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अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच चीन का मास्टरस्ट्रोक: दुनिया तेल के लिए तरसी, बीजिंग ने लगा दिया जैकपॉट!
	
		
			
	
	क्या आपने कभी सोचा है कि जब पूरी दुनिया युद्ध के डर से पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को देख कर कांप रही है, तब एक देश ऐसा भी है जो शांति से बैठकर मुस्कुरा रहा है? हम बात कर रहे हैं चीन की। जब दुनिया 'Strait of Hormuz' (होर्मुज जलडमरूमध्य) के बंद होने से ग्लोबल सप्लाई चेन ठप होने का डर जता रही थी, तब चीन ने अपने 'Strategic Reserves' के ताले खोल दिए हैं। लेकिन ट्विस्ट ये है कि चीन ने यह तैयारी आज नहीं, बल्कि साल भर पहले ही पूरी कर ली थी।

	 

	Axios की रिपोर्ट: चीन का 'बिहाइंड द कर्टेन' प्लान

	एमी हार्डर (Axios) की हालिया विश्लेषण रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने ईरान युद्ध शुरू होने से पहले ही कच्चे तेल का इतना विशाल भंडार जमा कर लिया था कि अब वह सबसे बड़े 'Winner' के रूप में उभरा है।

	 

	एक्सियोस के CEO जिम वांडेहेई के मुताबिक, यह युद्ध चीन के लिए एक 'Stress Test' की तरह था। बीजिंग की ऊर्जा रणनीति को पहले से ही इस तरह डिजाइन किया गया था कि अगर ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई रुकती भी है, तो चीन की अर्थव्यवस्था को आंच न आए।

	 

	आंकड़ों की जुबानी: चीन बनाम अमेरिका

	चीन ने 2025 में जिस रफ़्तार से अपना तेल भंडार भरा है, वह हैरान करने वाला है। आइए कुछ आंकड़ों पर नजर डालते हैं:

	 

	चीन की बढ़त: 2025 में चीन ने रोजाना औसतन 1.1 मिलियन बैरल तेल अपने रणनीतिक भंडार में जोड़ा।

	 

	कुल स्टॉकपाइल: दिसंबर 2025 तक चीन का भंडार 1.4 बिलियन बैरल तक पहुँच गया था।

	 

	अमेरिका की स्थिति: अमेरिका का Strategic Petroleum Reserve (SPR) मार्च में गिरकर महज 409 मिलियन बैरल रह गया है।

	 

	IEA का कोऑर्डिनेशन: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने 400 मिलियन बैरल तेल जारी किया, लेकिन चीन इसका हिस्सा नहीं था क्योंकि वह गैर-सदस्य है। इसका मतलब है कि चीन का भंडार पूरी तरह सुरक्षित है।

	 

	चीन ने आखिर यह कैसे किया? 

	ऑक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी स्टडीज के अनुसार, चीन के इस 'मास्टरस्ट्रोक' के पीछे तीन बड़े कारण थे:

	 

	Discounted Oil: रूस, वेनेजुएला और ईरान पर लगे प्रतिबंधों के कारण चीन ने इन देशों से भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल खरीदा।

	 

	Domestic Energy Law: चीन ने एक नया घरेलू ऊर्जा कानून लागू किया, जिसने कंपनियों के लिए 'Minimum Reserve' रखना अनिवार्य कर दिया।

	 

	Low Demand Advantage: जब वैश्विक स्तर पर मांग थोड़ी नरम थी और कीमतें कम थीं, तब चीन ने अपनी पूरी स्टोरेज क्षमता का इस्तेमाल किया।

	 

	 “चीन की रणनीति सिर्फ तेल जमा करने तक सीमित नहीं है। वह 'Double-Edged Sword' पर खेल रहा है। एक तरफ उसके पास सस्ता तेल है, और दूसरी तरफ वह रिन्यूएबल एनर्जी की 70% सप्लाई चेन को कंट्रोल करता है। जब तेल महंगा होगा, दुनिया सोलर और EV की तरफ भागेगी, जहां फिर से चीन ही खड़ा मिलेगा।”

	 

	सिर्फ तेल ही नहीं, रिन्यूएबल एनर्जी पर भी कब्ज़ा

	युद्ध की वजह से जब तेल की कीमतें आसमान छूती हैं, तो देश 'Alternative Energy' की तलाश करते हैं। यहाँ चीन का असली खेल शुरू होता है।

