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गोरखपुर प्रेस क्लब शपथ ग्रहण समारोह में बोले CM योगी: मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता जरूरी, खबरों में भिन्नता से जनता होती है भ्रमित
	
		
			
	
	मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि पत्रकारिता के विभिन्न आयामों प्रिंट, विजुअल, डिजिटल व सोशल मीडिया के बीच परस्पर समन्वय होना आवश्यक है। यदि किसी एक ही तथ्य को मीडिया के अलग-अलग आयाम भिन्न-भिन्न तरीके व दृष्टिकोण से प्रस्तुत करेंगे तो आम जन-मानस के सामने कन्फ्यूजन की स्थिति होगी। ऐसी स्थिति मीडिया के प्रति जन-विश्वास को भी प्रभावित करेगी। इसलिए यह आवश्यक है कि मीडिया के सभी अंग समान मानक, मूल्यों व आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ें।

	 

	सीएम योगी सोमवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब सभागार में आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पत्रकारिता में विभिन्न प्रकार की चुनौतियां हैं। प्रिंट, विजुअल, डिजिटल व सोशल मीडिया के तौर पर पत्रकारिता के कई स्वरूप हैं। परिवारों में भी प्रत्येक सदस्य का रुझान मीडिया के अलग-अलग रूप के प्रति रहता है। पत्रकारिता के इन सभी रूपों को समग्रता के साथ जोड़ने की आवश्यकता है। प्रिंट व विजुअल मीडिया के अपने कुछ मानक हैं, अपनी आचार संहिता है। किंतु, सोशल मीडिया को अभी इससे जोड़ना है।

	 

	सीएम योगी ने कहा कि पत्रकारिता को आत्म-नियमन से मूल्यों व आदर्शों के साथ आगे बढ़ना है। भारत में 200 वर्ष की पत्रकारिता का मूलभाव राष्ट्र सेवा, समाज सेवा व ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का भाव रहा है। हमें इसी भाव के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मीडिया में एक ऐसा भी वर्ग है, जो समाज को गुमराह करके अशांति फैलाने का कार्य करता है। हमें मीडिया के ऐसे रूप से बचने की आवश्यकता है। यदि सोशल मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में एक ही खबर में भिन्नता होती है, तो वह जन-मानस को विचलित करती है। यह दुविधा की स्थिति खतरनाक होती है। हमें प्रयास करना चाहिए कि ऐसी स्थिति नहीं हो। सरकार मूल्यों व आदर्शों पर आधारित पत्रकारिता के साथ सदैव खड़ी है।

	 

	आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए

	मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र संवाद से चलता है। संवाद में आलोचना हो सकती है, किंतु इस आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए। जब हम एक सूत्र की मनोस्थिति से कार्य करते हैं, तो सदैव सार्थक परिणाम सामने आते हैं। पत्रकारिता समाज का आईना होती है। पत्रकारिता जिस दृष्टि से समाज के मुद्दों को प्रस्तुत करती है, समाज उसी दृष्टि से उसे समझता है। पत्रकारिता को जन-विश्वास प्रतीक के रूप में बने रहने के लिए सही और गलत के प्रति एक भाव में रहना चाहिए। पत्रकारिता में किसी भी मुद्दे पर दो भाव नहीं होने चाहिए, क्योंकि तब यह जन-विश्वास पर कुठाराघात करता है। 

	 

	यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण

	मुख्यमंत्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी पत्रकारिता ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूती दी है। यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि 200 वर्ष पहले हिंदी पत्रकारिता की शुरूआत 30 मई 1826 को कोलकाता से हुई थी, जब जुगुल किशोर शुक्ल ने हिंदी के पहले समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड का शुभारंभ किया था। जब उन्होंने पत्र निकाला, तब देश गुलाम था। उन्होंने देश की आजादी के स्वर को तेज करने के लिए पत्रकारिता को माध्यम बनाया था। 200 वर्ष से बिना रुके, बिना थके, बिना डिगे पत्रकारिता की यह शानदार यात्रा आगे बढ़ रही है। 

	 

