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LIVE: पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह
	
		Suvendu Adhikari Oath taking Ceremony : वरिष्‍ठ भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी कुछ ही देर में मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनियता की शपथ लेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई दिग्गज शामिल। पल पल की जानकारी…


	-अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी समेत कई केंद्रीय मंत्री भी समारोह में शामिल।

	-सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में योगी आदित्यनाथ, भूपेंद्र पटेल, पुष्‍कर धामी समेत 20 राज्यो के मुख्‍यमंत्री पहुंचे।एक गाड़ी में सवार होकर शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शुभेंदु अधिकारी। 
	-ब्रिगेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रोड शो शुरू हो गया है। पीएम ने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया।

	
		
			#WATCH | कोलकाता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचे, जहां पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होने वाला है।
			
			भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। pic.twitter.com/M4wdBGxeV9
		— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 9, 2026
	

	 
	-पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी मंच पर पहुंचे, कुछ ही देर में शुरू होगा शपथ ग्रहण समारोह।
	-पश्‍चिम बंगाल के गर्वनर आरएन रवि भी शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे।

	-शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचे।
	-शुभेंदु अधिकारी के साथ चार और विधायक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।-पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी ने समारोह स्थल पर रविंद्र नाथ टैगौर को श्रद्धांजलि दी।
-जेपी नड्‍डा, शिवराजसिंह चौहान, चिराग पासवान, एकनाथ शिंदे, स्मृति ईरानी, मिथुन चक्रवती समेत कई दिग्गज भी कार्यक्रम में शामिल।

LIVE: पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह

LIVE: पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी सरकार का शपथ ग्रहण समारोह
	
		Suvendu Adhikari Oath taking Ceremony : वरिष्‍ठ भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी कुछ ही देर में मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनियता की शपथ लेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई दिग्गज शामिल। पल पल की जानकारी…


	-अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी समेत कई केंद्रीय मंत्री भी समारोह में शामिल।

	-सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में योगी आदित्यनाथ, भूपेंद्र पटेल, पुष्‍कर धामी समेत 20 राज्यो के मुख्‍यमंत्री पहुंचे।एक गाड़ी में सवार होकर शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शुभेंदु अधिकारी। 
	-ब्रिगेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रोड शो शुरू हो गया है। पीएम ने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया।

	
		
			#WATCH | कोलकाता: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचे, जहां पश्चिम बंगाल में भाजपा सरकार का शपथ ग्रहण समारोह होने वाला है।
			
			भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ लेंगे। pic.twitter.com/M4wdBGxeV9
		— ANI_HindiNews (@AHindinews) May 9, 2026
	

	 
	-पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी मंच पर पहुंचे, कुछ ही देर में शुरू होगा शपथ ग्रहण समारोह।
	-पश्‍चिम बंगाल के गर्वनर आरएन रवि भी शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे।

	-शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचे।
	-शुभेंदु अधिकारी के साथ चार और विधायक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।-पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी ने समारोह स्थल पर रविंद्र नाथ टैगौर को श्रद्धांजलि दी।
-जेपी नड्‍डा, शिवराजसिंह चौहान, चिराग पासवान, एकनाथ शिंदे, स्मृति ईरानी, मिथुन चक्रवती समेत कई दिग्गज भी कार्यक्रम में शामिल।Suvendu Adhikari Oath taking Ceremony : वरिष्‍ठ भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी कुछ ही देर में मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनियता की शपथ लेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई दिग्गज शामिल। पल पल की जानकारी…


-अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी समेत कई केंद्रीय मंत्री भी समारोह में शामिल।

-सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में योगी आदित्यनाथ, भूपेंद्र पटेल, पुष्‍कर धामी समेत 20 राज्यो के मुख्‍यमंत्री पहुंचे।

एक गाड़ी में सवार होकर शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शुभेंदु अधिकारी। 

-ब्रिगेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रोड शो शुरू हो गया है। पीएम ने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया।

 

-पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी मंच पर पहुंचे, कुछ ही देर में शुरू होगा शपथ ग्रहण समारोह।
-पश्‍चिम बंगाल के गर्वनर आरएन रवि भी शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे।

-शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचे।
-शुभेंदु अधिकारी के साथ चार और विधायक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।

-पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी ने समारोह स्थल पर रविंद्र नाथ टैगौर को श्रद्धांजलि दी।
-जेपी नड्‍डा, शिवराजसिंह चौहान, चिराग पासवान, एकनाथ शिंदे, स्मृति ईरानी, मिथुन चक्रवती समेत कई दिग्गज भी कार्यक्रम में शामिल।

