलाव कर बच्चों को बालिग बना दिया गया था, जबकि बालिका 13 वर्ष और बालक 19 वर्ष का निकला। भाई का विवाह कराने के लिए 13 साल की बहन की शादी 42 वर्षीय युवक से कराई जा रही थी। मामले की जानकारी मिलने पर प्रशासन द्वारा गठित टीम मौके पर पहुंची और अंकसूची की जांच के बाद विवाह रुकवा दिया।
फर्जी अंकसूची और उम्र का खुलासा
महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा जारी हेल्पलाइन नंबर पर ग्राम रंगवासा में 25 अप्रैल को होने वाले विवाह की शिकायत मिली। प्रारंभिक जांच में परिवार ने बच्चों की उम्र संबंधी अंकसूची प्रस्तुत की, जिसमें दोनों को विवाह योग्य बताया गया। हालांकि संदेह होने पर जिला कार्यक्रम अधिकारी रजनीश सिंह ने गहन जांच के निर्देश दिए। जांच में सामने आया कि इंदौर से जारी बताई गई अंकसूची पूरी तरह फर्जी है। संबंधित स्कूल ने इसे जारी करने से इनकार कर दिया। वहीं होशंगाबाद से प्राप्त रिकॉर्ड में बालिका की उम्र मात्र 13 वर्ष और बालक की उम्र 19 वर्ष पाई गई।
प्रशासनिक कार्रवाई और परिजनों की सहमति
सच्चाई सामने आने के बाद दल प्रभारी आशीष गोस्वामी और उड़नदस्ता प्रभारी महेंद्र पाठक ने परिवार से मूल दस्तावेज मांगे, लेकिन परिवार कोई ठोस प्रमाण नहीं दे सका। कानूनी कार्रवाई की चेतावनी और समझाइश के बाद परिजन विवाह निरस्त करने पर सहमत हो गए। इस दौरान सुपरवाइजर सुविधा कटारे और दल की सदस्य संगीता सिंह मौजूद रहीं।
‘बेटी दो-बेटी लो’ प्रथा का खौफनाक पहलू
जांच में यह भी खुलासा हुआ कि विवाह ‘बेटी दो-बेटी लो’ परंपरा पर हो रहा था। दादा ने अपने 19 वर्ष के पोते की शादी के लिए 13 वर्ष की पोती का रिश्ता 42 वर्षीय व्यक्ति से तय कर दिया। सांवेर में जिस घर में पोते का विवाह तय किया था, वहां लड़की के काका के साथ अपनी नाबालिग पोती का विवाह किया जा रहा था। यानी छोटी बहन को विवाह के बाद भाई की काकी सास बनाने की तैयारी थी।
उज्जैन में होनी थी शादी और प्रशासन की सख्ती
घर में शादी की पूरी तैयारी हो चुकी थी। 25 अप्रैल को विवाह उज्जैन स्थित चंद्रवंशी बागरी समाज धर्मशाला में होना था। मामले में उज्जैन महिला बाल विकास विभाग और जिला प्रशासन को भी सूचना दी गई है, ताकि नजर रखें। सांवेर तहसील के ग्राम दया खेड़ा में होने वाले इस विवाह के लिए तहसीलदार पूनम तोमर के माध्यम से विवाह रोकने की कार्रवाई की गई है।
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टेंट और साउंड सिस्टम हटाया गया
प्रशासन की टीम ने कार्रवाई करते हुए टेंट और साउंड सिस्टम हटवा दिए। मौके पर पहुंची टीम ने विवाह पत्रिका प्रकाशित करने वाले कृष्ण ग्राफिक्स को भी फोन पर अधिनियम की जानकारी दी और बगैर दस्तावेज देखे पत्रिका छापने को लेकर फटकार लगाई। वहीं हलवाई और अन्य लोगों को भी फोन लगाकर अधिनियम की जानकारी दी।
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