	सही तथ्य से होता है मजबूत जन-विश्वास का निर्माण

	मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता जब एक सामान्य व्यक्ति के स्वर के साथ अपना स्वर मिलाती है, और सही तथ्यों को जनता के सम्मुख रखती है, तब एक मजबूत जन-विश्वास का निर्माण होता है। जो पत्रकारिता जन-विश्वास का प्रतीक बनती है, उसे दुनिया की कोई शक्ति विचलित नहीं कर सकती। पत्रकारिता ने कठिन मार्गों का अनुसरण करते हुए सदैव अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया है। सीएम योगी ने स्वतंत्रता आंदोलन और देशसेवा के लिए महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, गणेश शंकर विद्यार्थी, अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा भी पत्रकारिता को माध्यम बनाने का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बाल गंगाधर तिलक ने 1916 में लखनऊ से ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ के नारे को पत्रकारिता के माध्यम से जन-मानस में संचारित किया था। वर्ष 2017 में इस नारे के 100 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।

	 

	विघटनकारी शक्तियों की चुनौती हमेशा सामने

	मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता का आधार हमारे उपनिषदों से प्रेरित रहा है। यह प्रेरणा उपनिषदों की ‘सत्यमेव जयते’ सूक्ति से प्राप्त होती है। समाज में विघटनकारी शक्तियों की चुनौती पत्रकारिता के सामने हमेशा रही है। ये शक्तियां पत्रकारिता की स्वतंत्रता को बाधित करती रही हैं। इन बाधाओं से विचलित हुए बिना हमें इसको बढ़ाए रखना है, क्योंकि हमारी पत्रकारिता उपनिषदों के मूल्यों पर आधारित है, जहां सत्य की निश्चित विजय का भाव समाहित है।

	 

	अपराध व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति निरंतर जारी

	मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अपराध व अपराधियों तथा भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को निरंतर जारी रखा है। समाज के प्रत्येक वर्ग को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो रहा है। सरकार ने पत्रकारों के लिए भी विभिन्न आवासीय योजनाएं चलाई हैं। मान्यता प्राप्त पत्रकारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। 

	 

	तीन करोड़ की आबादी गोरखपुर पर निर्भर

	मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तीन करोड़़ की आबादी शिक्षा, व्यापार व रोजगार हेतु गोरखपुर महानगर पर निर्भर है। पूर्वी यूपी, पश्चिमी बिहार और नेपाल की एक बड़ी आबादी गोरखपुर पर निर्भर रहती है। गोरखपुर में पत्रकारिता की दिशा, लोगों के मन में राष्ट्रभक्ति के भाव को बढ़ाने वाली होनी चाहिए। आत्मनिर्भर विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने में पत्रकारिता को मजबूती के साथ आगे आना चाहिए। यह बेहद महत्वपूर्ण होगा।

	 

	मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की स्थापना 1998 में हुई। इसमें शामिल सदस्यों को तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का सानिध्य प्राप्त था। मुझे विगत वर्ष भी गोरखपुर प्रेस क्लब के सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। गोरखपुर प्रेस क्लब की स्थापना में अध्यक्ष के रूप में एसपी त्रिपाठी तथा सचिव के रूप में अरविन्द शुक्ला ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया था। सरकार द्वारा प्रेस क्लब को एक भव्य भवन दिया गया, जहां पत्रकारिता के कार्य को सुगमता से सम्पन्न किया जा रहा है।

	 

	महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने दिलाई शपथ

	समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी, उपाध्यक्ष धनेश कुमार, महामंत्री पंकज श्रीवास्तव, संयुक्त मंत्री महेंद्र गौड़, कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव, पुस्तकालय मंत्री संजय कुमार, कार्यकारिणी सदस्य मनोज कुमार मिश्रा, रजनीश त्रिपाठी और अजीत सिंह को शपथ दिलाई। कार्यक्रम में स्वागत संबोधन प्रेस क्लब अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी ने, जबकि संचालन गजेंद्र त्रिपाठी और प्रेम पराया ने किया।

	 

	इस अवसर पर सांसद रवि किशन शुक्ल, विधान परिषद सदस्य एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, दैनिक जागरण के स्थानीय संपादक मदन मोहन सिंह, अमर उजाला के स्थानीय संपादक विनीत सक्सेना, राष्ट्रीय सहारा के पीयूष बंका, दैनिक आज के अखिलेश चंद, स्वतंत्र चेतना के आनंद जी वैश्य सहित बड़ी संख्या में पत्रकारों की सहभागिता रही। Edited by : Sudhir Sharma

गोरखपुर प्रेस क्लब शपथ ग्रहण समारोह में बोले CM योगी: मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता जरूरी, खबरों में भिन्नता से जनता होती है भ्रमित

गोरखपुर प्रेस क्लब शपथ ग्रहण समारोह में बोले CM योगी: मूल्यों पर आधारित पत्रकारिता जरूरी, खबरों में भिन्नता से जनता होती है भ्रमित
	
