इंदौर से पीथमपुर को जोड़ने के लिए मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन द्वारा बनाए जा रहे प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन रविवार को मुख्यमंत् …और पढ़ें
HighLights
- पांच वर्ष में 20 हजार करोड़ के निवेश की संभावना, तीन लाख लोगों को मिलेगा रोजगार
- मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीआइडीसी) द्वारा इसका निर्माण किया जाएगा
- इकोनॉमिक कॉरिडोर 75 मीटर चौड़ाई के साथ 20 किलोमीटर लंबी सड़क होगी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, इंदौर। इंदौर से पीथमपुर को जोड़ने के लिए प्रस्तावित इकोनॉमिक कॉरिडोर का भूमिपूजन रविवार को मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने किया। मप्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कार्पोरेशन (एमपीआइडीसी) द्वारा इसका निर्माण किया जाएगा।
मुख्यमंत्री डा. मोहन यादव ने भूमि के प्रतिफल के रूप में मिलने वाली भूमि को 50% से बढ़ाकर 60% करने का निर्णय लिया है। इकोनॉमिक कॉरिडोर 75 मीटर चौड़ाई के साथ 20 किलोमीटर लंबी सड़क होगी। इसके दोनों तरफ 300-300 मीटर में विकसित होने वाली परियोजना क्षेत्र में वाणिज्यिक, आवासीय, पीएसपी, लाजिस्टिक एवं औद्योगिक भूखंडों को विकसित किया जाएगा।
नैनोद से सोनवाय गांव तक कॉरिडोर के पहले चरण में 75 मीटर के मुख्य विकास के लिए टेंडर जारी हो चुके हैं। इसके पहले चरण में करीब 326.51 करोड़ रुपये खर्च होंगे। उद्योग विभाग का बोर्ड इस प्रोजेक्ट के लिए 2160 करोड़ रुपये की पहले ही मंजूरी दे चुका है। परियोजना की कुल लागत लगभग 2360 करोड़ रुपये प्रस्तावित है। इस योजना में इंदौर और पीथमपुर के 17 गांव शामिल हैं।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के पहुंचने से पहले यहां लगा स्वागत गेट गिर गया, जिसे तुरंत खड़ा किया गया। भूमिपूजन कार्यक्रम के दौरान मंच से मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का स्वागत के लिए नाम पुकारा गया, लेकिन मुख्यमंत्री ने चंद्रमौली शुक्ला को बोला पहले मंत्री तुलसी सिलावट का स्वागत करो। कैलाश जी का स्वागत होना रह गया।
कॉरिडोर के लिए जमीन देने वाले किसानों को मंच पर बैठाया
इंदौर-पीथमपुर इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत करीब 1300 हेक्टेयर जमीन अधिसूचित की गई है। कार्यक्रम के दौरान ग्राम नैनोद, भैंसलाय, सिंदोड़ा, बिसनावदा के किसानों को भी मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के साथ मंच बैठाया गया। इन किसानों ने इस प्रोजेक्ट के लिए अपनी जमीनें दी हैं।
2030 तक 2.70 लाख करोड़ होगी इंदौर की जीडीपी
सांसद शंकर लालवानी ने बताया कि इस परियोजना से इंदौर में अगले पांच वर्ष में 20 हजार करोड़ का निवेश प्राप्त होने की संभावना है। वर्ष 2030 तक इंदौर की जीडीपी 1.25 लाख से बढ़कर 2.70 लाख करोड़ करने में यह कारिडोर महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। कारिडोर के जरिए आइटी, लाजिस्टिक्स, फिनटेक, एरोसिटी और ग्रीन इंडस्ट्री जैसे सेक्टर विकसित किए जाएंगे, जिससे बड़े स्तर पर रोजगार के अवसर बनेंगे। प्रोजेक्ट से प्रत्यक्ष रूप से एक लाख से अधिक और अप्रत्यक्ष रूप से लगभग तीन लाख रोजगार सृजित होने का अनुमान है।
यह रहेगी कारिडोर की खासियत
- पीथमपुर से एयरपोर्ट की कनेक्टिविटी बेहतर होगी, जिससे देश-विदेश से आने वाले उद्योगों और कंपनियों के अधिकारियों को सुविधा मिलेगी।
- यहां डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर जैसी उन्नत इंडस्ट्री के लिए भी विशेष प्रविधान किए गए हैं।
- कुल परियोजना लागत लगभग 2500 करोड़ सरकार निवेश करेगी
- यह मार्ग राष्ट्रीय राजमार्ग-52 (आगरा-मुंबई) और राष्ट्रीय राजमार्ग-47 (इंदौर-अहमदाबाद) को आपस में जोड़ेगा, जिससे शहर में ट्रैफिक का दबाव कम होगा।
- कारिडोर एयरपोर्ट से जुड़ा होने के कारण उज्जैन-इंदौर मेट्रोपालिटन रीजन के विकास को भी गति देगा।
- पीथमपुर औद्योगिक क्षेत्र, मल्टी माडल लाजिस्टिक पार्क, पीथमपुर आटो क्लस्टर जैसे बड़े औद्योगिक क्षेत्रों को सीधा लाभ मिलेगा।
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