गुजरात स्थानीय निकाय चुनाव : अहमदाबाद में कांग्रेस, सूरत में AAP और वडोदरा-राजकोट में BJP की प्रतिष्ठा दांव पर

अहमदाबाद: कांग्रेस के लिए विपक्ष का पद बचाने की चुनौती
कॉमनवेल्थ गेम्स 2030 की मेजबानी करने जा रहे अहमदाबाद में कांग्रेस की प्रतिष्ठा दांव पर है। अहमदाबाद नगर निगम की 192 सीटों में से पिछली बार भाजपा ने 159 जीती थीं, जबकि कांग्रेस 25 सीटें जीतकर विपक्ष का स्थान बचाने में सफल रही थी। इस बार ओवैसी की पार्टी (AIMIM) भी मैदान में है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कांग्रेस अपना गढ़ और विपक्ष के नेता का पद बचा पाती है या नहीं।
सूरत: AAP के लिए दिल्ली मॉडल की फिर से परीक्षा
डायमंड सिटी सूरत में पिछली बार 17 सीटें जीतकर सनसनी मचाने वाली आम आदमी पार्टी (AAP) के लिए यह चुनाव अस्तित्व की लड़ाई है। पिछले पांच वर्षों में बदले राजनीतिक समीकरणों और दिल्ली-पंजाब में पार्टी की स्थिति के बीच, क्या AAP अपना पिछला प्रदर्शन दोहरा पाएगी? सूरत की 120 सीटों पर भाजपा का दबदबा है, जबकि पिछली बार शून्य पर रही कांग्रेस इस बार वापसी के लिए संघर्ष कर रही है।
वडोदरा: भाजपा के गढ़ में आंतरिक बगावत का सामना
वडोदरा में भाजपा के लिए इस बार राह थोड़ी कठिन नजर आ रही है। पिछली बार 76 में से 69 सीटें जीतने वाली भाजपा के सामने विश्वामित्री की बाढ़, हरणी नाव दुर्घटना और भ्रष्टाचार के आरोप बड़ी चुनौतियां हैं। इसके अलावा, दो पार्षदों की बगावत और श्रीवास्तव भाइयों की संयुक्त लड़ाई भाजपा के वोट बैंक में सेंध लगा सकती है। वहीं, कांग्रेस शहर अध्यक्ष ऋत्विक जोशी के लिए भी विपक्ष के नेता का पद वापस पाना प्रतिष्ठा का सवाल है।
राजकोट: टीआरपी कांड और क्षत्रिय आंदोलन के बीच जंग
सौराष्ट्र के केंद्र राजकोट में इस बार स्थानीय मुद्दे भारी पड़ सकते हैं। टीआरपी गेम जोन अग्निकांड और पुरुषोत्तम रूपाला के बयान से नाराज क्षत्रिय समुदाय का असर मतदान पर देखने को मिल सकता है। कांग्रेस ने नैनाबा जडेजा और आरजे आभा जैसे नए चेहरों को उतारकर भाजपा को कड़ी टक्कर देने की कोशिश की है। खास बात यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय रूपाणी की अनुपस्थिति में भाजपा इस गढ़ को सुरक्षित रखने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा रही है।
Edited By : Chetan Gour


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