सिंहस्थ-2028 को देखते हुए रेलवे ने इंदौर एवं उज्जैन सहित आसपास के स्टेशनों पर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसमें सबसे खास बात यह है कि इंदौर से उज्जैन एवं …और पढ़ें
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। सिंहस्थ-2028 को देखते हुए रेलवे ने इंदौर एवं उज्जैन सहित आसपास के स्टेशनों पर तैयारियां तेज कर दी हैं। इसमें सबसे खास बात यह है कि इंदौर से उज्जैन एवं नागदा से भोपाल के बीच आटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम लगाए जाएंगे। इससे ट्रेनों का अावागमन ज्यादा सुगम, सुरक्षित होने के साथ ही यात्रियों का समय भी बचेगा। फिलहाल नागदा से गोधरा (गुजरात) सेक्शन पर आटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है। ट्रेनों की गति बढ़ाने और दुर्घटनाओं को कम करने के लिए रेलवे ने नागदा से गोधरा (गुजरात) सेक्शन पर आटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा कर लिया है।
टेंडर प्रक्रिया और रेल बायपास लाइन का निर्माण
जल्द ही रेलवे अब इंदौर-उज्जैन एवं नागदा-भोपाल के लिए टेंडर प्रक्रिया करेगा। यह योजना स्वीकृत है। रेलवे का लक्ष्य यही है कि सिंहस्थ के पहले यह काम पूरा कर लिया जाए। इससे ट्रेनों को फायदा होगा। इसके अलावा इंदौर-उज्जैन के आसपास के स्टेशनों का नवीनीकरण भी होगा। रेलवे नईखेड़ी-चिंतामण गणेश के बीच रेल बायपास लाइन बनाएगा, जिससे ट्रेनों को इंजन की दिशा बदलने की जरूरत नहीं होगी और संचालन तेज होगा।
इंदौर और उज्जैन के स्टेशनों का होगा कायाकल्प
पश्चिम रेलवे इंदौर स्टेशन का 412 करोड़ की लागत से नवनिर्माण कर रहा है। लक्ष्मीबाई नगर में भी स्टेशन के नए भवन का काम चल रहा है। साथ ही दो प्लेटफार्म भी बढ़ाए जा रहे हैं। वहीं, बाणगंगा, राऊ, राजेंद्र नगर, चंद्रावतीगंज और गौतमपुरा स्टेशनों को भी अपग्रेड करने की मांग उठी है। उज्जैन में भी उज्जैन, विक्रमनगर, चिंतामण गणेश, पिंगलेश्वर और नईखेड़ी स्टेशनों का विकास और नवीनीकरण किया जाएगा। सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि सिंहस्थ के दौरान इंदौर पर भी काफी दबाव रहेगा, ऐसे में सभी स्टेशनों का विकास किया जाए। साथ ही इंदौर में कोच मेंटेनेंस के लिए कोचिंग हब बनाने और पिट लाइन को विकसित किया जाए।
सुरक्षा के लिए बैरिकेडिंग और अधिकारियों का पक्ष
रेलवे अब इंदौर-उज्जैन एवं नागदा तक पूरे रेलवे ट्रैक के आसपास बैरिकेडिंग करेगा। इसको लेकर टेंडर प्रक्रिया भी हो चुकी है। जनसंपर्क अधिकारी मुकेश कुमार के अनुसार, नागदा-गोधरा सेक्शन में आटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम का काम पूरा हो चुका है। अब नागदा से भोपाल और उज्जैन से इंदौर सेक्शन के बीच की योजना स्वीकृत है। दोनों सेक्शन में काम शुरू होगा। इससे ट्रेनों की गति बढ़ेगी और यात्रियों के समय की बचत होगी।
आटोमैटिक सिग्नलिंग सिस्टम के प्रमुख फायदे
- ट्रैक मैनेजमेंट: इस सिस्टम में ट्रैक छोटे-छोटे ब्लॉक्स में बंट जाता है, जिससे एक ही लाइन पर ज्यादा ट्रेनें सुरक्षित दूरी बनाए रखते हुए चल सकती हैं।
- दुर्घटना से बचाव: अगर आगे ट्रैक पर ट्रेन है तो सिग्नल अपने आप लाल हो जाता है। इससे टक्कर और दुर्घटना की आशंका बहुत कम हो जाती है।
- समय की बचत: ट्रेनों को बार-बार रुकना नहीं पड़ता, सिग्नल आटोमैटिक बदलते हैं। इससे यात्रा का समय कम होता है और ट्रेनें समय पर चलती हैं।
- तकनीकी सटीकता: मैनुअल सिग्नलिंग में गलती की संभावना रहती है, लेकिन आटोमैटिक सिस्टम में सेंसर और तकनीक काम करती है, जिससे गलती की गुंजाइश कम होती है।
- बेहतर मॉनिटरिंग: स्टेशन और कंट्रोल रूम से ट्रेन मूवमेंट की बेहतर मॉनिटरिंग होती है, जिससे पूरी रेल व्यवस्था सुचारू रहती है।
- भीड़ प्रबंधन: सिंहस्थ में भारी भीड़ रहेगी। रेलवे देशभर से ट्रेनों का संचालन करेगा। आटोमैटिक सिग्नलिंग से ज्यादा ट्रेनें चलाकर भीड़ को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है।
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