Suvendu Adhikari Oath taking Ceremony : वरिष्‍ठ भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी कुछ ही देर में मुख्यमंत्री के रूप में पद और गोपनियता की शपथ लेंगे। कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, भाजपा के राष्‍ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन समेत कई दिग्गज शामिल। पल पल की जानकारी…

-अमित शाह, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी समेत कई केंद्रीय मंत्री भी समारोह में शामिल।

-सुवेंदु अधिकारी के शपथ ग्रहण समारोह में योगी आदित्यनाथ, भूपेंद्र पटेल, पुष्‍कर धामी समेत 20 राज्यो के मुख्‍यमंत्री पहुंचे।

एक गाड़ी में सवार होकर शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शुभेंदु अधिकारी। 

-ब्रिगेड ग्राउंड में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का रोड शो शुरू हो गया है। पीएम ने समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया।

 

-पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी मंच पर पहुंचे, कुछ ही देर में शुरू होगा शपथ ग्रहण समारोह।
-पश्‍चिम बंगाल के गर्वनर आरएन रवि भी शपथ ग्रहण समारोह में पहुंचे।

-शपथ ग्रहण समारोह में शामिल होने के लिए बड़ी संख्या में लोग कोलकाता के प्रतिष्ठित ब्रिगेड परेड ग्राउंड पहुंचे।
-शुभेंदु अधिकारी के साथ चार और विधायक मंत्री पद की शपथ ले सकते हैं।

-पीएम मोदी और शुभेंदु अधिकारी ने समारोह स्थल पर रविंद्र नाथ टैगौर को श्रद्धांजलि दी।
-जेपी नड्‍डा, शिवराजसिंह चौहान, चिराग पासवान, एकनाथ शिंदे, स्मृति ईरानी, मिथुन चक्रवती समेत कई दिग्गज भी कार्यक्रम में शामिल।

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स्टार प्लस का नया शो फितूर अपने नए प्रोमो के जरिए एक ऐसी कहानी लेकर आया है, जिससे कई लड़कियाँ खुद को जोड़ पाएंगी। यह प्रोमो उन भावनाओं को दिखाता है, जिनसे कई लड़कियाँ पहली बार गर्ल्स स्कूल से निकलकर को-एड कॉलेज में जाने के दौरान गुजरती हैं।

कई लड़कियों के लिए यह सिर्फ कॉलेज की शुरुआत नहीं होती, बल्कि एक नया अनुभव होता है। नए माहौल में घुलना-मिलना, झिझक, घबराहट और अनजान लोगों के बीच खुद को सहज महसूस करना आसान नहीं होता। फितूर इन्हीं भावनाओं को सामने लाते हुए लड़कियों को खुद पर भरोसा रखने और नई शुरुआत को आत्मविश्वास के साथ अपनाने का संदेश देता है।

प्रोमो पर बात करते हुए देबचंद्रिमा सिंहा रॉय ने कहा, "इस प्रोमो ने मुझे बहुत छू लिया क्योंकि यह ऐसी यात्रा है, जिससे बहुत-सी लड़कियाँ गुजरती हैं। गर्ल्स स्कूल के बाद पहली बार को-एड कॉलेज में जाना कई लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। मुझे उम्मीद है कि जो भी लड़की यह प्रोमो देखेगी, उसे लगेगा कि उसकी भावनाओं को समझा गया है। घबराना बिल्कुल सामान्य है। समय और खुद पर भरोसे के साथ हर नई शुरुआत एक खूबसूरत अध्याय बन जाती है।"

अपडेट खबरों के लिए हमारावॉट्सएप चैनलफोलो करें

Fitoor,emotional journey,girls,college, Hindi news">‘फितूर’ में दिखेगा को-एड कॉलेज में कदम रखने वाली लड़कियों का भावनात्मक सफर   स्टार प्लस का नया शो फितूर अपने नए प्रोमो के जरिए एक ऐसी कहानी लेकर आया है, जिससे कई लड़कियाँ खुद को जोड़ पाएंगी। यह प्रोमो उन भावनाओं को दिखाता है, जिनसे कई लड़कियाँ पहली बार गर्ल्स स्कूल से निकलकर को-एड कॉलेज में जाने के दौरान गुजरती हैं।

कई लड़कियों के लिए यह सिर्फ कॉलेज की शुरुआत नहीं होती, बल्कि एक नया अनुभव होता है। नए माहौल में घुलना-मिलना, झिझक, घबराहट और अनजान लोगों के बीच खुद को सहज महसूस करना आसान नहीं होता। फितूर इन्हीं भावनाओं को सामने लाते हुए लड़कियों को खुद पर भरोसा रखने और नई शुरुआत को आत्मविश्वास के साथ अपनाने का संदेश देता है।