	 

	Solar & Wind: दुनिया के 70% से अधिक सोलर पैनल और विंड टर्बाइन सप्लाई चेन पर चीन का नियंत्रण है।

	 

	Battery & EV: इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी लिथियम-आयन बैटरी के मार्केट में चीन का कोई मुकाबला नहीं है।

	 

	The Switch: जैसे ही तेल-आयात करने वाले देश (जैसे भारत या यूरोपीय देश) रिन्यूएबल की तरफ मुड़ेंगे, उन्हें चीन से ही सामान खरीदना होगा। यानी हर हाल में फायदा बीजिंग का ही है।

	 

	भारत के लिए क्या है सबक?

	भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। चीन की यह 'Strategic Foresight' (दूरदर्शिता) भारत के लिए एक अलार्म है। जहाँ अमेरिका जैसा सुपरपावर अपने रिजर्व खाली कर चुका है, वहीं चीन का भरा हुआ भंडार उसे युद्ध के समय सौदेबाजी की ताकत (Bargaining Power) देता है।

	 

	जिम वांडेहेई के 'Behind the Curtain' कॉलम से यह साफ़ है कि बीजिंग ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर जो 'Stress Test' पास किया है, वह उसे आने वाले दशकों तक ग्लोबल लीडर बनाए रख सकता है। युद्ध के बीच जहाँ अमेरिका के लिए अपना रिजर्व दोबारा भरना नामुमकिन लग रहा है, वहीं चीन अपने 1.4 बिलियन बैरल के साथ चैन की नींद सो रहा है।

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच चीन का मास्टरस्ट्रोक: दुनिया तेल के लिए तरसी, बीजिंग ने लगा दिया जैकपॉट!

अमेरिका-ईरान युद्ध के बीच चीन का मास्टरस्ट्रोक: दुनिया तेल के लिए तरसी, बीजिंग ने लगा दिया जैकपॉट!
	
		
			
	
	क्या आपने कभी सोचा है कि जब पूरी दुनिया युद्ध के डर से पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को देख कर कांप रही है, तब एक देश ऐसा भी है जो शांति से बैठकर मुस्कुरा रहा है? हम बात कर रहे हैं चीन की। जब दुनिया 'Strait of Hormuz' (होर्मुज जलडमरूमध्य) के बंद होने से ग्लोबल सप्लाई चेन ठप होने का डर जता रही थी, तब चीन ने अपने 'Strategic Reserves' के ताले खोल दिए हैं। लेकिन ट्विस्ट ये है कि चीन ने यह तैयारी आज नहीं, बल्कि साल भर पहले ही पूरी कर ली थी।

	 

	Axios की रिपोर्ट: चीन का 'बिहाइंड द कर्टेन' प्लान

	एमी हार्डर (Axios) की हालिया विश्लेषण रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने ईरान युद्ध शुरू होने से पहले ही कच्चे तेल का इतना विशाल भंडार जमा कर लिया था कि अब वह सबसे बड़े 'Winner' के रूप में उभरा है।

	 

	एक्सियोस के CEO जिम वांडेहेई के मुताबिक, यह युद्ध चीन के लिए एक 'Stress Test' की तरह था। बीजिंग की ऊर्जा रणनीति को पहले से ही इस तरह डिजाइन किया गया था कि अगर ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई रुकती भी है, तो चीन की अर्थव्यवस्था को आंच न आए।

	 

	आंकड़ों की जुबानी: चीन बनाम अमेरिका

	चीन ने 2025 में जिस रफ़्तार से अपना तेल भंडार भरा है, वह हैरान करने वाला है। आइए कुछ आंकड़ों पर नजर डालते हैं:

	 

	चीन की बढ़त: 2025 में चीन ने रोजाना औसतन 1.1 मिलियन बैरल तेल अपने रणनीतिक भंडार में जोड़ा।

	 

	कुल स्टॉकपाइल: दिसंबर 2025 तक चीन का भंडार 1.4 बिलियन बैरल तक पहुँच गया था।

	 

	अमेरिका की स्थिति: अमेरिका का Strategic Petroleum Reserve (SPR) मार्च में गिरकर महज 409 मिलियन बैरल रह गया है।

	 

	IEA का कोऑर्डिनेशन: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने 400 मिलियन बैरल तेल जारी किया, लेकिन चीन इसका हिस्सा नहीं था क्योंकि वह गैर-सदस्य है। इसका मतलब है कि चीन का भंडार पूरी तरह सुरक्षित है।

	 

	चीन ने आखिर यह कैसे किया? 

