RGV के जनमदिन पर पहुंचे राजपाल यादव, वायरल वीडियो में दिखें बेहद खुश, सलमान खान के सपोर्ट पर क्या बोले अभिनेता
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एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Anju Bajpai
Updated Wed, 08 Apr 2026 12:13 AM IST
Rajpal Yadav Viral Video: राजपाल यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में राजपाल बेहद खुश नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने बॉलीवुड से मिले सपोर्ट के बारे में भी बात की।
राजपाल यादव
– फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
राजपाल यादव के लिए आज दिन बेहद खास रहा। आज वह अपने पसंदीदा निर्देशक राम गोपाल वर्मा के जन्मदिन की पार्टी में शामिल हुए। इस दौरान पैपराजी ने सलमान खान को लेकर राजपाल से कई सवाल किए। जानिए क्या दिया अभिनेता ने जवाब?
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एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: Anju Bajpai
Updated Wed, 08 Apr 2026 12:13 AM IST
Rajpal Yadav Viral Video: राजपाल यादव का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। इस वीडियो में राजपाल बेहद खुश नजर आ रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने बॉलीवुड से मिले सपोर्ट के बारे में भी बात की।
राजपाल यादव – फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
राजपाल यादव के लिए आज दिन बेहद खास रहा। आज वह अपने पसंदीदा निर्देशक राम गोपाल वर्मा के जन्मदिन की पार्टी में शामिल हुए। इस दौरान पैपराजी ने सलमान खान को लेकर राजपाल से कई सवाल किए। जानिए क्या दिया अभिनेता ने जवाब?
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आज बुधवार को रोमांटिक-कॉमेडी ड्रामा फिल्म ‘जिंदगी ना मिलेगी दोबारा’ की रिलीज को पूरे 15 साल हो गए हैं। संगीतकार और गायक शंकर महादेवन ने इसके प्रसिद्ध गाने ‘सेनोरीटा’ को लेकर एक दिलचस्प खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि कैसे ‘सेनोरीटा’ गाने के निर्माण के दौरान घबराए हुए अभिनेता अभय देओल से यह गाना गवाया था।
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जिंदगी न मिलेगी दोबारा
– फोटो : सोशल मीडिया
‘सेनोरीटा’ को लेकर दिलचस्प खुलासा
शंकर महादेवन ने बताया कि ‘सेनोरीटा’ गाना फिल्म की कहानी के हिसाब से तैयार किया जाना था। कहानी में तीन दोस्त (ऋतिक, फरहान और अभय) थोड़े नशे में स्पेन के एक गांव से गुजर रहे होते हैं। वहां बज रहे स्पेनिश संगीत को सुनकर वे भी झूमने लगते हैं और स्पेनिश धुन में भारतीय स्टाइल का तड़का लगाते हैं।
जब संगीतकार जोड़ी शंकर-एहसान-लॉय ने इस गाने पर काम शुरू किया, तो उन्हें लगा कि यह गाना बहुत बड़ा हिट साबित हो सकता है। मशहूर गीतकार जावेद अख्तर ने इस गाने के लिए ‘सेनोरीटा’ शब्द का सुझाव दिया था।
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फिल्म ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’
– फोटो : सोशल मीडिया
घवराए हुए थे अभय
आईएएनएस के अनुसार, शंकर महादेवन ने सोचा कि क्यों न यह गाना तीनों अभिनेताओं की असली आवाज में ही रिकॉर्ड किया जाए। फरहान अख्तर पहले से ही गाते आए हैं, इसलिए उनके लिए यह आसान था। ऋतिक रोशन की आवाज भी बहुत सुरीली थी। लेकिन अभय देओल बिल्कुल नए थे और गाने को लेकर बेहद घबराए हुए थे।
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फिल्म ‘जिंदगी न मिलेगी दोबारा’
– फोटो : सोशल मीडिया
शंकर महादेवन ने चली चाल
अभय देओल गाना गाने के लिए बिल्कुल तैयार नहीं थे। तब शंकर महादेवन ने उनके साथ एक छोटा सा मजाक किया। उन्होंने अभय से कहा, ‘तुम बस स्टूडियो आ जाओ। हम कोई असली रिकॉर्डिंग नहीं कर रहे हैं, यह सिर्फ एक रिहर्सल है। माइक के सामने मजे करो। अगर सब ठीक रहा, तो असली रिकॉर्डिंग किसी और दिन करेंगे।’