प्रोमो पर बात करते हुए देबचंद्रिमा सिंहा रॉय ने कहा, "इस प्रोमो ने मुझे बहुत छू लिया क्योंकि यह ऐसी यात्रा है, जिससे बहुत-सी लड़कियाँ गुजरती हैं। गर्ल्स स्कूल के बाद पहली बार को-एड कॉलेज में जाना कई लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। मुझे उम्मीद है कि जो भी लड़की यह प्रोमो देखेगी, उसे लगेगा कि उसकी भावनाओं को समझा गया है। घबराना बिल्कुल सामान्य है। समय और खुद पर भरोसे के साथ हर नई शुरुआत एक खूबसूरत अध्याय बन जाती है।"

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Fitoor,emotional journey,girls,college, Hindi news">‘फितूर’ में दिखेगा को-एड कॉलेज में कदम रखने वाली लड़कियों का भावनात्मक सफर

‘फितूर’ में दिखेगा को-एड कॉलेज में कदम रखने वाली लड़कियों का भावनात्मक सफर   स्टार प्लस का नया शो फितूर अपने नए प्रोमो के जरिए एक ऐसी कहानी लेकर आया है, जिससे कई लड़कियाँ खुद को जोड़ पाएंगी। यह प्रोमो उन भावनाओं को दिखाता है, जिनसे कई लड़कियाँ पहली बार गर्ल्स स्कूल से निकलकर को-एड कॉलेज में जाने के दौरान गुजरती हैं।

कई लड़कियों के लिए यह सिर्फ कॉलेज की शुरुआत नहीं होती, बल्कि एक नया अनुभव होता है। नए माहौल में घुलना-मिलना, झिझक, घबराहट और अनजान लोगों के बीच खुद को सहज महसूस करना आसान नहीं होता। फितूर इन्हीं भावनाओं को सामने लाते हुए लड़कियों को खुद पर भरोसा रखने और नई शुरुआत को आत्मविश्वास के साथ अपनाने का संदेश देता है।



प्रोमो पर बात करते हुए देबचंद्रिमा सिंहा रॉय ने कहा, "इस प्रोमो ने मुझे बहुत छू लिया क्योंकि यह ऐसी यात्रा है, जिससे बहुत-सी लड़कियाँ गुजरती हैं। गर्ल्स स्कूल के बाद पहली बार को-एड कॉलेज में जाना कई लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। मुझे उम्मीद है कि जो भी लड़की यह प्रोमो देखेगी, उसे लगेगा कि उसकी भावनाओं को समझा गया है। घबराना बिल्कुल सामान्य है। समय और खुद पर भरोसे के साथ हर नई शुरुआत एक खूबसूरत अध्याय बन जाती है।"

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स्टार प्लस का नया शो फितूर अपने नए प्रोमो के जरिए एक ऐसी कहानी लेकर आया है, जिससे कई लड़कियाँ खुद को जोड़ पाएंगी। यह प्रोमो उन भावनाओं को दिखाता है, जिनसे कई लड़कियाँ पहली बार गर्ल्स स्कूल से निकलकर को-एड कॉलेज में जाने के दौरान गुजरती हैं।

कई लड़कियों के लिए यह सिर्फ कॉलेज की शुरुआत नहीं होती, बल्कि एक नया अनुभव होता है। नए माहौल में घुलना-मिलना, झिझक, घबराहट और अनजान लोगों के बीच खुद को सहज महसूस करना आसान नहीं होता। फितूर इन्हीं भावनाओं को सामने लाते हुए लड़कियों को खुद पर भरोसा रखने और नई शुरुआत को आत्मविश्वास के साथ अपनाने का संदेश देता है।

प्रोमो पर बात करते हुए देबचंद्रिमा सिंहा रॉय ने कहा, "इस प्रोमो ने मुझे बहुत छू लिया क्योंकि यह ऐसी यात्रा है, जिससे बहुत-सी लड़कियाँ गुजरती हैं। गर्ल्स स्कूल के बाद पहली बार को-एड कॉलेज में जाना कई लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। मुझे उम्मीद है कि जो भी लड़की यह प्रोमो देखेगी, उसे लगेगा कि उसकी भावनाओं को समझा गया है। घबराना बिल्कुल सामान्य है। समय और खुद पर भरोसे के साथ हर नई शुरुआत एक खूबसूरत अध्याय बन जाती है।"