		
			
	
	मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि पत्रकारिता के विभिन्न आयामों प्रिंट, विजुअल, डिजिटल व सोशल मीडिया के बीच परस्पर समन्वय होना आवश्यक है। यदि किसी एक ही तथ्य को मीडिया के अलग-अलग आयाम भिन्न-भिन्न तरीके व दृष्टिकोण से प्रस्तुत करेंगे तो आम जन-मानस के सामने कन्फ्यूजन की स्थिति होगी। ऐसी स्थिति मीडिया के प्रति जन-विश्वास को भी प्रभावित करेगी। इसलिए यह आवश्यक है कि मीडिया के सभी अंग समान मानक, मूल्यों व आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ें।

	 

	सीएम योगी सोमवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब सभागार में आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पत्रकारिता में विभिन्न प्रकार की चुनौतियां हैं। प्रिंट, विजुअल, डिजिटल व सोशल मीडिया के तौर पर पत्रकारिता के कई स्वरूप हैं। परिवारों में भी प्रत्येक सदस्य का रुझान मीडिया के अलग-अलग रूप के प्रति रहता है। पत्रकारिता के इन सभी रूपों को समग्रता के साथ जोड़ने की आवश्यकता है। प्रिंट व विजुअल मीडिया के अपने कुछ मानक हैं, अपनी आचार संहिता है। किंतु, सोशल मीडिया को अभी इससे जोड़ना है।

	 

	सीएम योगी ने कहा कि पत्रकारिता को आत्म-नियमन से मूल्यों व आदर्शों के साथ आगे बढ़ना है। भारत में 200 वर्ष की पत्रकारिता का मूलभाव राष्ट्र सेवा, समाज सेवा व ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का भाव रहा है। हमें इसी भाव के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मीडिया में एक ऐसा भी वर्ग है, जो समाज को गुमराह करके अशांति फैलाने का कार्य करता है। हमें मीडिया के ऐसे रूप से बचने की आवश्यकता है। यदि सोशल मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में एक ही खबर में भिन्नता होती है, तो वह जन-मानस को विचलित करती है। यह दुविधा की स्थिति खतरनाक होती है। हमें प्रयास करना चाहिए कि ऐसी स्थिति नहीं हो। सरकार मूल्यों व आदर्शों पर आधारित पत्रकारिता के साथ सदैव खड़ी है।

	 

	आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए

	मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र संवाद से चलता है। संवाद में आलोचना हो सकती है, किंतु इस आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए। जब हम एक सूत्र की मनोस्थिति से कार्य करते हैं, तो सदैव सार्थक परिणाम सामने आते हैं। पत्रकारिता समाज का आईना होती है। पत्रकारिता जिस दृष्टि से समाज के मुद्दों को प्रस्तुत करती है, समाज उसी दृष्टि से उसे समझता है। पत्रकारिता को जन-विश्वास प्रतीक के रूप में बने रहने के लिए सही और गलत के प्रति एक भाव में रहना चाहिए। पत्रकारिता में किसी भी मुद्दे पर दो भाव नहीं होने चाहिए, क्योंकि तब यह जन-विश्वास पर कुठाराघात करता है। 

	 

	यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण

	मुख्यमंत्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी पत्रकारिता ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूती दी है। यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि 200 वर्ष पहले हिंदी पत्रकारिता की शुरूआत 30 मई 1826 को कोलकाता से हुई थी, जब जुगुल किशोर शुक्ल ने हिंदी के पहले समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड का शुभारंभ किया था। जब उन्होंने पत्र निकाला, तब देश गुलाम था। उन्होंने देश की आजादी के स्वर को तेज करने के लिए पत्रकारिता को माध्यम बनाया था। 200 वर्ष से बिना रुके, बिना थके, बिना डिगे पत्रकारिता की यह शानदार यात्रा आगे बढ़ रही है। 

	 

	सही तथ्य से होता है मजबूत जन-विश्वास का निर्माण

	मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता जब एक सामान्य व्यक्ति के स्वर के साथ अपना स्वर मिलाती है, और सही तथ्यों को जनता के सम्मुख रखती है, तब एक मजबूत जन-विश्वास का निर्माण होता है। जो पत्रकारिता जन-विश्वास का प्रतीक बनती है, उसे दुनिया की कोई शक्ति विचलित नहीं कर सकती। पत्रकारिता ने कठिन मार्गों का अनुसरण करते हुए सदैव अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया है। सीएम योगी ने स्वतंत्रता आंदोलन और देशसेवा के लिए महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, गणेश शंकर विद्यार्थी, अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा भी पत्रकारिता को माध्यम बनाने का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बाल गंगाधर तिलक ने 1916 में लखनऊ से ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ के नारे को पत्रकारिता के माध्यम से जन-मानस में संचारित किया था। वर्ष 2017 में इस नारे के 100 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।