	ऑक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी स्टडीज के अनुसार, चीन के इस 'मास्टरस्ट्रोक' के पीछे तीन बड़े कारण थे:

	 

	Discounted Oil: रूस, वेनेजुएला और ईरान पर लगे प्रतिबंधों के कारण चीन ने इन देशों से भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल खरीदा।

	 

	Domestic Energy Law: चीन ने एक नया घरेलू ऊर्जा कानून लागू किया, जिसने कंपनियों के लिए 'Minimum Reserve' रखना अनिवार्य कर दिया।

	 

	Low Demand Advantage: जब वैश्विक स्तर पर मांग थोड़ी नरम थी और कीमतें कम थीं, तब चीन ने अपनी पूरी स्टोरेज क्षमता का इस्तेमाल किया।

	 

	 “चीन की रणनीति सिर्फ तेल जमा करने तक सीमित नहीं है। वह 'Double-Edged Sword' पर खेल रहा है। एक तरफ उसके पास सस्ता तेल है, और दूसरी तरफ वह रिन्यूएबल एनर्जी की 70% सप्लाई चेन को कंट्रोल करता है। जब तेल महंगा होगा, दुनिया सोलर और EV की तरफ भागेगी, जहां फिर से चीन ही खड़ा मिलेगा।”

	 

	सिर्फ तेल ही नहीं, रिन्यूएबल एनर्जी पर भी कब्ज़ा

	युद्ध की वजह से जब तेल की कीमतें आसमान छूती हैं, तो देश 'Alternative Energy' की तलाश करते हैं। यहाँ चीन का असली खेल शुरू होता है।

	 

	Solar & Wind: दुनिया के 70% से अधिक सोलर पैनल और विंड टर्बाइन सप्लाई चेन पर चीन का नियंत्रण है।

	 

	Battery & EV: इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी लिथियम-आयन बैटरी के मार्केट में चीन का कोई मुकाबला नहीं है।

	 

	The Switch: जैसे ही तेल-आयात करने वाले देश (जैसे भारत या यूरोपीय देश) रिन्यूएबल की तरफ मुड़ेंगे, उन्हें चीन से ही सामान खरीदना होगा। यानी हर हाल में फायदा बीजिंग का ही है।

	 

	भारत के लिए क्या है सबक?

	भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। चीन की यह 'Strategic Foresight' (दूरदर्शिता) भारत के लिए एक अलार्म है। जहाँ अमेरिका जैसा सुपरपावर अपने रिजर्व खाली कर चुका है, वहीं चीन का भरा हुआ भंडार उसे युद्ध के समय सौदेबाजी की ताकत (Bargaining Power) देता है।

	 

	जिम वांडेहेई के 'Behind the Curtain' कॉलम से यह साफ़ है कि बीजिंग ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर जो 'Stress Test' पास किया है, वह उसे आने वाले दशकों तक ग्लोबल लीडर बनाए रख सकता है। युद्ध के बीच जहाँ अमेरिका के लिए अपना रिजर्व दोबारा भरना नामुमकिन लग रहा है, वहीं चीन अपने 1.4 बिलियन बैरल के साथ चैन की नींद सो रहा है।

क्या आपने कभी सोचा है कि जब पूरी दुनिया युद्ध के डर से पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को देख कर कांप रही है, तब एक देश ऐसा भी है जो शांति से बैठकर मुस्कुरा रहा है? हम बात कर रहे हैं चीन की। जब दुनिया 'Strait of Hormuz' (होर्मुज जलडमरूमध्य) के बंद होने से ग्लोबल सप्लाई चेन ठप होने का डर जता रही थी, तब चीन ने अपने 'Strategic Reserves' के ताले खोल दिए हैं। लेकिन ट्विस्ट ये है कि चीन ने यह तैयारी आज नहीं, बल्कि साल भर पहले ही पूरी कर ली थी।

 

Axios की रिपोर्ट: चीन का 'बिहाइंड द कर्टेन' प्लान

एमी हार्डर (Axios) की हालिया विश्लेषण रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने ईरान युद्ध शुरू होने से पहले ही कच्चे तेल का इतना विशाल भंडार जमा कर लिया था कि अब वह सबसे बड़े 'Winner' के रूप में उभरा है।