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लंबे सूखे के बाद इंद्र देवता जम्‍मू कश्‍मीर पर कुछ मेहरबान तो हुए पर बादल फटने की लगातार हो रही घटनाएं अब डराने लगी हैं। यह डर इसलिए है क्‍योंकि जम्मू कश्मीर में इस महीने अब तक कम से कम 15 बार बादल फटने की घटनाएं हुई हैं, जिनकी वजह से कई जिलों में अचानक बाढ़, कीचड़ बहने और जमीन खिसकने (लैंडस्लाइड) की घटनाएं हुई हैं। ALSO READ: अब वैष्‍णो देवी चढ़ावे में घोटाला! 550 करोड़ की चांदी के गबन का आरोप

 

बादल फटने से भारी तबाही

इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जि‍ले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई। 
 

इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।

 

7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।

चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल 

बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।

 

वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण

 

इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।

 

उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास। 

रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, ​​जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।

 

मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
 

जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।

Jammu Kashmir Cloudburst, Jammu Kashmir Weather, Cloudburst News, Flash Flood Jammu Kashmir, Doda Cloudburst, Anantnag Weather, Gurez Valley News, Himalaya Climate Change, Landslide Jammu Kashmir, IMD Weather News, जम्मू कश्मीर बादल फटे, बादल फटने की घटनाएं, जम्मू कश्मीर मौसम">Jammu Kashmir Cloudburst: जुलाई में 15 बार बादल फटे, वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारणलंबे सूखे के बाद इंद्र देवता जम्‍मू कश्‍मीर पर कुछ मेहरबान तो हुए पर बादल फटने की लगातार हो रही घटनाएं अब डराने लगी हैं। यह डर इसलिए है क्‍योंकि जम्मू कश्मीर में इस महीने अब तक कम से कम 15 बार बादल फटने की घटनाएं हुई हैं, जिनकी वजह से कई जिलों में अचानक बाढ़, कीचड़ बहने और जमीन खिसकने (लैंडस्लाइड) की घटनाएं हुई हैं। ALSO READ: अब वैष्‍णो देवी चढ़ावे में घोटाला! 550 करोड़ की चांदी के गबन का आरोप																								
																														
																																			
	 
	बादल फटने से भारी तबाही

	इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जि‍ले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई। 
	 									
	इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।																									
																
																
																														
																														
																																			
	 
	7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।																								
																														
																																			
	चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल 

	बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।																								
																														
																																			
	 
	वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण
																								
																														
																																			
	 
	इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।																								
																														
																																			
	 
	उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास। 																																																									
																	
															
																														
																																			
	रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, ​​जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।																								
																														
																																			
	 
	मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
	 																								
																														
																																			
	जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।																								
																																																																		
																																	
																																														
																															
																																																														

								
															Jammu Kashmir Cloudburst, Jammu Kashmir Weather, Cloudburst News, Flash Flood Jammu Kashmir, Doda Cloudburst, Anantnag Weather, Gurez Valley News, Himalaya Climate Change, Landslide Jammu Kashmir, IMD Weather News, जम्मू कश्मीर बादल फटे, बादल फटने की घटनाएं, जम्मू कश्मीर मौसम

अब वैष्‍णो देवी चढ़ावे में घोटाला! 550 करोड़ की चांदी के गबन का आरोप

 

बादल फटने से भारी तबाही

इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जि‍ले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई। 
 

इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।

 

7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।

चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल 

बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।

 

वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण

 

इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।

 

उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास। 

रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, ​​जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।

 

मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
 

जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।

Jammu Kashmir Cloudburst, Jammu Kashmir Weather, Cloudburst News, Flash Flood Jammu Kashmir, Doda Cloudburst, Anantnag Weather, Gurez Valley News, Himalaya Climate Change, Landslide Jammu Kashmir, IMD Weather News, जम्मू कश्मीर बादल फटे, बादल फटने की घटनाएं, जम्मू कश्मीर मौसम">Jammu Kashmir Cloudburst: जुलाई में 15 बार बादल फटे, वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण
लंबे सूखे के बाद इंद्र देवता जम्‍मू कश्‍मीर पर कुछ मेहरबान तो हुए पर बादल फटने की लगातार हो रही घटनाएं अब डराने लगी हैं। यह डर इसलिए है क्‍योंकि जम्मू कश्मीर में इस महीने अब तक कम से कम 15 बार बादल फटने की घटनाएं हुई हैं, जिनकी वजह से कई जिलों में अचानक बाढ़, कीचड़ बहने और जमीन खिसकने (लैंडस्लाइड) की घटनाएं हुई हैं। ALSO READ: अब वैष्‍णो देवी चढ़ावे में घोटाला! 550 करोड़ की चांदी के गबन का आरोप