	 

	विघटनकारी शक्तियों की चुनौती हमेशा सामने

	मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता का आधार हमारे उपनिषदों से प्रेरित रहा है। यह प्रेरणा उपनिषदों की ‘सत्यमेव जयते’ सूक्ति से प्राप्त होती है। समाज में विघटनकारी शक्तियों की चुनौती पत्रकारिता के सामने हमेशा रही है। ये शक्तियां पत्रकारिता की स्वतंत्रता को बाधित करती रही हैं। इन बाधाओं से विचलित हुए बिना हमें इसको बढ़ाए रखना है, क्योंकि हमारी पत्रकारिता उपनिषदों के मूल्यों पर आधारित है, जहां सत्य की निश्चित विजय का भाव समाहित है।

	 

	अपराध व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति निरंतर जारी

	मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अपराध व अपराधियों तथा भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को निरंतर जारी रखा है। समाज के प्रत्येक वर्ग को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो रहा है। सरकार ने पत्रकारों के लिए भी विभिन्न आवासीय योजनाएं चलाई हैं। मान्यता प्राप्त पत्रकारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। 

	 

	तीन करोड़ की आबादी गोरखपुर पर निर्भर

	मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तीन करोड़़ की आबादी शिक्षा, व्यापार व रोजगार हेतु गोरखपुर महानगर पर निर्भर है। पूर्वी यूपी, पश्चिमी बिहार और नेपाल की एक बड़ी आबादी गोरखपुर पर निर्भर रहती है। गोरखपुर में पत्रकारिता की दिशा, लोगों के मन में राष्ट्रभक्ति के भाव को बढ़ाने वाली होनी चाहिए। आत्मनिर्भर विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने में पत्रकारिता को मजबूती के साथ आगे आना चाहिए। यह बेहद महत्वपूर्ण होगा।

	 

	मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की स्थापना 1998 में हुई। इसमें शामिल सदस्यों को तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का सानिध्य प्राप्त था। मुझे विगत वर्ष भी गोरखपुर प्रेस क्लब के सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। गोरखपुर प्रेस क्लब की स्थापना में अध्यक्ष के रूप में एसपी त्रिपाठी तथा सचिव के रूप में अरविन्द शुक्ला ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया था। सरकार द्वारा प्रेस क्लब को एक भव्य भवन दिया गया, जहां पत्रकारिता के कार्य को सुगमता से सम्पन्न किया जा रहा है।

	 

	महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने दिलाई शपथ

	समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी, उपाध्यक्ष धनेश कुमार, महामंत्री पंकज श्रीवास्तव, संयुक्त मंत्री महेंद्र गौड़, कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव, पुस्तकालय मंत्री संजय कुमार, कार्यकारिणी सदस्य मनोज कुमार मिश्रा, रजनीश त्रिपाठी और अजीत सिंह को शपथ दिलाई। कार्यक्रम में स्वागत संबोधन प्रेस क्लब अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी ने, जबकि संचालन गजेंद्र त्रिपाठी और प्रेम पराया ने किया।

	 

	इस अवसर पर सांसद रवि किशन शुक्ल, विधान परिषद सदस्य एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, दैनिक जागरण के स्थानीय संपादक मदन मोहन सिंह, अमर उजाला के स्थानीय संपादक विनीत सक्सेना, राष्ट्रीय सहारा के पीयूष बंका, दैनिक आज के अखिलेश चंद, स्वतंत्र चेतना के आनंद जी वैश्य सहित बड़ी संख्या में पत्रकारों की सहभागिता रही। Edited by : Sudhir Sharma

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि पत्रकारिता के विभिन्न आयामों प्रिंट, विजुअल, डिजिटल व सोशल मीडिया के बीच परस्पर समन्वय होना आवश्यक है। यदि किसी एक ही तथ्य को मीडिया के अलग-अलग आयाम भिन्न-भिन्न तरीके व दृष्टिकोण से प्रस्तुत करेंगे तो आम जन-मानस के सामने कन्फ्यूजन की स्थिति होगी। ऐसी स्थिति मीडिया के प्रति जन-विश्वास को भी प्रभावित करेगी। इसलिए यह आवश्यक है कि मीडिया के सभी अंग समान मानक, मूल्यों व आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ें।