 

एक्सियोस के CEO जिम वांडेहेई के मुताबिक, यह युद्ध चीन के लिए एक 'Stress Test' की तरह था। बीजिंग की ऊर्जा रणनीति को पहले से ही इस तरह डिजाइन किया गया था कि अगर ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई रुकती भी है, तो चीन की अर्थव्यवस्था को आंच न आए।

 

आंकड़ों की जुबानी: चीन बनाम अमेरिका

चीन ने 2025 में जिस रफ़्तार से अपना तेल भंडार भरा है, वह हैरान करने वाला है। आइए कुछ आंकड़ों पर नजर डालते हैं:

 

चीन की बढ़त: 2025 में चीन ने रोजाना औसतन 1.1 मिलियन बैरल तेल अपने रणनीतिक भंडार में जोड़ा।

 

कुल स्टॉकपाइल: दिसंबर 2025 तक चीन का भंडार 1.4 बिलियन बैरल तक पहुँच गया था।

 

अमेरिका की स्थिति: अमेरिका का Strategic Petroleum Reserve (SPR) मार्च में गिरकर महज 409 मिलियन बैरल रह गया है।

 

IEA का कोऑर्डिनेशन: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने 400 मिलियन बैरल तेल जारी किया, लेकिन चीन इसका हिस्सा नहीं था क्योंकि वह गैर-सदस्य है। इसका मतलब है कि चीन का भंडार पूरी तरह सुरक्षित है।

 

चीन ने आखिर यह कैसे किया? 

ऑक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी स्टडीज के अनुसार, चीन के इस 'मास्टरस्ट्रोक' के पीछे तीन बड़े कारण थे:

 

Discounted Oil: रूस, वेनेजुएला और ईरान पर लगे प्रतिबंधों के कारण चीन ने इन देशों से भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल खरीदा।

 

Domestic Energy Law: चीन ने एक नया घरेलू ऊर्जा कानून लागू किया, जिसने कंपनियों के लिए 'Minimum Reserve' रखना अनिवार्य कर दिया।

 

Low Demand Advantage: जब वैश्विक स्तर पर मांग थोड़ी नरम थी और कीमतें कम थीं, तब चीन ने अपनी पूरी स्टोरेज क्षमता का इस्तेमाल किया।

 

 “चीन की रणनीति सिर्फ तेल जमा करने तक सीमित नहीं है। वह 'Double-Edged Sword' पर खेल रहा है। एक तरफ उसके पास सस्ता तेल है, और दूसरी तरफ वह रिन्यूएबल एनर्जी की 70% सप्लाई चेन को कंट्रोल करता है। जब तेल महंगा होगा, दुनिया सोलर और EV की तरफ भागेगी, जहां फिर से चीन ही खड़ा मिलेगा।”

 

सिर्फ तेल ही नहीं, रिन्यूएबल एनर्जी पर भी कब्ज़ा

युद्ध की वजह से जब तेल की कीमतें आसमान छूती हैं, तो देश 'Alternative Energy' की तलाश करते हैं। यहाँ चीन का असली खेल शुरू होता है।

 

Solar & Wind: दुनिया के 70% से अधिक सोलर पैनल और विंड टर्बाइन सप्लाई चेन पर चीन का नियंत्रण है।

 

Battery & EV: इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी लिथियम-आयन बैटरी के मार्केट में चीन का कोई मुकाबला नहीं है।

 

The Switch: जैसे ही तेल-आयात करने वाले देश (जैसे भारत या यूरोपीय देश) रिन्यूएबल की तरफ मुड़ेंगे, उन्हें चीन से ही सामान खरीदना होगा। यानी हर हाल में फायदा बीजिंग का ही है।

 

भारत के लिए क्या है सबक?

भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। चीन की यह 'Strategic Foresight' (दूरदर्शिता) भारत के लिए एक अलार्म है। जहाँ अमेरिका जैसा सुपरपावर अपने रिजर्व खाली कर चुका है, वहीं चीन का भरा हुआ भंडार उसे युद्ध के समय सौदेबाजी की ताकत (Bargaining Power) देता है।

 

जिम वांडेहेई के 'Behind the Curtain' कॉलम से यह साफ़ है कि बीजिंग ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर जो 'Stress Test' पास किया है, वह उसे आने वाले दशकों तक ग्लोबल लीडर बनाए रख सकता है। युद्ध के बीच जहाँ अमेरिका के लिए अपना रिजर्व दोबारा भरना नामुमकिन लग रहा है, वहीं चीन अपने 1.4 बिलियन बैरल के साथ चैन की नींद सो रहा है।

क्या आपने कभी सोचा है कि जब पूरी दुनिया युद्ध के डर से पेट्रोल-डीजल की बढ़ती कीमतों को देख कर कांप रही है, तब एक देश ऐसा भी है जो शांति से बैठकर मुस्कुरा रहा है? हम बात कर रहे हैं चीन की। जब दुनिया 'Strait of Hormuz' (होर्मुज जलडमरूमध्य) के बंद होने से ग्लोबल सप्लाई चेन ठप होने का डर जता रही थी, तब चीन ने अपने 'Strategic Reserves' के ताले खोल दिए हैं। लेकिन ट्विस्ट ये है कि चीन ने यह तैयारी आज नहीं, बल्कि साल भर पहले ही पूरी कर ली थी।

 

Axios की रिपोर्ट: चीन का 'बिहाइंड द कर्टेन' प्लान

एमी हार्डर (Axios) की हालिया विश्लेषण रिपोर्ट ने पूरी दुनिया के भू-राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने ईरान युद्ध शुरू होने से पहले ही कच्चे तेल का इतना विशाल भंडार जमा कर लिया था कि अब वह सबसे बड़े 'Winner' के रूप में उभरा है।

 

एक्सियोस के CEO जिम वांडेहेई के मुताबिक, यह युद्ध चीन के लिए एक 'Stress Test' की तरह था। बीजिंग की ऊर्जा रणनीति को पहले से ही इस तरह डिजाइन किया गया था कि अगर ग्लोबल मार्केट में तेल की सप्लाई रुकती भी है, तो चीन की अर्थव्यवस्था को आंच न आए।

 

आंकड़ों की जुबानी: चीन बनाम अमेरिका

चीन ने 2025 में जिस रफ़्तार से अपना तेल भंडार भरा है, वह हैरान करने वाला है। आइए कुछ आंकड़ों पर नजर डालते हैं:

 

चीन की बढ़त: 2025 में चीन ने रोजाना औसतन 1.1 मिलियन बैरल तेल अपने रणनीतिक भंडार में जोड़ा।

 

कुल स्टॉकपाइल: दिसंबर 2025 तक चीन का भंडार 1.4 बिलियन बैरल तक पहुँच गया था।

 

अमेरिका की स्थिति: अमेरिका का Strategic Petroleum Reserve (SPR) मार्च में गिरकर महज 409 मिलियन बैरल रह गया है।

 

IEA का कोऑर्डिनेशन: अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी (IEA) ने 400 मिलियन बैरल तेल जारी किया, लेकिन चीन इसका हिस्सा नहीं था क्योंकि वह गैर-सदस्य है। इसका मतलब है कि चीन का भंडार पूरी तरह सुरक्षित है।

 

चीन ने आखिर यह कैसे किया? 

ऑक्सफोर्ड इंस्टीट्यूट फॉर एनर्जी स्टडीज के अनुसार, चीन के इस 'मास्टरस्ट्रोक' के पीछे तीन बड़े कारण थे:

 

Discounted Oil: रूस, वेनेजुएला और ईरान पर लगे प्रतिबंधों के कारण चीन ने इन देशों से भारी डिस्काउंट पर कच्चा तेल खरीदा।

 

Domestic Energy Law: चीन ने एक नया घरेलू ऊर्जा कानून लागू किया, जिसने कंपनियों के लिए 'Minimum Reserve' रखना अनिवार्य कर दिया।

 

Low Demand Advantage: जब वैश्विक स्तर पर मांग थोड़ी नरम थी और कीमतें कम थीं, तब चीन ने अपनी पूरी स्टोरेज क्षमता का इस्तेमाल किया।

 

 “चीन की रणनीति सिर्फ तेल जमा करने तक सीमित नहीं है। वह 'Double-Edged Sword' पर खेल रहा है। एक तरफ उसके पास सस्ता तेल है, और दूसरी तरफ वह रिन्यूएबल एनर्जी की 70% सप्लाई चेन को कंट्रोल करता है। जब तेल महंगा होगा, दुनिया सोलर और EV की तरफ भागेगी, जहां फिर से चीन ही खड़ा मिलेगा।”

