नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। पिछले दिनों महू के सिमरोल में कार में आग लगने के कारण साढ़े तीन साल के मासूम की मौत हो गई। कार दिल्ली से खरीदी गई थी और उसमें मॉडिफिकेशन किया गया था। इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या गाड़ियों का स्टाइल और मॉडिफिकेशन अब जानलेवा साबित हो रहा है?
खतरनाक है इलेक्ट्रिकल मॉडिफिकेशन
इंदौर सहित मध्य प्रदेश के शहरों में तेजी से बढ़ते मॉडिफिकेशन कल्चर ने सड़क सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। युवा वर्ग में बाइक और कार को यूनिक दिखाने का चलन तेजी से बढ़ा है। इसके लिए एलइडी लाइट, हाई पावर म्यूजिक सिस्टम, बैटरी अपग्रेड, फॉग लैंप, साइलेंसर मॉडिफिकेशन और इंटीरियर कटिंग जैसे बदलाव बड़े पैमाने पर कराए जा रहे हैं।
इलेक्ट्रिकल मॉडिफिकेशन (एलइडी, म्यूजिक सिस्टम, बैटरी अपग्रेड) सबसे ज्यादा खतरनाक हैं। ये वाहन के ओरिजिनल वायरिंग सिस्टम पर अतिरिक्त लोड डालते हैं। शॉर्ट सर्किट और आग लगने का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। हाल ही में एक बस हादसे में भी अवैध इलेक्ट्रिकल मॉडिफिकेशन को आग का कारण माना गया, जहां अतिरिक्त वायरिंग और उपकरणों ने सिस्टम को ओवरलोड कर दिया।
क्या कहता है मोटर व्हीकल एक्ट?
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत वाहन में कंपनी द्वारा तय डिजाइन से छेड़छाड़ करना अवैध माना गया है। सुप्रीम कोर्ट भी साफ कर चुका है कि निर्माता के मूल स्वरूप में बदलाव सड़क सुरक्षा के लिए खतरा है और ऐसे वाहनों का रजिस्ट्रेशन तक रद्द हो सकता है। लोकल गैरेज सस्ते होते हैं लेकिन घातक साबित होते हैं, क्योंकि वहां न कोई सेफ्टी स्टैंडर्ड होता है और न ही प्रमाणित पार्ट्स। मॉडिफिकेशन से वाहन की बैलेंसिंग और ब्रेकिंग प्रभावित होती है। हाई पावर साउंड और लाइट्स ड्राइवर का ध्यान भटकाते हैं। मॉडिफाइड साइलेंसर और तेज आवाज दुर्घटना का जोखिम बढ़ाते हैं।
विशेषज्ञों की सलाह और सावधानियां
खतरे से बचने के लिए अनधिकृत मॉडिफिकेशन से बचें और इलेक्ट्रिकल सिस्टम में छेड़छाड़ न करें। साइलेंसर, लाइट और बैटरी में बदलाव से पहले नियम जानें। यदि वाहन में कोई असामान्य गर्मी या गंध दिखे तो तुरंत जांच कराएं। तीन से पांच साल पुराना वाहन होने के बाद वाहन की वारंटी खत्म होते ही लोग बाहर से काम करवाने लगते हैं। ऐसे में लोकल स्तर पर सस्ता पार्ट्स वाहन में लगा दिया जाता है, जिसकी कोई वारंटी नहीं होती है। वहीं वाहन कंपनियों की फिटिंग क्वालिटी वाली होती है।
बाहर के फिटमेंट पर कंपनियां नहीं देतीं वारंटी
बाहर से लगाए गए एक्स्ट्रा लाइट, स्विच की कोई गारंटी और वारंटी नहीं होती है। कंपनियां भी बाहर से फिटमेंट होने पर वारंटी नहीं देती हैं।
वाहन पुराना होने पर लोग बाहर से काम करवाते हैं जिससे गुणवत्ता प्रभावित होती है। कंपनियों की फिटिंग गुणवत्तापूर्ण होती है, जबकि बाहर के पार्ट्स जोखिम भरे हो सकते हैं। – मुकेश वैष्णव, जीएम हर्ष हुंडाई
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