 

सीएम योगी सोमवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब सभागार में आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पत्रकारिता में विभिन्न प्रकार की चुनौतियां हैं। प्रिंट, विजुअल, डिजिटल व सोशल मीडिया के तौर पर पत्रकारिता के कई स्वरूप हैं। परिवारों में भी प्रत्येक सदस्य का रुझान मीडिया के अलग-अलग रूप के प्रति रहता है। पत्रकारिता के इन सभी रूपों को समग्रता के साथ जोड़ने की आवश्यकता है। प्रिंट व विजुअल मीडिया के अपने कुछ मानक हैं, अपनी आचार संहिता है। किंतु, सोशल मीडिया को अभी इससे जोड़ना है।

 

सीएम योगी ने कहा कि पत्रकारिता को आत्म-नियमन से मूल्यों व आदर्शों के साथ आगे बढ़ना है। भारत में 200 वर्ष की पत्रकारिता का मूलभाव राष्ट्र सेवा, समाज सेवा व ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का भाव रहा है। हमें इसी भाव के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मीडिया में एक ऐसा भी वर्ग है, जो समाज को गुमराह करके अशांति फैलाने का कार्य करता है। हमें मीडिया के ऐसे रूप से बचने की आवश्यकता है। यदि सोशल मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में एक ही खबर में भिन्नता होती है, तो वह जन-मानस को विचलित करती है। यह दुविधा की स्थिति खतरनाक होती है। हमें प्रयास करना चाहिए कि ऐसी स्थिति नहीं हो। सरकार मूल्यों व आदर्शों पर आधारित पत्रकारिता के साथ सदैव खड़ी है।

 

आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र संवाद से चलता है। संवाद में आलोचना हो सकती है, किंतु इस आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए। जब हम एक सूत्र की मनोस्थिति से कार्य करते हैं, तो सदैव सार्थक परिणाम सामने आते हैं। पत्रकारिता समाज का आईना होती है। पत्रकारिता जिस दृष्टि से समाज के मुद्दों को प्रस्तुत करती है, समाज उसी दृष्टि से उसे समझता है। पत्रकारिता को जन-विश्वास प्रतीक के रूप में बने रहने के लिए सही और गलत के प्रति एक भाव में रहना चाहिए। पत्रकारिता में किसी भी मुद्दे पर दो भाव नहीं होने चाहिए, क्योंकि तब यह जन-विश्वास पर कुठाराघात करता है। 

 

यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी पत्रकारिता ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूती दी है। यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि 200 वर्ष पहले हिंदी पत्रकारिता की शुरूआत 30 मई 1826 को कोलकाता से हुई थी, जब जुगुल किशोर शुक्ल ने हिंदी के पहले समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड का शुभारंभ किया था। जब उन्होंने पत्र निकाला, तब देश गुलाम था। उन्होंने देश की आजादी के स्वर को तेज करने के लिए पत्रकारिता को माध्यम बनाया था। 200 वर्ष से बिना रुके, बिना थके, बिना डिगे पत्रकारिता की यह शानदार यात्रा आगे बढ़ रही है। 

 

सही तथ्य से होता है मजबूत जन-विश्वास का निर्माण

मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता जब एक सामान्य व्यक्ति के स्वर के साथ अपना स्वर मिलाती है, और सही तथ्यों को जनता के सम्मुख रखती है, तब एक मजबूत जन-विश्वास का निर्माण होता है। जो पत्रकारिता जन-विश्वास का प्रतीक बनती है, उसे दुनिया की कोई शक्ति विचलित नहीं कर सकती। पत्रकारिता ने कठिन मार्गों का अनुसरण करते हुए सदैव अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया है। सीएम योगी ने स्वतंत्रता आंदोलन और देशसेवा के लिए महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, गणेश शंकर विद्यार्थी, अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा भी पत्रकारिता को माध्यम बनाने का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बाल गंगाधर तिलक ने 1916 में लखनऊ से ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ के नारे को पत्रकारिता के माध्यम से जन-मानस में संचारित किया था। वर्ष 2017 में इस नारे के 100 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।

 