 

सिर्फ तेल ही नहीं, रिन्यूएबल एनर्जी पर भी कब्ज़ा

युद्ध की वजह से जब तेल की कीमतें आसमान छूती हैं, तो देश 'Alternative Energy' की तलाश करते हैं। यहाँ चीन का असली खेल शुरू होता है।

 

Solar & Wind: दुनिया के 70% से अधिक सोलर पैनल और विंड टर्बाइन सप्लाई चेन पर चीन का नियंत्रण है।

 

Battery & EV: इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए जरूरी लिथियम-आयन बैटरी के मार्केट में चीन का कोई मुकाबला नहीं है।

 

The Switch: जैसे ही तेल-आयात करने वाले देश (जैसे भारत या यूरोपीय देश) रिन्यूएबल की तरफ मुड़ेंगे, उन्हें चीन से ही सामान खरीदना होगा। यानी हर हाल में फायदा बीजिंग का ही है।

 

भारत के लिए क्या है सबक?

भारत अपनी जरूरत का 80% से ज्यादा तेल आयात करता है। चीन की यह 'Strategic Foresight' (दूरदर्शिता) भारत के लिए एक अलार्म है। जहाँ अमेरिका जैसा सुपरपावर अपने रिजर्व खाली कर चुका है, वहीं चीन का भरा हुआ भंडार उसे युद्ध के समय सौदेबाजी की ताकत (Bargaining Power) देता है।

 

जिम वांडेहेई के 'Behind the Curtain' कॉलम से यह साफ़ है कि बीजिंग ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर जो 'Stress Test' पास किया है, वह उसे आने वाले दशकों तक ग्लोबल लीडर बनाए रख सकता है। युद्ध के बीच जहाँ अमेरिका के लिए अपना रिजर्व दोबारा भरना नामुमकिन लग रहा है, वहीं चीन अपने 1.4 बिलियन बैरल के साथ चैन की नींद सो रहा है।

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Deadspin | Steelers, amid QB uncertainty, select Drew Allar in third round <div id=""><section id="0" class=" w-full"><div class="xl:container mx-0 !px-4 py-0 pb-4 !mx-0 !px-0"><img src="https://images.deadspin.com/tr:w-900/28365334.jpg" srcset="https://images.deadspin.com/tr:w-900/28365334.jpg" alt="NFL: Combine" class="w-full" fetchpriority="high" loading="eager"/><span class="text-0.8 leading-tight">Feb 28, 2026; Indianapolis, IN, USA; Penn State quarterback Drew Allar (QB02) during the NFL Scouting Combine at Lucas Oil Stadium. Mandatory Credit: Kirby Lee-Imagn Images<!-- --> <!-- --> </span></div></section><section id="section-1"> <p>With Aaron Rodgers yet to commit to extending his career into 2026, the Pittsburgh Steelers made a move to bolster the quarterback position, selecting Penn State’s Drew Allar in the third round of the draft on Friday.</p> </section><section id="section-2"> <p>The Steelers used the 76th overall selection on Allar, who is coming off a broken left ankle that ended his 2025 season in October.</p> </section><section id="section-3"> <p>The choice of Allar was cheered wildly at the draft site in Pittsburgh considering that he played for the Nittany Lions to the east in State College.</p> </section><section id="section-4"> <p>Rodgers, 42, started 16 of the Steelers’ 17 games last season, with the team going 10-6 in those contests. He is mulling a return for a 22nd NFL season or retirement.</p> </section><br/><section id="section-5"> <p>Allar put up impressive numbers for Penn State during his 2 1/2 years as a starter.</p> </section> <section id="section-6"> <p>In 2023, he threw for 2,631 yards on a 59.9% completion rate with 25 touchdown passes and two interceptions. The following year, he connected on 66.5% of his throws for 3,327 yards and 24 TDs with eight interceptions as the Nittany Lions reached the College Football Playoff semifinals.</p> </section><section id="section-7"> <p>Last season, Allar had a 64.8% completion rate, 1,100 passing yards, eight touchdowns and three interceptions in his abbreviated campaign.</p> </section><section id="section-8"> <p>He also ran for 12 career touchdowns.</p> </section><section id="section-9"> <p>The Steelers’ other options at quarterback include Mason Rudolph, who has a 9-9-1 career record as a starter, and Will Howard, a sixth-round pick last year who didn’t see any action.</p> </section><br/><section id="section-10"> <p>–Field Level Media</p> </section> </div> #Deadspin #Steelers #uncertainty #select #Drew #Allar