अभय मान गए, लेकिन वे फिर भी डरे हुए थे। जब वे रिकॉर्डिंग रूम में गए, तो शंकर महादेवन ने चुपके से रिकॉर्डिंग चालू कर दी। उन्होंने अभय से कहा, ‘मैं जो गा रहा हूं, तुम बस मेरे पीछे-पीछे उसे दोहराओ।’ जब अभय देओल गाना गाकर बाहर आए, तो शंकर महादेवन ने हंसते हुए कहा, ‘हां भाई, गाना रिकॉर्ड हो गया।’
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जिंदगी न मिलेगी दोबारा
– फोटो : यूट्यूब ग्रैब
हैरान हुए अभय
अभय हैरान रह गए और उन्होंने शंकर से पूछा, ‘अरे सच में? पर मुझे असली रिकॉर्डिंग के लिए कब आना है?’ तब शंकर ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, ‘रिकॉर्डिंग तो हो चुकी है। अब सीधे फाइनल गाना ही सुनना।’ यह सुनकर अभय हैरान भी हुए और बहुत खुश भी हुए।
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स्टार प्लस का नया शो फितूर अपने नए प्रोमो के जरिए एक ऐसी कहानी लेकर आया है, जिससे कई लड़कियाँ खुद को जोड़ पाएंगी। यह प्रोमो उन भावनाओं को दिखाता है, जिनसे कई लड़कियाँ पहली बार गर्ल्स स्कूल से निकलकर को-एड कॉलेज में जाने के दौरान गुजरती हैं।
कई लड़कियों के लिए यह सिर्फ कॉलेज की शुरुआत नहीं होती, बल्कि एक नया अनुभव होता है। नए माहौल में घुलना-मिलना, झिझक, घबराहट और अनजान लोगों के बीच खुद को सहज महसूस करना आसान नहीं होता। फितूर इन्हीं भावनाओं को सामने लाते हुए लड़कियों को खुद पर भरोसा रखने और नई शुरुआत को आत्मविश्वास के साथ अपनाने का संदेश देता है।
प्रोमो पर बात करते हुए देबचंद्रिमा सिंहा रॉय ने कहा, "इस प्रोमो ने मुझे बहुत छू लिया क्योंकि यह ऐसी यात्रा है, जिससे बहुत-सी लड़कियाँ गुजरती हैं। गर्ल्स स्कूल के बाद पहली बार को-एड कॉलेज में जाना कई लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। मुझे उम्मीद है कि जो भी लड़की यह प्रोमो देखेगी, उसे लगेगा कि उसकी भावनाओं को समझा गया है। घबराना बिल्कुल सामान्य है। समय और खुद पर भरोसे के साथ हर नई शुरुआत एक खूबसूरत अध्याय बन जाती है।"
स्टार प्लस का नया शो फितूर अपने नए प्रोमो के जरिए एक ऐसी कहानी लेकर आया है, जिससे कई लड़कियाँ खुद को जोड़ पाएंगी। यह प्रोमो उन भावनाओं को दिखाता है, जिनसे कई लड़कियाँ पहली बार गर्ल्स स्कूल से निकलकर को-एड कॉलेज में जाने के दौरान गुजरती हैं।
कई लड़कियों के लिए यह सिर्फ कॉलेज की शुरुआत नहीं होती, बल्कि एक नया अनुभव होता है। नए माहौल में घुलना-मिलना, झिझक, घबराहट और अनजान लोगों के बीच खुद को सहज महसूस करना आसान नहीं होता। फितूर इन्हीं भावनाओं को सामने लाते हुए लड़कियों को खुद पर भरोसा रखने और नई शुरुआत को आत्मविश्वास के साथ अपनाने का संदेश देता है।
प्रोमो पर बात करते हुए देबचंद्रिमा सिंहा रॉय ने कहा, "इस प्रोमो ने मुझे बहुत छू लिया क्योंकि यह ऐसी यात्रा है, जिससे बहुत-सी लड़कियाँ गुजरती हैं। गर्ल्स स्कूल के बाद पहली बार को-एड कॉलेज में जाना कई लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। मुझे उम्मीद है कि जो भी लड़की यह प्रोमो देखेगी, उसे लगेगा कि उसकी भावनाओं को समझा गया है। घबराना बिल्कुल सामान्य है। समय और खुद पर भरोसे के साथ हर नई शुरुआत एक खूबसूरत अध्याय बन जाती है।"
Fitoor,emotional journey,girls,college, Hindi news">‘फितूर’ में दिखेगा को-एड कॉलेज में कदम रखने वाली लड़कियों का भावनात्मक सफर
स्टार प्लस का नया शो फितूर अपने नए प्रोमो के जरिए एक ऐसी कहानी लेकर आया है, जिससे कई लड़कियाँ खुद को जोड़ पाएंगी। यह प्रोमो उन भावनाओं को दिखाता है, जिनसे कई लड़कियाँ पहली बार गर्ल्स स्कूल से निकलकर को-एड कॉलेज में जाने के दौरान गुजरती हैं।