विघटनकारी शक्तियों की चुनौती हमेशा सामने

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता का आधार हमारे उपनिषदों से प्रेरित रहा है। यह प्रेरणा उपनिषदों की ‘सत्यमेव जयते’ सूक्ति से प्राप्त होती है। समाज में विघटनकारी शक्तियों की चुनौती पत्रकारिता के सामने हमेशा रही है। ये शक्तियां पत्रकारिता की स्वतंत्रता को बाधित करती रही हैं। इन बाधाओं से विचलित हुए बिना हमें इसको बढ़ाए रखना है, क्योंकि हमारी पत्रकारिता उपनिषदों के मूल्यों पर आधारित है, जहां सत्य की निश्चित विजय का भाव समाहित है।

 

अपराध व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति निरंतर जारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अपराध व अपराधियों तथा भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को निरंतर जारी रखा है। समाज के प्रत्येक वर्ग को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो रहा है। सरकार ने पत्रकारों के लिए भी विभिन्न आवासीय योजनाएं चलाई हैं। मान्यता प्राप्त पत्रकारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। 

 

तीन करोड़ की आबादी गोरखपुर पर निर्भर

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तीन करोड़़ की आबादी शिक्षा, व्यापार व रोजगार हेतु गोरखपुर महानगर पर निर्भर है। पूर्वी यूपी, पश्चिमी बिहार और नेपाल की एक बड़ी आबादी गोरखपुर पर निर्भर रहती है। गोरखपुर में पत्रकारिता की दिशा, लोगों के मन में राष्ट्रभक्ति के भाव को बढ़ाने वाली होनी चाहिए। आत्मनिर्भर विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने में पत्रकारिता को मजबूती के साथ आगे आना चाहिए। यह बेहद महत्वपूर्ण होगा।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की स्थापना 1998 में हुई। इसमें शामिल सदस्यों को तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का सानिध्य प्राप्त था। मुझे विगत वर्ष भी गोरखपुर प्रेस क्लब के सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। गोरखपुर प्रेस क्लब की स्थापना में अध्यक्ष के रूप में एसपी त्रिपाठी तथा सचिव के रूप में अरविन्द शुक्ला ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया था। सरकार द्वारा प्रेस क्लब को एक भव्य भवन दिया गया, जहां पत्रकारिता के कार्य को सुगमता से सम्पन्न किया जा रहा है।

 

महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने दिलाई शपथ

समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी, उपाध्यक्ष धनेश कुमार, महामंत्री पंकज श्रीवास्तव, संयुक्त मंत्री महेंद्र गौड़, कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव, पुस्तकालय मंत्री संजय कुमार, कार्यकारिणी सदस्य मनोज कुमार मिश्रा, रजनीश त्रिपाठी और अजीत सिंह को शपथ दिलाई। कार्यक्रम में स्वागत संबोधन प्रेस क्लब अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी ने, जबकि संचालन गजेंद्र त्रिपाठी और प्रेम पराया ने किया।

 

इस अवसर पर सांसद रवि किशन शुक्ल, विधान परिषद सदस्य एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, दैनिक जागरण के स्थानीय संपादक मदन मोहन सिंह, अमर उजाला के स्थानीय संपादक विनीत सक्सेना, राष्ट्रीय सहारा के पीयूष बंका, दैनिक आज के अखिलेश चंद, स्वतंत्र चेतना के आनंद जी वैश्य सहित बड़ी संख्या में पत्रकारों की सहभागिता रही। Edited by : Sudhir Sharma

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि पत्रकारिता के विभिन्न आयामों प्रिंट, विजुअल, डिजिटल व सोशल मीडिया के बीच परस्पर समन्वय होना आवश्यक है। यदि किसी एक ही तथ्य को मीडिया के अलग-अलग आयाम भिन्न-भिन्न तरीके व दृष्टिकोण से प्रस्तुत करेंगे तो आम जन-मानस के सामने कन्फ्यूजन की स्थिति होगी। ऐसी स्थिति मीडिया के प्रति जन-विश्वास को भी प्रभावित करेगी। इसलिए यह आवश्यक है कि मीडिया के सभी अंग समान मानक, मूल्यों व आदर्शों के अनुरूप आगे बढ़ें।

 