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RCB vs GT, IPL 2026: Kohli’s mindset sets him apart, says Gujarat Titans assistant coach Dahiya after five-wicket loss <div id="content-body-70904766" itemprop="articleBody"><p>Gujarat Titans (GT) assistant coach Vijay Dahiya heaped rich praise on Virat Kohli, saying the former India captain’s relentless drive and hunger to improve continue to set him apart.</p><p>Kohli won the Man of the Match award for his match-defining 44-ball 81 in Royal Challengers Bengaluru’s (RCB) five-wicket win against GT in the Indian Premier League fixture in Bengaluru on Friday.</p><p>Dahiya revealed that Kohli was disappointed despite his strong innings, reflecting the batter’s high standards.</p><p>“After the game, he was saying he could have converted it into a hundred. That tells you about his mindset,” Dahiya said at the post-match press conference.</p><p>Highlighting what makes Kohli special, Dahiya pointed to his energy, awareness and ability to control the game.</p><p><b>READ | <a href="https://sportstar.thehindu.com/cricket/ipl/virat-kohli-comments-rcb-vs-gt-chinnaswamy-stadium-ipl-2026-home-campaign-royal-challengers-bengaluru/article70904397.ece" target="_self">Virat Kohli hopes to return to ‘special’ Chinnaswamy later this season after RCB’s win over Gujarat Titans</a></b></p><p>“When you are commanding the situation, you make bowlers bowl where you want. He made the wicket look easy, but it wasn’t,” Dahiya noted, adding that the knock came against “world-class bowlers”.</p><p>“I think it’s amazing. If you look at his energy… his awareness, his energy and his willingness.</p><p>“That willingness to do well… his mindset sets him apart from a lot of other people.”</p><p>“He is still one of the best runners and keeps pushing youngsters for extra runs. That willingness to do well — that ‘ <i>zid</i> (relentless drive)’ — is what stands out,’ Dahiya said.</p><p>The GT assistant coach stressed that Kohli’s motivation is internal rather than driven by external expectations.</p><p>“He is not playing to prove a point to anyone. It’s about the man in the mirror — trying to be better than yesterday,” he explained.</p><p>On the match, Dahiya admitted GT may have fallen short by some more runs with the bat, having been restricted to 205 after looking good for more than 220 at one stage.</p><p>“We probably could have had a few more runs on the board,” he said, while maintaining that the team’s aggressive template remains unchanged.</p><p>“The approach has been driven by fearless cricket, especially from youngsters,” he added.</p><p>Dahiya also dismissed suggestions that experienced batters need to take cues from the younger generation.</p><p>“It’s not about young or experienced. Everyone has a role. Experienced players know how to adapt, and they are self-inspired,” he said.</p><p class="publish-time" id="end-of-article">Published on Apr 25, 2026</p></div> #RCB #IPL #Kohlis #mindset #sets #Gujarat #Titans #assistant #coach #Dahiya #fivewicket #loss

इंटरनेट डेस्क। बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार और उर्वशी रौतेला को लेकर एक बड़ी खबर आई है। खबर ये है कि आगामी समय में दोनों एक फिल्म में अभिनय करते नजर आएंगे। बॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने 1000 करोड़ के बड़े बजट वाली फिल्म के लिए डबिंग शुरू कर दी है।

इसमें उनके साथ अक्षय कुमार भी नजर आएंगे। यह प्रोजेक्ट पहले से ही अपनी स्टार-स्टडेड कास्ट के कारण काफी सुर्खियों में रहा है। अब पोस्ट-प्रोडक्शन के साथ तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। आपको बता दें कि उर्वशी रौतेला की गिनती भी बॉलीवुड की स्टार अभिनेत्रयों में होती है।

वह अपने ग्लैमरस स्क्रीन प्रेजेंस और लगातार विकसित होते अभिनय के लिए जानी जाती हैं। इस अभिनेत्री ने अब डबिंग स्टूडियो से कुछ झलकियां भी साझा की हैं, जिससे उनकी भूमिका को बेहतर बनाने के प्रति उनकी मेहनत साफ नजर आती है। फिल्म को लेकर प्रशंसकों की भी उत्सुकता बढ़ती जा रही है।

