शाहपुरा तालाब इस समय चूहों के आतंक की चपेट में है। एक से डेढ़ किलो वजनी इन चूहों ने तालाब की पाल, फुटपाथ और आसपास की सड़कों को खोखला करना शुरू कर दिया …और पढ़ें
नवदुनिया प्रतिनिधि, भोपाल। शाहपुरा तालाब इस समय चूहों के आतंक की चपेट में है। एक से डेढ़ किलो वजनी इन चूहों ने तालाब की पाल, फुटपाथ और आसपास की सड़कों को खोखला करना शुरू कर दिया है। स्थिति इतनी गंभीर है कि नगर निगम द्वारा करोड़ों की लागत से कराए जा रहे पिचिंग और सुंदरीकरण कार्य के भविष्य पर सवालिया निशान लग गया है।
करोड़ों का सुंदरीकरण कार्य और पिचिंग को खतरा
नगर निगम ने करीब 6.50 करोड़ रुपये लागत से शाहपुरा तालाब के कायाकल्प की योजना तैयार की है। इसमें तालाब की पिचिंग का काम प्रमुख है, लेकिन चूहों के कारण पिचिंग के लंबे तक टिक पाना मुश्किल लग रहा है। चूहे अंदर ही अंदर जमीन को खोखला करते रहेंगे तो पिचिंग में लगाए जा रहे पत्थर भी टिक नहीं पाएंगे और नीचे धंस जाएंगे। इन चूहों के यहां पनपने की वजह है लोगों का यहां पर इन्हें खाना डालना। वहीं, तालाब किनारे बने ऋषभदेव पार्क की जमीन को भी चूहे खोखली कर रहे हैं। यहां तालाब के पास की क्यारियों में चूहों ने 50 से भी ज्यादा बिल खोद दिए हैं।
अवैध कचरा और फीडिंग बनी मुख्य वजह
तालाब किनारे चूहों की इस अनियंत्रित संख्या का मुख्य कारण स्थानीय लोगों द्वारा डाली जा रही खाद्य सामग्री है। लोग यहां खुलेआम रोटी, मुरमुरे और दाल डाल रहे हैं। इसके अतिरिक्त, आसपास के रहवासियों द्वारा फेंका जा रहा कचरा इन चूहों के लिए सुरक्षित प्रजनन स्थल बन गया है। गंदगी और निरंतर मिल रहे भोजन के कारण चूहों ने यहां स्थायी ठिकाना बना लिया है।
तालाब के कायाकल्प और विकास का प्रस्ताव
तालाब किनारे बनाया जाएगा पाथवे शाहपुरा तालाब में भी इसी तरह डीसिल्टिंग कर गाद निकाली जाएगी और किनारों पर पिचिंग की जाएगी। यहां एक फव्वारा पहले से लगा हुआ है, जबकि सात नए फव्वारे लगाने का प्रस्ताव है। तालाब के आसपास पाथवे का निर्माण, पौधारोपण और विद्युत व्यवस्था की जाएगा। एक नया पार्क भी विकसित किया जाएगा।
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खाना मिलना बंद हो तो हट सकते हैं चूहे
तालाब के किनारे एक से डेढ़ किलो तक के चूहे हैं तो इससे पिचिंग का काम सफल नहीं हो पाएगा। चूहों जमीन को अंदर से खोखला कर देंगे तो पिचिंग के लिए लगाए गए पत्थर धंस जाएंगे और पैसा व्यर्थ चला जाएगा। तालाब के किनारे पर आसपास के रहवासियों द्वारा कचरा डाला जाता है, जिस पर कोई रोक-टोक नहीं है। चूहों को यहां से सुरक्षित रूप से हटाने के लिए उन्हें खाना डालना बंद करना होगा और आसपास सफाई रखनी होगी। चूहों को सफाई पसंद नहीं होती है, जिससे वे खुद यहां से भाग जाएंगे।- सुभाष सी. पांडे, पर्यावरणविद
लोग तालाब किनारे खाना डाल जाते हैं, जिससे चूहों को खाना मिल रहा है। अभी तालाब की पिचिंग की जा रही है। इसके बाद चूहों को सुरक्षित रूप से हटाने की कार्ययोजना तैयार कर इन्हें यहां से हटाया जाएगा। – प्रमोद मालवीय, प्रभारी, झील संरक्षण प्रकोष्ठ, नगर निगम
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