सीएम योगी सोमवार को गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के शपथ ग्रहण समारोह को बतौर मुख्य अतिथि संबोधित कर रहे थे। सिविल लाइंस स्थित गोरखपुर क्लब सभागार में आयोजित इस समारोह में मुख्यमंत्री ने कहा कि आज पत्रकारिता में विभिन्न प्रकार की चुनौतियां हैं। प्रिंट, विजुअल, डिजिटल व सोशल मीडिया के तौर पर पत्रकारिता के कई स्वरूप हैं। परिवारों में भी प्रत्येक सदस्य का रुझान मीडिया के अलग-अलग रूप के प्रति रहता है। पत्रकारिता के इन सभी रूपों को समग्रता के साथ जोड़ने की आवश्यकता है। प्रिंट व विजुअल मीडिया के अपने कुछ मानक हैं, अपनी आचार संहिता है। किंतु, सोशल मीडिया को अभी इससे जोड़ना है।

 

सीएम योगी ने कहा कि पत्रकारिता को आत्म-नियमन से मूल्यों व आदर्शों के साथ आगे बढ़ना है। भारत में 200 वर्ष की पत्रकारिता का मूलभाव राष्ट्र सेवा, समाज सेवा व ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ का भाव रहा है। हमें इसी भाव के साथ आगे बढ़ना चाहिए। मीडिया में एक ऐसा भी वर्ग है, जो समाज को गुमराह करके अशांति फैलाने का कार्य करता है। हमें मीडिया के ऐसे रूप से बचने की आवश्यकता है। यदि सोशल मीडिया तथा प्रिंट मीडिया में एक ही खबर में भिन्नता होती है, तो वह जन-मानस को विचलित करती है। यह दुविधा की स्थिति खतरनाक होती है। हमें प्रयास करना चाहिए कि ऐसी स्थिति नहीं हो। सरकार मूल्यों व आदर्शों पर आधारित पत्रकारिता के साथ सदैव खड़ी है।

 

आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोकतंत्र संवाद से चलता है। संवाद में आलोचना हो सकती है, किंतु इस आलोचना को व्यक्तिगत रंजिश नहीं मानना चाहिए। जब हम एक सूत्र की मनोस्थिति से कार्य करते हैं, तो सदैव सार्थक परिणाम सामने आते हैं। पत्रकारिता समाज का आईना होती है। पत्रकारिता जिस दृष्टि से समाज के मुद्दों को प्रस्तुत करती है, समाज उसी दृष्टि से उसे समझता है। पत्रकारिता को जन-विश्वास प्रतीक के रूप में बने रहने के लिए सही और गलत के प्रति एक भाव में रहना चाहिए। पत्रकारिता में किसी भी मुद्दे पर दो भाव नहीं होने चाहिए, क्योंकि तब यह जन-विश्वास पर कुठाराघात करता है। 

 

यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण

मुख्यमंत्री ने कहा कि विपरीत परिस्थितियों में भी पत्रकारिता ने भारतीय लोकतंत्र को मजबूती दी है। यह वर्ष हिंदी पत्रकारिता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि 200 वर्ष पहले हिंदी पत्रकारिता की शुरूआत 30 मई 1826 को कोलकाता से हुई थी, जब जुगुल किशोर शुक्ल ने हिंदी के पहले समाचार पत्र उदंत मार्तण्ड का शुभारंभ किया था। जब उन्होंने पत्र निकाला, तब देश गुलाम था। उन्होंने देश की आजादी के स्वर को तेज करने के लिए पत्रकारिता को माध्यम बनाया था। 200 वर्ष से बिना रुके, बिना थके, बिना डिगे पत्रकारिता की यह शानदार यात्रा आगे बढ़ रही है। 

 

सही तथ्य से होता है मजबूत जन-विश्वास का निर्माण

मुख्यमंत्री ने कहा कि पत्रकारिता जब एक सामान्य व्यक्ति के स्वर के साथ अपना स्वर मिलाती है, और सही तथ्यों को जनता के सम्मुख रखती है, तब एक मजबूत जन-विश्वास का निर्माण होता है। जो पत्रकारिता जन-विश्वास का प्रतीक बनती है, उसे दुनिया की कोई शक्ति विचलित नहीं कर सकती। पत्रकारिता ने कठिन मार्गों का अनुसरण करते हुए सदैव अपने लक्ष्यों को प्राप्त किया है। सीएम योगी ने स्वतंत्रता आंदोलन और देशसेवा के लिए महात्मा गांधी, बाल गंगाधर तिलक, गणेश शंकर विद्यार्थी, अटल बिहारी वाजपेयी द्वारा भी पत्रकारिता को माध्यम बनाने का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि बाल गंगाधर तिलक ने 1916 में लखनऊ से ‘स्वराज मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है’ के नारे को पत्रकारिता के माध्यम से जन-मानस में संचारित किया था। वर्ष 2017 में इस नारे के 100 वर्ष पूरे होने पर प्रदेश सरकार द्वारा विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए।