PC:India.com
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Bollywood,Akshay Kumar, Urvashi Rautela, Hindi news">Bollywood: 1000 करोड़ के बड़े बजट वाली फिल्म में उर्वशी रौतेला के साथ नजर आएंगे अक्षय कुमार   इंटरनेट डेस्क। बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार और उर्वशी रौतेला को लेकर एक बड़ी खबर आई है। खबर ये है कि आगामी समय में दोनों एक फिल्म में अभिनय करते नजर आएंगे। बॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने 1000 करोड़ के बड़े बजट वाली फिल्म के लिए डबिंग शुरू कर दी है।

इसमें उनके साथ अक्षय कुमार भी नजर आएंगे। यह प्रोजेक्ट पहले से ही अपनी स्टार-स्टडेड कास्ट के कारण काफी सुर्खियों में रहा है। अब पोस्ट-प्रोडक्शन के साथ तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। आपको बता दें कि उर्वशी रौतेला की गिनती भी बॉलीवुड की स्टार अभिनेत्रयों में होती है।

वह अपने ग्लैमरस स्क्रीन प्रेजेंस और लगातार विकसित होते अभिनय के लिए जानी जाती हैं। इस अभिनेत्री ने अब डबिंग स्टूडियो से कुछ झलकियां भी साझा की हैं, जिससे उनकी भूमिका को बेहतर बनाने के प्रति उनकी मेहनत साफ नजर आती है। फिल्म को लेकर प्रशंसकों की भी उत्सुकता बढ़ती जा रही है।

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Bollywood,Akshay Kumar, Urvashi Rautela, Hindi news">Bollywood: 1000 करोड़ के बड़े बजट वाली फिल्म में उर्वशी रौतेला के साथ नजर आएंगे अक्षय कुमार

Bollywood: 1000 करोड़ के बड़े बजट वाली फिल्म में उर्वशी रौतेला के साथ नजर आएंगे अक्षय कुमार   इंटरनेट डेस्क। बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार और उर्वशी रौतेला को लेकर एक बड़ी खबर आई है। खबर ये है कि आगामी समय में दोनों एक फिल्म में अभिनय करते नजर आएंगे। बॉलीवुड की खूबसूरत अभिनेत्री उर्वशी रौतेला ने 1000 करोड़ के बड़े बजट वाली फिल्म के लिए डबिंग शुरू कर दी है।

इसमें उनके साथ अक्षय कुमार भी नजर आएंगे। यह प्रोजेक्ट पहले से ही अपनी स्टार-स्टडेड कास्ट के कारण काफी सुर्खियों में रहा है। अब पोस्ट-प्रोडक्शन के साथ तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। आपको बता दें कि उर्वशी रौतेला की गिनती भी बॉलीवुड की स्टार अभिनेत्रयों में होती है।

वह अपने ग्लैमरस स्क्रीन प्रेजेंस और लगातार विकसित होते अभिनय के लिए जानी जाती हैं। इस अभिनेत्री ने अब डबिंग स्टूडियो से कुछ झलकियां भी साझा की हैं, जिससे उनकी भूमिका को बेहतर बनाने के प्रति उनकी मेहनत साफ नजर आती है। फिल्म को लेकर प्रशंसकों की भी उत्सुकता बढ़ती जा रही है।

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इसमें उनके साथ अक्षय कुमार भी नजर आएंगे। यह प्रोजेक्ट पहले से ही अपनी स्टार-स्टडेड कास्ट के कारण काफी सुर्खियों में रहा है। अब पोस्ट-प्रोडक्शन के साथ तेजी से अपने अंतिम चरण की ओर बढ़ रहा है। आपको बता दें कि उर्वशी रौतेला की गिनती भी बॉलीवुड की स्टार अभिनेत्रयों में होती है।

वह अपने ग्लैमरस स्क्रीन प्रेजेंस और लगातार विकसित होते अभिनय के लिए जानी जाती हैं। इस अभिनेत्री ने अब डबिंग स्टूडियो से कुछ झलकियां भी साझा की हैं, जिससे उनकी भूमिका को बेहतर बनाने के प्रति उनकी मेहनत साफ नजर आती है। फिल्म को लेकर प्रशंसकों की भी उत्सुकता बढ़ती जा रही है।

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