 

बादल फटने से भारी तबाही

इन घटनाओं से सड़कें, घर, खेती की जमीन और सार्वजनिक बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हुआ है और केंद्र शासित प्रदेश के कई हिस्सों में संपर्क व्यवस्था बाधित हुई है। हाल की घटनाओं में से एक डोडा जि‍ले के भलेसा इलाके से सामने आई, जहां अचानक आई बाढ़ अपने साथ कीचड़ और मलबा सड़कों पर ले आई, जिससे कई अंदरूनी गांवों तक पहुंच कट गई। 
 

इस महीने की शुरुआत में उत्तरी कश्मीर की तुलेल घाटी और गुरेज में भी कई बार बादल फटे, जिससे सड़कें और अन्य बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो गया।

 

7 जुलाई को डोडा जिले के ठाठरी के ऊपरी इलाकों में बादल फटा, जिससे बाढ़ का पानी और मलबा शहर में घुस गया। कई वाहन और दुकानें क्षतिग्रस्त हो गईं, और बहाली का काम शुरू होने से पहले डोडा-किश्तवाड़ नेशनल हाईवे पर यातायात बाधित रहा।

चिनाब में 12 घंंटे में 12 बार फटे बादल 

बादलों के फटने का क्रम यहीं नहीं रूका था और इस महीने की शुरुआत में, अधिकारियों ने चिनाब घाटी और उससे सटे ऊंचे इलाकों में लगभग 12 घंटों के भीतर 12 स्थानीय बादल फटने की घटनाओं को भी दर्ज किया, जिससे कई जगहों पर अचानक बाढ़ और जमीन खिसकने की घटनाएं हुईं। 11 जुलाई को अनंतनाग जिले के अवूरा और देहवाथु के वन क्षेत्रों में बादल फटने की दो घटनाएं सामने आईं। ओवेरा धारा के जलस्तर में अचानक वृद्धि से आस-पास के इलाके जलमग्न हो गए, जिसमें पहलगाम पर्यटक स्थल के होटल भी शामिल थे।

 

वैज्ञानिकों ने बताया बढ़ते खतरे का कारण

 

इंटरनेशनल जर्नल आफ डिजास्टर रिस्क रिडक्शन’ में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन, जिसमें जम्मू कश्मीर में बादल फटने और भारी बारिश की 68 घटनाओं का विश्लेषण किया गया, ने पुलवामा जिले में श्री अमरनाथ जी बेसिन और त्राल तहसील को सबसे संवेदनशील स्थानों के रूप में चिह्नित किया। शोधकर्ताओं ने कहा कि बार-बार होने वाली अत्यधिक बारिश ने इन क्षेत्रों में अचानक बाढ़, मलबे के बहाव और जमीन खिसकने के जोखिम को बढ़ा दिया है।

 

उत्तर-पश्चिमी हिमालय में बुनियादी ढांचे की कमजोरी की जांच करने वाली एक और स्टडी में पाया गया कि तीन घंटे में लगभग 40 मिमी और एक दिन में 60 से 140 मिमी बारिश से अचानक बाढ़ (फलैश फलड) और ढलान खिसकने जैसी घटनाएं हो सकती हैं, खासकर जम्मू-श्रीनगर नेशनल हाईवे जैसे ट्रांसपोर्ट कारिडोर के पास। 

रिसर्चर्स का कहना है कि इन नतीजों से पता चलता है कि पहाड़ी इलाकों में बेहतर खतरा मैपिंग, मौसम की निगरानी, ​​जमीन के इस्तेमाल की प्लानिंग और समय रहते चेतावनी देने वाले सिस्टम की जरूरत है, क्योंकि वहां कम समय में तेज बारिश की घटनाएं अधिक हो रही हैं।

 

मौसम विभाग के डेटा के अनुसार, पिछले दशक में जम्मू कश्मीर में स्थानीय स्तर पर मौसम की चरम घटनाओं में बढ़ोतरी देखी गई है। इस ट्रेंड की वजह तापमान का बढ़ना, वायुमंडलीय सर्कुलेशन में बदलाव और ग्लेशियर का दायरा कम होना है, जो पश्चिमी हिमालय में बारिश और बर्फबारी के पैटर्न को बदल रहे हैं।
 

जानकारों का कहना है कि भविष्य में मौसम की चरम घटनाओं के असर को कम करने के लिए फोरकास्टिंग सिस्टम को मजबूत करना, संवेदनशील इलाकों में निर्माण कार्यों को रेगुलेट करना और कम्युनिटी लेवल पर आपदा की तैयारी को बेहतर बनाना जरूरी होगा।

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