 

विघटनकारी शक्तियों की चुनौती हमेशा सामने

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय पत्रकारिता का आधार हमारे उपनिषदों से प्रेरित रहा है। यह प्रेरणा उपनिषदों की ‘सत्यमेव जयते’ सूक्ति से प्राप्त होती है। समाज में विघटनकारी शक्तियों की चुनौती पत्रकारिता के सामने हमेशा रही है। ये शक्तियां पत्रकारिता की स्वतंत्रता को बाधित करती रही हैं। इन बाधाओं से विचलित हुए बिना हमें इसको बढ़ाए रखना है, क्योंकि हमारी पत्रकारिता उपनिषदों के मूल्यों पर आधारित है, जहां सत्य की निश्चित विजय का भाव समाहित है।

 

अपराध व भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति निरंतर जारी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने अपराध व अपराधियों तथा भ्रष्टाचार व भ्रष्टाचारियों के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति को निरंतर जारी रखा है। समाज के प्रत्येक वर्ग को जन कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त हो रहा है। सरकार ने पत्रकारों के लिए भी विभिन्न आवासीय योजनाएं चलाई हैं। मान्यता प्राप्त पत्रकारों को कैशलेस चिकित्सा सुविधा का लाभ दिया जा रहा है। 

 

तीन करोड़ की आबादी गोरखपुर पर निर्भर

मुख्यमंत्री ने कहा कि आज तीन करोड़़ की आबादी शिक्षा, व्यापार व रोजगार हेतु गोरखपुर महानगर पर निर्भर है। पूर्वी यूपी, पश्चिमी बिहार और नेपाल की एक बड़ी आबादी गोरखपुर पर निर्भर रहती है। गोरखपुर में पत्रकारिता की दिशा, लोगों के मन में राष्ट्रभक्ति के भाव को बढ़ाने वाली होनी चाहिए। आत्मनिर्भर विकसित भारत की संकल्पना को आगे बढ़ाने में पत्रकारिता को मजबूती के साथ आगे आना चाहिए। यह बेहद महत्वपूर्ण होगा।

 

मुख्यमंत्री ने कहा कि गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की स्थापना 1998 में हुई। इसमें शामिल सदस्यों को तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का सानिध्य प्राप्त था। मुझे विगत वर्ष भी गोरखपुर प्रेस क्लब के सदस्यों के शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने का सौभाग्य प्राप्त हुआ था। गोरखपुर प्रेस क्लब की स्थापना में अध्यक्ष के रूप में एसपी त्रिपाठी तथा सचिव के रूप में अरविन्द शुक्ला ने महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वहन किया था। सरकार द्वारा प्रेस क्लब को एक भव्य भवन दिया गया, जहां पत्रकारिता के कार्य को सुगमता से सम्पन्न किया जा रहा है।

 

महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने दिलाई शपथ

समारोह में महापौर डॉ. मंगलेश श्रीवास्तव ने गोरखपुर जर्नलिस्ट्स प्रेस क्लब की नई कार्यकारिणी के पदाधिकारियों अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी, उपाध्यक्ष धनेश कुमार, महामंत्री पंकज श्रीवास्तव, संयुक्त मंत्री महेंद्र गौड़, कोषाध्यक्ष दुर्गेश यादव, पुस्तकालय मंत्री संजय कुमार, कार्यकारिणी सदस्य मनोज कुमार मिश्रा, रजनीश त्रिपाठी और अजीत सिंह को शपथ दिलाई। कार्यक्रम में स्वागत संबोधन प्रेस क्लब अध्यक्ष ओंकार धर द्विवेदी ने, जबकि संचालन गजेंद्र त्रिपाठी और प्रेम पराया ने किया।

 

इस अवसर पर सांसद रवि किशन शुक्ल, विधान परिषद सदस्य एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र सिंह, राज्य महिला आयोग की उपाध्यक्ष चारू चौधरी, कालीबाड़ी के महंत रविंद्रदास, दैनिक जागरण के स्थानीय संपादक मदन मोहन सिंह, अमर उजाला के स्थानीय संपादक विनीत सक्सेना, राष्ट्रीय सहारा के पीयूष बंका, दैनिक आज के अखिलेश चंद, स्वतंत्र चेतना के आनंद जी वैश्य सहित बड़ी संख्या में पत्रकारों की सहभागिता रही। Edited by : Sudhir Sharma

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