कई लड़कियों के लिए यह सिर्फ कॉलेज की शुरुआत नहीं होती, बल्कि एक नया अनुभव होता है। नए माहौल में घुलना-मिलना, झिझक, घबराहट और अनजान लोगों के बीच खुद को सहज महसूस करना आसान नहीं होता। फितूर इन्हीं भावनाओं को सामने लाते हुए लड़कियों को खुद पर भरोसा रखने और नई शुरुआत को आत्मविश्वास के साथ अपनाने का संदेश देता है।
प्रोमो पर बात करते हुए देबचंद्रिमा सिंहा रॉय ने कहा, "इस प्रोमो ने मुझे बहुत छू लिया क्योंकि यह ऐसी यात्रा है, जिससे बहुत-सी लड़कियाँ गुजरती हैं। गर्ल्स स्कूल के बाद पहली बार को-एड कॉलेज में जाना कई लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। मुझे उम्मीद है कि जो भी लड़की यह प्रोमो देखेगी, उसे लगेगा कि उसकी भावनाओं को समझा गया है। घबराना बिल्कुल सामान्य है। समय और खुद पर भरोसे के साथ हर नई शुरुआत एक खूबसूरत अध्याय बन जाती है।"
इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जिले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई।
इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।
7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।
चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल
बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।
वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण
इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।
उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास।
रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।
मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।
Jammu Kashmir Cloudburst, Jammu Kashmir Weather, Cloudburst News, Flash Flood Jammu Kashmir, Doda Cloudburst, Anantnag Weather, Gurez Valley News, Himalaya Climate Change, Landslide Jammu Kashmir, IMD Weather News, जम्मू कश्मीर बादल फटे, बादल फटने की घटनाएं, जम्मू कश्मीर मौसम">
इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जिले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई।
इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।
7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।
चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल
बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।
वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण
इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।
उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास।
रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।
मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।
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लंबे सूखे के बाद इंद्र देवता जम्मू कश्मीर पर कुछ मेहरबान तो हुए पर बादल फटने की लगातार हो रही घटनाएं अब डराने लगी हैं। यह डर इसलिए है क्योंकि जम्मू कश्मीर में इस महीने अब तक कम से कम 15 बार बादल फटने की घटनाएं हुई हैं, जिनकी वजह से कई जिलों में अचानक बाढ़, कीचड़ बहने और जमीन खिसकने (लैंडस्लाइड) की घटनाएं हुई हैं। ALSO READ: अब वैष्णो देवी चढ़ावे में घोटाला! 550 करोड़ की चांदी के गबन का आरोप
बादल फटने से भारी तबाही
इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जिले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई।
इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।
7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।
चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल
बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।
वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण
इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।
उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास।
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मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।
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